काठगोदाम देहरादून एक्सप्रेस से यात्रा करने वाले हजारों लोगों के लिए अब सुरक्षा एक बहुत बड़ा सवाल बन चुकी है। उत्तराखंड के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली यह महत्वपूर्ण ट्रेन इन दिनों चोरों और अराजक तत्वों का आसान निशाना बनती दिख रही है। रात के सफर में आराम की उम्मीद लेकर चलने वाले रेल यात्री अब इस डर में जी रहे हैं कि कब उनका कीमती सामान गायब हो जाए। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली शासकीय रेलवे पुलिस यानी जीआरपी इस स्थिति पर काबू पाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। रेल प्रशासन के बड़े-बड़े दावों के बावजूद धरातल पर सुरक्षा व्यवस्था इतनी लचर है कि चोर बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस केवल कागजी खानापूर्ति में उलझी हुई है।
दो दिनों में लगातार दो चोरियां: सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा झटका
इस ट्रेन के वातानुकूलित यानी एसी डिब्बों में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं ने रेलवे के सुरक्षा तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। अगर पिछले दो दिनों के घटनाक्रम पर नजर डालें, तो स्थिति बेहद डरावनी नजर आती है:
25 अगस्त की घटना: काठगोदाम देहरादून एक्सप्रेस के एसी कोच में एक यात्री का कीमती सामान चोरी हो गया। जिस डिब्बे को सबसे सुरक्षित माना जाता है और जिसके लिए यात्री भारी-भरकम किराया चुकाते हैं, वहां इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
26 अगस्त की घटना: अभी पुलिस 25 अगस्त की वारदात की जांच की बात ही कर रही थी कि अगले ही दिन 26 अगस्त को भी दूसरे एसी कोच में भी चोरी की एक और बड़ी घटना सामने आ गई। लगातार दूसरे दिन हुई इस वारदात ने डिब्बों में सफर कर रहे यात्रियों के बीच खौफ का माहौल बना दिया।
एक के बाद एक हो रही इन घटनाओं से यह साफ हो गया है कि चोरों के मन में न तो पुलिस का कोई खौफ बचा है और न ही रेलवे सुरक्षा बल का। वे बिना किसी डर के रात के समय डिब्बों में दाखिल होते हैं और पलक झपकते ही यात्रियों का सामान लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं।
मीडिया से हुई बातचीत में कोच अटेंडेंट का बयान: अंदरूनी अव्यवस्था और यात्रियों के लिए चेतावनी
ट्रेन के सेकंड एसी कोच (ए1) में तैनात कोच अटेंडेंट अतुल ने यात्रियों की सुरक्षा और डिब्बों के अंदर की स्थिति को लेकर बेहद महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली जानकारी साझा की है।
“मेरी यात्रियों से यही गुजारिश रहती है कि वे रात के समय डिब्बे में पूरी तरह अंधेरा न करें और कम से कम हल्की रोशनी यानी नाइटर लाइट जरूर जलाकर रखें। जब डिब्बे में पूरी तरह अंधेरा हो जाता है, तो बाहरी असामाजिक तत्वों और चोरों को सामान उठाने का सबसे आसान मौका मिल जाता है। जब भी कोई चोरी होती है, तो सबसे पहले उंगली हम कर्मचारियों पर उठाई जाती है और हमें ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। इसलिए रोशनी चालू रखना यात्रियों और कर्मचारी दोनों की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।”
— अतुल (कोच अटेंडेंट, ए1 डिब्बा)
कोच अटेंडेंट के इस बयान से यह बात साफ जाहिर होती है कि एसी डिब्बों में रोशनी के प्रबंधन जैसी छोटी लेकिन बेहद अहम सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी भारी भ्रम और लापरवाही का माहौल है। जब कर्मचारी खुद को असुरक्षित और लाचार महसूस कर रहे हों, तो आम यात्रियों की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
जीआरपी की कार्यशैली पर उठते सवाल
रेलवे में यात्रा करने वाला हर नागरिक जीआरपी और आरपीएफ की मौजूदगी के भरोसे ही चैन की नींद सोता है। लेकिन काठगोदाम देहरादून एक्सप्रेस में जिस तरह से लगातार वारदातें हो रही हैं, उससे जीआरपी की गश्त और निगरानी प्रणाली पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है।
रात के समय गश्त का न होना: नियमों के मुताबिक, रात के समय लंबी दूरी की ट्रेनों में जीआरपी और सुरक्षा कर्मियों को लगातार गश्त करनी चाहिए। लेकिन यात्रियों की शिकायत है कि रात के समय डिब्बों में सुरक्षाकर्मी दूर-दूर तक नजर नहीं आते।
अनधिकृत लोगों का प्रवेश: एसी डिब्बों में बिना वैध टिकट या बिना किसी कारण के बाहरी लोगों का प्रवेश कैसे हो रहा है? यह एक बड़ा सवाल है। अगर टीटीई और सुरक्षाकर्मी मुस्तैद हों, तो कोई भी अज्ञात व्यक्ति एसी डिब्बे में घुस ही नहीं सकता।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता: घटना होने के बाद एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल करना और जांच के नाम पर केवल समय बिताना जीआरपी की पहचान बनता जा रहा है। अब तक किसी भी ठोस गिरोह का पर्दाफाश न हो पाना पुलिस की घोर नाकामी को दर्शाता है।
एसी डिब्बों की सुरक्षा का मिथक टूटा
आम तौर पर रेल यात्रियों का मानना होता है कि सामान्य डिब्बों की तुलना में एसी डिब्बे अधिक सुरक्षित होते हैं क्योंकि इनमें भीड़ कम होती है और दरवाजे बंद रहते हैं। लेकिन काठगोदाम देहरादून एक्सप्रेस की घटनाओं ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है।
महंगे किराये के बाद भी असुरक्षा: यात्री प्रीमियम किराया देकर एसी कोच में टिकट बुक कराते हैं ताकि उनका सफर आरामदायक और सुरक्षित रहे। लेकिन जब एसी कोच में ही सामान सुरक्षित न रहे, तो फिर प्रीमियम सेवा देने के रेलवे के दावों का कोई मतलब नहीं रह जाता।
दरवाजों और गलियारों की ढीली निगरानी: ट्रेन जब स्टेशनों पर रुकती है या आउटर पर धीमी होती है, तो उस समय असामाजिक तत्व आसानी से डिब्बों के अंदर चढ़ जाते हैं। दरवाजों पर किसी सुरक्षाकर्मी की तैनाती न होना चोरों के लिए सबसे बड़ा मददगार साबित हो रहा है।
यात्रियों में बढ़ता अविश्वास और डर का माहौल
काठगोदाम से देहरादून के बीच चलने वाली इस ट्रेन में रोजाना हजारों की संख्या में नौकरीपेशा लोग, व्यापारी, मरीज, छात्र और परिवार सफर करते हैं। उत्तराखंड के दो प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ने वाली यह एक बेहद महत्वपूर्ण जीवनरेखा है।
रात भर जागने को मजबूर यात्री: लगातार हो रही चोरियों की खबर फैलने के बाद अब यात्री रात भर सो नहीं पा रहे हैं। अपने बैग, जेवर, मोबाइल और पैसों की सुरक्षा को लेकर हर कोई तनाव में रहता है।
महिलाओं और बुजुर्गों की चिंता: अकेले सफर करने वाली महिला यात्रियों और बुजुर्गों के लिए स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक हो गई है। अगर रात के समय कोई अप्रिय घटना घट जाए, तो डिब्बे में तुरंत मदद पहुंचाने वाला कोई नहीं होता।
रेलवे प्रशासन को तुरंत उठाने होंगे ये कड़े कदम
यदि रेल प्रशासन और जीआरपी वास्तव में यात्रियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर हैं, तो उन्हें तुरंत निम्नलिखित सुधारात्मक कदम उठाने होंगे:
कड़ी और नियमित गश्त: हर एसी और गैर-एसी डिब्बे में रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और नियमित पैदल गश्त अनिवार्य की जाए।
स्टेशनों और आउटर पर चौकसी: ट्रेन जब बड़े स्टेशनों या सिग्नल न मिलने के कारण आउटर पर रुकती है, तब जीआरपी के जवानों को ट्रेन के बाहर और दरवाजों पर तैनात रहना चाहिए ताकि कोई बाहरी व्यक्ति अंदर न घुस सके।
सीसीटीवी कैमरों का दायरा बढ़े: ट्रेन के गलियारों और कोच के प्रवेश द्वारों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जा सके।
कर्मचारियों की जवाबदेही: कोच अटेंडेंट, टीटीई और ड्यूटी पर तैनात जीआरपी जवानों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। यदि किसी डिब्बे में चोरी होती है, तो उस क्षेत्र के जिम्मेदारी अधिकारी से जवाब तलब किया जाए।
यात्रियों के लिए आवश्यक सुरक्षा सुझाव
जब तक सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक यात्रियों को भी अपनी सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए:
कीमती सामान को लॉक रखें: अपने बैगों को चेन या लॉक की मदद से सीट के निचले हिस्से से बांधकर रखें।
लाइट पूरी तरह बंद न करें: डिब्बे की नाइटर लाइट या डिम लाइट चालू रखें ताकि पूरी तरह अंधेरा न हो।
अनजान व्यक्तियों पर भरोसा न करें: सफर के दौरान किसी भी अनजान व्यक्ति से बहुत अधिक घनिष्ठता न बढ़ाएं और न ही अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करें।
संदिग्ध हलचल की सूचना तुरंत दें: यदि डिब्बे में कोई भी संदिग्ध व्यक्ति दिखे, तो तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें या टीटीई को सूचित करें।
क्या जागेगा रेल प्रशासन?
काठगोदाम देहरादून एक्सप्रेस में लगातार दो दिनों में हुई चोरियों ने यह साबित कर दिया है कि वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था में गहरे सुराख हैं। यात्रियों के भरोसे और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जीआरपी और रेलवे प्रशासन को अपनी नींद से जागना होगा और केवल जांच का आश्वासन देने के बजाय अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। जब तक रेलवे अपनी ढीली कार्यशैली में सुधार नहीं लाता, तब तक यात्रियों का भरोसा वापस बहाल होना बेहद मुश्किल है।


