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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के युवाओं से बात, सारनाथ को यूनेस्को का दर्जा मिलने पर जताई खुशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 4:30 बजे इंटरनेट के जरिए ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026’ में भाग लेने वाले युवाओं से सीधी बातचीत करेंगे। यह बातचीत भारत के दूर-दराज और सीमा के पास बसे गांवों को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी मानी जा रही है। इसके साथ ही देश के लिए एक और बड़ी खुशखबरी आई है। भारत के ऐतिहासिक स्थल सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में जगह मिल गई है, जिस पर देश के प्रधानसेवक ने बहुत खुशी जताई है। इसी खास मौके पर उन्होंने आषाढ़ी एकादशी के पावन त्योहार पर देश के लोगों को ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं भी दी हैं।
यह तीनों बातें भारत की सुरक्षा, पुरानी पहचान और आस्था से जुड़ी हुई हैं।

इस अभियान की मुख्य जानकारी
विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2026 का आयोजन 4 जून से 30 जून तक दो अलग-अलग हिस्सों में किया गया था। इस दौरान देश के उत्तरी सीमा के पास बसे 74 गांवों को चुना गया। यह कार्यक्रम लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के दूर-दराज के गांवों में बहुत अच्छे से चलाया गया।

समय 4 जून से 30 जून 2026
राज्य और क्षेत्र लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड
कुल गांव 74 सीमावर्ती गांव
चुने गए युवा 400 से ज्यादा युवा (पूरे देश से)
प्रतियोगिता में हिस्सा 3 लाख से ज्यादा युवाओं ने भाग लिया

युवाओं को चुनने का आसान तरीका
इस खास कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए देश भर के युवाओं में बहुत उत्साह देखा गया। इसके लिए एक ऑनलाइन सवाल-जवाब की प्रतियोगिता रखी गई थी, जिसमें 3 लाख से ज्यादा युवाओं ने अपना नाम दर्ज कराया था।
कड़े मुकाबले के बाद हर राज्य से कुल 400 से ज्यादा होनहार युवाओं को चुना गया। इन युवाओं ने सीमा के पास बसे गांवों का दौरा किया, वहां के लोगों के रहन-सहन, उनकी परेशानियों और स्थानीय संस्कृति को बहुत पास से समझा।

आज की बातचीत का मुख्य मकसद
आज शाम होने वाली इस डिजिटल बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन युवाओं के अनुभवों को सुनेंगे और सीमांत गांवों के विकास के लिए उनके सुझावों पर बात करेंगे। इस बातचीत का मुख्य मकसद है:
सीमा के पास बसे गांवों से लोगों का पलायन रोकना और वहां काम-काज के नए रास्ते खोलना।
अच्छी सड़कें, इंटरनेट, बिजली और इलाज की सुविधाएं पहुंचाना।
देश के युवाओं को सीमा के गांवों की संस्कृति से जोड़ना।
इन गांवों में पर्यटन और स्थानीय सामानों की बिक्री को बढ़ावा देना।

सारनाथ बना विश्व धरोहर: देश के लिए गर्व की बात
देश के लिए एक और बहुत बड़ी खुशी की बात तब आई जब उत्तर प्रदेश के पवित्र स्थल सारनाथ को दुनिया की बड़ी संस्था यूनेस्को ने अपनी विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया।
दुनिया के मंच पर मिली बड़ी पहचान
दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में हुई एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक के दौरान यह फैसला लिया गया। इस फैसले के साथ ही सारनाथ भारत की 45वीं विश्व धरोहर बन गया है। वहीं उत्तर प्रदेश के लिए यह चौथा ऐसा स्थान है जिसे यह बड़ा सम्मान मिला है।
प्रधानमंत्री का संदेश:
“हर भारतीय के लिए यह बहुत गर्व की बात है! मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि उत्तर प्रदेश के सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। सारनाथ का भगवान बुद्ध से बहुत गहरा रिश्ता है। उनके ज्ञान, दया और शांति का संदेश आज भी पूरी दुनिया को सही रास्ता दिखाता है।”

28 सालों का लंबा इंतजार हुआ खत्म
सारनाथ को यह सम्मान मिलना एक-दो दिन की बात नहीं है। इसे पहली बार 3 जुलाई 1998 को संभावित सूची में रखा गया था। लगभग 28 सालों के लंबे इंतजार और सरकार की लगातार कोशिशों के बाद आखिरकार इस पावन धरती को यह बड़ा सम्मान मिल ही गया।

सारनाथ क्यों है इतना खास?
वाराणसी से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर स्थित सारनाथ बौद्ध धर्म को मानने वालों के लिए दुनिया के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। इसकी मुख्य वजहें नीचे दी गई हैं:
पहला उपदेश: ज्ञान मिलने के बाद भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश इसी जगह पर अपने पांच शिष्यों को दिया था।
बौद्ध संघ की शुरुआत: यहीं से बौद्ध धर्म के संघ की शुरुआत हुई थी।
ऐतिहासिक स्तूप: यहां बने विशाल धमेख स्तूप और चौखंडी स्तूप भारत की पुरानी कारीगरी के बहुत सुंदर नमूने हैं।
हमारा राष्ट्रीय चिन्ह: भारत का राष्ट्रीय चिन्ह ‘अशोक स्तंभ’ सारनाथ से ही लिया गया है, जो शांति का संदेश देता है।
इस स्थान को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने से उत्तर प्रदेश में बाहर से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए मौके मिलेंगे।

आषाढ़ी एकादशी पर दी शुभकामनाएं
देश के विकास और पुरानी धरोहरों के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारी धार्मिक परंपराओं का सम्मान करते हुए आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई दी।

देश में सुख और शांति की प्रार्थना
आषाढ़ी एकादशी का दिन भारतीय संस्कृति में बहुत आस्था का दिन माना जाता है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यह पवित्र दिन भक्ति, सेवा और दया की भावना को याद करने का समय है।
उन्होंने भगवान विट्ठल से प्रार्थना करते हुए कहा कि:
हमारे देश में हमेशा शांति, आपसी प्यार और खुशहाली बनी रहे।
समाज के हर गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने का हमारा संकल्प और मजबूत हो।
लोगों के मन में एक-दूसरे की सेवा करने की भावना बढ़े।

पंढरपुर यात्रा की पुरानी परंपरा
महाराष्ट्र और आसपास के इलाकों में आषाढ़ी एकादशी का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस मौके पर लाखों भक्त पैदल चलकर पंढरपुर के प्रसिद्ध मंदिर में भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं। यह यात्रा केवल पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि यह आपस में बिना किसी भेदभाव के रहने और एक-दूसरे की मदद करने की सुंदर सीख देती है।

विकास भी और विरासत भी: भारत का नया रास्ता
आज का यह दिन भारत के उस सोच को साफ दिखाता है, जिसके तहत देश को आधुनिक भी बनाया जा रहा है और पुरानी पहचान को भी संभालकर रखा जा रहा है।
एक तरफ देश अपने सीमावर्ती गांवों को मजबूत बनाने के लिए काम कर रहा है, तो दूसरी तरफ अपनी हजारों साल पुरानी संस्कृति को दुनिया के सामने शान से रख रहा है।

इन सभी बातों का देश पर क्या असर होगा?
सुरक्षित सीमाएं: सीमा के गांवों में सुविधाएं बढ़ने से वहां के लोग वहीं रुकेंगे, जिससे सीमाएं और ज्यादा सुरक्षित होंगी।
पर्यटन को बढ़ावा: सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।
एकता की भावना: आषाढ़ी एकादशी जैसे त्योहार लोगों को आपस में जोड़ते हैं और समाज में अच्छाई फैलाते हैं।

आज 26 जुलाई 2026 का यह दिन भारत की प्रगति का एक बड़ा उदाहरण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश जहां एक तरफ अपनी सुरक्षा और गांवों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपनी प्राचीन संस्कृति का मान भी पूरी दुनिया में बढ़ा रहा है।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत युवाओं से बातचीत से गांवों में नई उम्मीद जगेगी, जबकि सारनाथ को मिली पहचान से पूरी दुनिया में शांति का संदेश पहुंचेगा। विकास और संस्कृति का यह मेल भारत को एक मजबूत देश बनाने में मदद कर रहा है।

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