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11वां देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल: उत्तराखंड की वादियों में सजेगा भारतीय सिनेमा, कला और स्थानीय प्रतिभाओं का महाकुंभ

11वां देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल: उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों और शांत वातावरण के बीच बसा देहरादून एक बार फिर भारतीय सिनेमा, रंगमंच और रचनात्मकता के सबसे बड़े उत्सव की अगवानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। आगामी 2, 3 और 4 अक्टूबर को आयोजित होने वाला 11वां देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल केवल फिल्मों के प्रदर्शन का जरिया भर नहीं है, बल्कि यह सिनेमाई कला, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और नए दौर के विचारों का एक भव्य संगम बनने जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाला यह सांस्कृतिक महाकुंभ देहरादून के प्रसिद्ध सिल्वर सिटी मल्टीप्लेक्स और प्रतिष्ठित तुलाज यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित किया जाएगा।

इस आयोजन के केंद्र में सिनेमा की वो ताकत है जो विभिन्न विचारों, धाराओं और समाज के अलग-अलग वर्गों को एक मजबूत सूत्र में पिरोने का काम करती है। एक लंबे अरसे से देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ने न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे उत्तर भारत में एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान स्थापित की है। इस वर्ष का संस्करण पिछले सभी वर्षों की तुलना में अधिक व्यापक, समावेशी और विविधता से भरा हुआ दिखाई दे रहा है। इसमें राष्ट्रीय स्तर के नामचीन कलाकारों की मौजूदगी के साथ-साथ सिनेमा के जरिए सामाजिक सरोकारों को साधने का एक अनूठा और सराहनीय प्रयास भी देखने को मिलेगा।

देश और टीवी जगत के दिग्गज सितारों की मौजूदगी से गुलजार होगी दून घाटी
किसी भी फिल्म फेस्टिवल की आत्मा उसमें शिरकत करने वाले कलाकार, निर्देशक और तकनीक से जुड़े लोग होते हैं। इस बार देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भारतीय सिनेमा, धारावाहिकों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के कई दिग्गज और लोकप्रिय चेहरे अपनी उपस्थिति दर्ज कराने आ रहे हैं। इस तीन दिवसीय उत्सव में बॉलीवुड और टेलीविजन जगत के जाने-माने अभिनेता मुकेश ऋषि, अपनी संजीदा अदाकारी के लिए मशहूर श्वेता त्रिपाठी, पुराने दौर के दिग्गज अभिनेता दीपक पराशर, टीवी की लोकप्रिय जोड़ी हितेन तेजवानी और गौरी प्रधान तेजवानी, महाभारत में अपनी छाप छोड़ने वाले अर्जुन फिरोज़ खान, चरित्र अभिनेता राजन मोदी, राजेश तैलंग और कई लोकप्रिय धारावाहिकों व फिल्मों के निर्देशक राजीव एस. रुइया शामिल हो रहे हैं।

इसके साथ ही विजय सेठ, उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक प्रीतम भरतवान, कॉमेडी और चरित्र अभिनय में अपनी अलग पहचान बनाने वाले हेमंत पांडे, बालाजी नेगी, एम. एस. के. बडोनी, सुमन गौर, मीना राणा, अमित वी कपूर और मोहित घिल्डियाल जैसे कई स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के कलाकार इस मंच की शोभा बढ़ाएंगे। इन कलाकारों की उपस्थिति से न केवल दून घाटी में सिनेमाई माहौल बनेगा, बल्कि स्थानीय सिनेमा प्रेमियों, कला के छात्रों और महत्वाकांक्षी युवाओं को सीधे अपने पसंदीदा सितारों से रूबरू होने, उनसे सवाल पूछने और उनके करियर के अनुभवों से सीखने का एक दुर्लभ अवसर हासिल होगा।

सिनेमा का सामाजिक सरोकार: नेत्रहीन छात्रों के लिए विशेष स्क्रीनिंग
देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की सबसे बड़ी और दिल को छू लेने वाली खासियत इसका सामाजिक सरोकार है। मनोरंजन के इस वैश्विक मंच को संवेदनशील बनाते हुए आयोजकों ने 2 अक्टूबर को फेस्टिवल के पहले दिन के शुरुआती शो को पूरी तरह से नेत्रहीन छात्रों को समर्पित करने का निर्णय लिया है। सक्षम डिसेबिलिटी संस्था के विशेष सहयोग से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के तहत नेत्रहीन छात्रों के लिए चर्चित फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3‘ की एक विशेष स्क्रीनिंग रखी गई है।

अक्सर यह माना जाता है कि सिनेमा सिर्फ देखने का माध्यम है, लेकिन आयोजकों का यह कदम साबित करता है कि सिनेमा महसूस करने, सुनने और संवेदनाओं को जगाने की कला है। नेत्रहीन बच्चों के लिए इस प्रकार की विशेष स्क्रीनिंग का प्राथमिक उद्देश्य उन्हें समाज की मुख्यधारा की गतिविधियों से जोड़ना, सिनेमाई अनुभूति प्रदान करना और उनमें यह विश्वास जगाना है कि कला और मनोरंजन के दरवाजे हर किसी के लिए समान रूप से खुले हैं। यह पहल इस फेस्टिवल को अन्य व्यावसायिक आयोजनों से अलग एक खास और मानवीय पहचान दिलाती है।

तुलाज यूनिवर्सिटी में युवाओं और कलाकारों के बीच ज्ञानवर्धक संवाद
3 अक्टूबर का दिन युवाओं और सिनेमा के शैक्षणिक पहलू के दृष्टिकोण से बेहद खास रहने वाला है। इस दिन फिल्म फेस्टिवल की मुख्य गतिविधियों का केंद्र तुलाज यूनिवर्सिटी का हरा-भरा परिसर होगा। यहाँ विभिन्न फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की जाएगी, जिसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों से आए सिने कलाकार और निर्देशक छात्रों से सीधे संवाद करेंगे।
आज के समय में जब मीडिया, फिल्म मेकिंग, एक्टिंग, मास कम्यूनिकेशन और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में युवाओं की रुचि तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में यह संवाद सत्र छात्रों के लिए किसी गाइड से कम साबित नहीं होगा।

कलाकार अपनी शुरुआती चुनौतियों, अभिनय की गहराइयों, कैमरे के पीछे के संघर्ष, स्क्रिप्ट चयन की कला और फिल्म उद्योग की बारीकियों पर खुलकर अपनी बात रखेंगे। विद्यार्थी केवल फिल्मों के प्रदर्शन को ही नहीं देखेंगे, बल्कि वे यह भी जान पाएंगे कि एक विचार किस तरह पर्दे पर उतरकर लाखों लोगों के दिलों को छू लेता है। यह इंटरेक्टिव सेशन भविष्य के फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को सही दिशा देने में मील का पत्थर साबित होगा।

सिल्वर सिटी में टॉक शो: भारतीय सिनेमा की दिशा और दशा पर मंथन
फिल्म फेस्टिवल के तीनों दिन, यानी 2, 3 और 4 अक्टूबर को देहरादून के सिल्वर सिटी मल्टीप्लेक्स में गहन बौद्धिक और व्यावहारिक टॉक शो का आयोजन किया जाएगा। इन टॉक शो का ढांचा इस प्रकार तैयार किया गया है कि इसमें दर्शक और उद्योग के विशेषज्ञ एक साथ बैठकर भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप, ओटीटी के आगमन के बाद आए बदलावों, क्षेत्रीय सिनेमा के महत्व और फिल्मों में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से चर्चा कर सकें।

वरिष्ठ कलाकार, निर्देशक और निर्माता इन सत्रों के माध्यम से न केवल अपने व्यक्तिगत फिल्मी सफर के संस्मरण साझा करेंगे, बल्कि वर्तमान दौर में सिनेमा के सामने मौजूद आर्थिक और रचनात्मक चुनौतियों पर भी अपने विचार रखेंगे। दर्शकों के लिए ये टॉक शो सिनेमा को गहराई से समझने, पर्दे के पीछे के गणित को जानने और अपने पसंदीदा अभिनेताओं की सोच से परिचित होने का एक बेहतरीन जरिया बनेंगे।

उत्तराखंड टैलेंट हंट: स्थानीय कला और युवाओं को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
उत्तराखंड की माटी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही दिशा और मंच के अभाव में कई बार दूर-दराज के प्रतिभावान युवा अपनी कला को बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने से वंचित रह जाते हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए 11वें देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ‘उत्तराखंड टैलेंट हंट’ को एक प्रमुख और विशेष आकर्षण के रूप में शामिल किया गया है।

इस टैलेंट हंट के जरिए प्रदेश के कोने-कोने से आने वाले युवाओं को अपनी विविध कलाओं का प्रदर्शन करने का सीधा अवसर मिलेगा। इस प्रतियोगिता में शामिल विधाओं का दायरा काफी व्यापक रखा गया है, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित कलाएं शामिल हैं:
नृत्य: पारंपरिक पहाड़ी लोकनृत्य से लेकर आधुनिक और वेस्टर्न डांस फॉर्म्स की प्रस्तुति।
अभिनय: एकल अभिनय, नुक्कड़ नाटक, ड्रामा और डायलॉग डिलीवरी की क्षमता का परीक्षण।
गायन: उत्तराखंडी लोकगीत, शास्त्रीय संगीत और बॉलीवुड गानों पर अपनी आवाज का जादू बिखेरने का मौका।
काव्य पाठ: स्वरचित कविताओं और शायरी के माध्यम से विचारों को अभिव्यक्त करने का मंच।
मिमिक्री: विभिन्न हस्तियों की आवाजों और हरकतों की सटीक नकल उतारने की अनूठी कला।

टैलेंट हंट में भाग लेने वाले प्रतिभागियों का मूल्यांकन मुंबई और स्थानीय फिल्म उद्योग के स्थापित विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को न केवल आकर्षक पुरस्कार और आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे, बल्कि उन्हें भविष्य में बनने वाली फिल्मों, म्यूजिक एल्बम और थिएटर प्रोजेक्ट्स में काम करने के सुनहरे अवसर भी मिल सकते हैं। यह टैलेंट हंट उत्तराखंड के युवा कलाकारों के लिए बॉलीवुड का प्रवेश द्वार बन सकता है।

क्षेत्रीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता फिल्म फेस्टिवल
किसी भी राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म फेस्टिवल का आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके कई व्यापक सामाजिक और आर्थिक लाभ भी होते हैं। उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन इस प्रकार के आयोजनों से राज्य को एक प्रमुख ‘फिल्म शूटिंग हब’ और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में भारी मदद मिलती है।

जब देश भर के नामचीन निर्देशक, निर्माता और कलाकार देहरादून आते हैं, तो वे यहाँ की लोकेशंस, स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर और यहाँ के सांस्कृतिक माहौल से सीधे रूबरू होते हैं। इससे राज्य में फिल्म पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव से स्थानीय होटल उद्योग, ट्रांसपोर्ट, खान-पान, इवेंट मैनेजमेंट और हस्तशिल्प से जुड़े कारोबारियों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचता है। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, भाषा और परंपराओं को भी देश के कोने-कोने से आए मेहमानों के सामने गर्व से प्रदर्शित करने का मौका मिलता है।

आयोजक राजेश शर्मा का विजन: संस्कृति और सिनेमा का समावेशी भविष्य
देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के मुख्य आयोजक राजेश शर्मा ने इस आयोजन के उद्देश्यों और इसकी रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका लक्ष्य केवल हर साल कुछ फिल्में दिखाकर औपचारिकता पूरी करना नहीं है। वे इस फेस्टिवल को एक ऐसा जीवंत और सतत चलने वाला मंच बनाना चाहते हैं जहाँ कला, तकनीक, स्थानीय प्रतिभाएं और समाज के विभिन्न वर्ग एक साथ आ सकें।

आयोजक राजेश शर्मा के अनुसार, इस वर्ष चर्चित कलाकारों की बड़ी टीम को आमंत्रित करने, नेत्रहीन बच्चों के लिए विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करने और स्थानीय युवाओं के लिए टैलेंट हंट रखने का मुख्य उद्देश्य इस उत्सव को अधिक से अधिक समावेशी बनाना है। वे चाहते हैं कि उत्तराखंड का हर युवा जो सिनेमा या कला के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहता है, उसे यह महसूस हो कि उसका सपना दूर नहीं है। उनका यह निरंतर प्रयास देहरादून को भारत के प्रमुख सांस्कृतिक और फिल्म आयोजनों के नक्शे पर एक मजबूत और सम्मानजनक स्थान दिलाने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।

सिनेमा प्रेमियों के लिए एक यादगार और प्रेरणादायक अनुभव
11वां देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल महज एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सपनों, विचारों और रचनात्मकता का एक भव्य उत्सव है। 2 से 4 अक्टूबर तक चलने वाले ये तीन दिन देहरादून शहर के माहौल को कलात्मक ऊर्जा और उत्साह से भर देंगे। चाहे वह फिल्में देखने के शौकीन हों, मीडिया के छात्र हों, अभिनय की दुनिया में कदम रखने की चाह रखने वाले नए कलाकार हों या फिर समाज के प्रति संवेदनशील नागरिक – यह फेस्टिवल हर किसी के लिए कुछ न कुछ खास और प्रेरणादायक लेकर आ रहा है।

तीन दिनों तक चलने वाला यह मेला यह साबित करेगा कि सिनेमा में सीमाओं को तोड़ने, समाज को जोड़ने और नई पीढ़ियों को प्रेरित करने की असीम क्षमता होती है। दून घाटी में सजने वाला यह मंच निसंदेह उत्तराखंड के सांस्कृतिक इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ने के लिए तैयार है।

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