Homeराज्यसूरत का 'गूगल बॉय': सिर्फ 1 साल 9 महीने की उम्र में...

सूरत का ‘गूगल बॉय’: सिर्फ 1 साल 9 महीने की उम्र में कर्ण परमार ने इंटरनेशनल लेवल पर कमाया नाम, पूरे गुजरात में जश्न

सूरत। क्या कोई 21 महीने का बच्चा 170 से ज्यादा अलग-अलग चीजों को पलक झपकते ही पहचान कर उनके नाम बता सकता है? शायद सुनना नामुमकिन लगे, लेकिन गुजरात के सूरत में रहने वाले मासूम कर्ण परमार ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। अपनी इसी चमत्कारी याददाश्त के दम पर कर्ण ने पहले ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और फिर महज एक महीने बाद ही ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में ‘सुपर टैलेंटेड किड (वन इन ए मिलियन)’ का खिताब अपने नाम कर देश का गौरव बढ़ाया है।


फ्लैश कार्ड का जादू और गजब का आईक्यू
5 जुलाई 2024 को जन्मे कर्ण की इस अद्भुत प्रतिभा को देखकर बड़े-बड़े लोग हैरान हैं। कर्ण बिना अटके फ्लैश कार्ड्स के जरिए इन चीजों की सटीक पहचान कर लेता है:
इंग्लिश अल्फाबेट – ABCD
फल, सब्जियां, आकार और गाड़ियां
जंगली-पालतू जानवर और पक्षी
दुनिया के अलग-अलग देशों के राष्ट्रीय ध्वज
उसकी इस विलक्षण प्रतिभा को 14 मार्च 2026 को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज कर मान्यता दी गई।


नो मोबाइल, नो टीवी: पैरेंटिंग की अनोखी मिसाल
आज के दौर में जहां ज्यादातर माता-पिता बच्चों को चुप कराने के लिए उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं, वहीं कर्ण के पिता मिथुनभाई परमार और मां नेहालबेन परमार ने एक बिल्कुल अलग रास्ता चुना।
सीखने का अनोखा तरीका: कर्ण को जन्म से ही मोबाइल और टीवी स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखा गया।
मां की मेहनत: मां नेहालबेन ने धैर्य के साथ कर्ण को सिर्फ रंग-बिरंगी किताबों, एजुकेशनल गेम्स और फ्लैश कार्ड्स के जरिए चीजों को याद रखना सिखाया। पिता मिथुनभाई, जो सूरत में बारकोड प्रिंटर का बिजनेस करते हैं, अपने बेटे की इस सफलता को पूरे परिवार के लिए एक ऐतिहासिक पल मानते हैं।


पूरे गुजरात और समाज में जश्न का माहौल
मूल रूप से जूनागढ़ (अंबालियाला गांव) और अमरेली (केरियाचड गांव) से ताल्लुक रखने वाले इस परमार परिवार की इस खुशी में आज पूरा गुजरात शरीक है। कर्ण की इस अविश्वसनीय कामयाबी से सूरत से लेकर जूनागढ़-अमरेली और पूरे बाबर समाज में जश्न का माहौल है।
अभिभावकों के लिए बड़ा सबक: नन्हे कर्ण की यह कामयाबी आज के दौर के हर माता-पिता के लिए एक मिसाल है। यह कहानी बताती है कि अगर बच्चों को गैजेट्स और स्क्रीन की लत से बचाकर उन्हें सही दिशा, क्वालिटी टाइम और रचनात्मक माहौल दिया जाए, तो उनके भीतर छिपी प्रतिभा दुनिया को हैरान कर सकती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments