सतपाल महाराज, उत्तराखंड के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, सिंचाई, ग्रामीण निर्माण और लोक निर्माण मंत्री ने गुजरात के अहमदाबाद स्थित महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर में भाग लेते हुए राज्य के पर्यटन विकास की एक नई और भव्य रूपरेखा देश के सामने रखी।
इस राष्ट्रीय मंच से उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि उत्तराखंड साहसिक और आध्यात्मिक पर्यटन के मामले में पूरे देश का नेतृत्व करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विशेष तौर पर सीमांत जिले पिथौरागढ़ में आयोजित होने जा रही आदि कैलाश परिक्रमा अल्ट्रा रन का उल्लेख किया और कहा कि यह प्रतियोगिता दुनिया के सबसे कठिन और ऊंचे हिमालयी आयोजनों में अपनी एक विशिष्ट और अलग पहचान बना रही है। आगामी 20 से 25 अक्टूबर के बीच आयोजित होने वाली यह ऐतिहासिक दौड़ दुनिया भर के साहसिक खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को आकर्षित करेगी।
अहमदाबाद में आयोजित ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर का भव्य मंच
गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद में आयोजित इस महत्वपूर्ण पर्यटन मेले में देश-विदेश के प्रमुख ट्रैवल एजेंटों, टूर ऑपरेटरों, निवेशकों और मीडिया प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री ने राज्य की असीम संभावनाओं को बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड को केवल एक सामान्य राज्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह धरती अध्यात्म, योग, प्राकृतिक सुंदरता, प्राचीन लोक संस्कृति और रोमांच का एक अद्भुत और अनोखा संगम है। प्राचीन काल से ही यह पावन भूमि महान ऋषियों, मुनियों, तपस्वियों और करोड़ों श्रद्धालुओं की साधना स्थली रही है। अब राज्य सरकार इस महान धरोहर को आधुनिक पर्यटन की आवश्यकताओं के अनुसार नए सिरे से सजा और संवार रही है।
केवल चारधाम ही नहीं, अब समग्र पर्यटन पर विशेष ध्यान
राज्य सरकार की दूरगामी सोच को साझा करते हुए यह महत्वपूर्ण बात रेखांकित की गई कि उत्तराखंड की पहचान केवल चारधाम यात्रा तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरकार का मुख्य लक्ष्य पूरे राज्य को एक समग्र पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जहां वर्ष के बारह महीने पर्यटक आ सकें। इस विजन के तहत राज्य के हर कोने में पर्यटन की अलग-अलग विधाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इनमें साहसिक खेल, योग और वेलनेस केंद्र, ग्रामीण जीवन शैली का अनुभव कराने वाले पर्यटन स्थल, पर्यावरण के अनुकूल ईको-टूरिज्म, होमस्टे व्यवस्था और सीमांत क्षेत्रों का पर्यटन प्रमुखता से शामिल हैं। इस योजना से राज्य में पर्यटन का मौसम पूरे साल बना रहेगा और हर मौसम में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से सीमांत गांवों का कायाकल्प
प्रधानमंत्री के दूरदर्शी वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का जिक्र करते हुए यह जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड के दूरदराज और अंतिम छोर पर बसे सीमांत गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जैसे सीमांत जिलों के गांवों में पर्यटन और आजीविका की नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इस योजना का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। जब स्थानीय ग्रामीण पर्यटन गतिविधियों में सीधे भागीदार बनेंगे, तो उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इससे सीमांत क्षेत्रों से होने वाले पलायन पर भी स्थाई रूप से रोक लगेगी और सीमावर्ती इलाके सुरक्षित और समृद्ध बनेंगे।
होमस्टे योजना: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आई नई क्रांति
उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में शुरू की गई होमस्टे योजना आज एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक क्रांति का रूप ले चुकी है। इस समय प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हजारों होमस्टे पंजीकृत हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। देश और दुनिया से आने वाले पर्यटक अब महंगे होटलों के बजाय गांवों में स्थानीय परिवारों के साथ रुकना अधिक पसंद कर रहे हैं। इससे पर्यटकों को उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक खान-पान, लोक कलाओं और प्रसिद्ध पहाड़ी आतिथ्य सत्कार को बहुत करीब से जानने का अवसर मिल रहा है। दूसरी ओर, इस योजना के माध्यम से गांव की महिलाओं और युवाओं को अपने ही घर पर स्वरोजगार के बेहतरीन साधन मिल रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व ताकत मिल रही है।
चारधाम यात्रा प्रबंधन में आधुनिक डिजिटल तकनीक का उपयोग
लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के केंद्र चारधाम यात्रा को अधिक सुगम, सुरक्षित, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने कई साहसिक और आधुनिक कदम उठाए हैं। यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए आधुनिक आधार-आधारित पंजीकरण और ई-केवाईसी व्यवस्था को अनिवार्य और आसान बनाया गया है। इस पारदर्शी डिजिटल प्रणाली से यात्रा के दौरान यात्रियों की सटीक और सही जानकारी उपलब्ध रहती है, जिससे किसी भी विषम परिस्थिति या प्राकृतिक आपदा के समय तुरंत राहत और बचाव कार्य संभव हो पाता है। डिजिटल माध्यमों से कतार प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं को भी पूरी तरह से सुधार दिया गया है, ताकि दूर-दराज से आने वाले बुजुर्गों और श्रद्धालुओं को बिना किसी असुविधा के सुचारू दर्शन मिल सकें।
गुजरात और उत्तराखंड का अटूट भावनात्मक और सांस्कृतिक रिश्ता
इस राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान गुजरात और उत्तराखंड के बीच के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों पर विशेष जोर दिया गया। दोनों राज्यों का यह संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बेहद गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक रिश्ता है। गुजरात से हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु चारधाम, ऋषिकेश और हरिद्वार की यात्रा पर आते हैं। गुजरात के लोगों की अगाध धार्मिक श्रद्धा और वहां के उद्योगपतियों की उद्यमशीलता की भावना ने उत्तराखंड के विकास में हमेशा एक मजबूत सहयोगी की भूमिका निभाई है। सम्मेलन में इस बात पर बल दिया गया कि दोनों राज्यों के बीच यह व्यापारिक और सांस्कृतिक साझेदारी भविष्य में और भी ज्यादा मजबूत होगी।
निवेशकों और ट्रैवल एजेंसियों के लिए अपार संभावनाएं
अहमदाबाद में एकत्रित हुए देश भर के ट्रैवल ऑपरेटरों, टूर एजेंसियों, मीडिया जगत के प्रतिनिधियों और संभावित निवेशकों से यह विशेष आग्रह किया गया कि वे उत्तराखंड को केवल एक सामान्य पर्यटन स्थल के रूप में न देखें। इसे एक संपूर्ण हिमालयी अनुभव के रूप में देश और दुनिया के पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उत्तराखंड में वेलनेस, योग, ट्रैकिंग, रिवर राफ्टिंग, साहसिक खेल और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में निवेश की अपार और अनगिनत संभावनाएं मौजूद हैं। निवेशकों को भरोसा दिलाया गया कि राज्य सरकार उन्हें पूरी पारदर्शिता, सरल नीतियां और हर संभव प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
राष्ट्रीय मंच पर कई राज्यों के दिग्गजों की उपस्थिति
इस भव्य और गरिमापूर्ण राष्ट्रीय पर्यटन फेयर में देश के कई प्रमुख राज्यों के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन खाउंटे सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी मौजूद रहे। सम्मेलन में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों और प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड द्वारा साहसिक खेल, सीमांत पर्यटन और होमस्टे के क्षेत्र में किए जा रहे अभिनव प्रयोगों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने माना कि उत्तराखंड का यह मॉडल देश के अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण बन रहा है।
साहसिक पर्यटन का नया वैश्विक केंद्र बनता पिथौरागढ़
पिथौरागढ़ जिला, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सामरिक महत्व के लिए जाना जाता है, अब वैश्विक साहसिक पर्यटन का एक नया अध्याय लिख रहा है। आदि कैलाश परिक्रमा और इसके तहत होने वाली अल्ट्रा रन स्पर्धा केवल एक खेल आयोजन नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक बदलाव का एक बड़ा जरिया बन रही है। इस आयोजन के माध्यम से दुनिया भर के एथलीट और साहसिक खेल प्रेमी भारत की इस पवित्र भूमि की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। इससे अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर पिथौरागढ़ और उत्तराखंड का नाम बेहद गर्व के साथ दर्ज हो रहा है।
उत्तराखंड अब अपनी पारंपरिक धार्मिक पहचान से आगे बढ़कर ऑल-सीजन पर्यटन, साहसिक खेल और ग्रामीण विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। आदि कैलाश परिक्रमा अल्ट्रा रन जैसे विश्व स्तरीय आयोजनों, सीमांत गांवों के लिए वाइब्रेंट विलेज योजना और घर-घर पहुंच रही होमस्टे क्रांति से राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नया आधार मिल रहा है। आधुनिक डिजिटल तकनीक और पारदर्शी प्रबंधन के बल पर देवभूमि उत्तराखंड आने वाले समय में विश्व पर्यटन के नक्शे पर सबसे पसंदीदा और सुरक्षित गंतव्य के रूप में स्थापित होने जा रहा है।


