मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी देहरादून स्थित मुख्यसेवक सदन में आयोजित एक विशेष राज्य स्तरीय सम्मान समारोह के दौरान उत्तराखंड की प्रतिभावान महिलाओं और ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया। यह गरिमापूर्ण कार्यक्रम उत्तराखंड की महान वीरांगना तीलू रौतेली जी की जयंती के पावन अवसर पर आयोजित किया गया था। इस दौरान राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आईं उन महिलाओं को सम्मानित किया गया जिन्होंने समाज सेवा, शिक्षा, खेल, कला और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में अपनी कड़ी मेहनत से एक खास पहचान बनाई है।
इस राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री ने न केवल महिलाओं के बेहतरीन काम की सराहना की, बल्कि उनके सम्मान को और बढ़ाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घोषणा भी की। सरकार ने महिलाओं के प्रोत्साहन के लिए दी जाने वाली पुरस्कार राशि में सीधी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इस फैसले से पूरे राज्य की महिलाओं और आंगनबाड़ी बहनों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
पुरस्कार राशि में की गई ऐतिहासिक बढ़ोतरी
इस विशेष कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण पुरस्कार राशि को बढ़ाए जाने की घोषणा रही। मुख्यमंत्री ने राज्य की मातृशक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि महिलाओं का योगदान केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी मजबूती मिलनी चाहिए।
इसी सोच के तहत सरकार ने दो बड़े फैसले लिए:
तीलू रौतेली पुरस्कार की राशि में बढ़ोतरी: पहले इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के तहत विजेताओं को 51,000 रुपये की धनराशि दी जाती थी। सरकार ने इसे बढ़ाकर अब 75,000 रुपये कर दिया है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ती पुरस्कार की राशि में बढ़ोतरी: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलने वाले सम्मान की राशि को भी 51,000 रुपये से बढ़ाकर 61,000 रुपये करने का फैसला लिया गया है।
इस घोषणा के बाद समारोह में मौजूद सभी लोगों ने तालियों के साथ सरकार के इस कदम का स्वागत किया। यह निर्णय दर्शाता है कि राज्य सरकार ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं के योगदान को कितनी गंभीरता और सम्मान के साथ देखती है।
35 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिला राज्य स्तरीय सम्मान
समारोह के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से चुनकर आईं 35 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हमारे समाज की वह मजबूत नींव हैं जो गांव-गांव और घर-घर जाकर छोटे बच्चों के पोषण, शुरुआती शिक्षा और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल करती हैं।
मुख्यमंत्री ने इन कार्यकर्ताओं की निष्ठा की तारीफ करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी ये बहनें जिस लगन के साथ दूर-दराज के इलाकों में काम करती हैं, वह सचमुच काबिले तारीफ है। कोरोना काल हो या कोई अन्य स्वास्थ्य अभियान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका हमेशा सबसे आगे रही है। ऐसे में उन्हें सम्मानित करना पूरी व्यवस्था को मजबूती देने जैसा है।
वीरांगना तीलू रौतेली के आदर्शों की याद
उत्तराखंड के इतिहास में वीरांगना तीलू रौतेली का नाम बेहद गर्व के साथ लिया जाता है। उन्हें उत्तराखंड की ‘झांसी की रानी’ भी कहा जाता है, जिन्होंने बहुत ही कम उम्र में अपनी वीरता, साहस और बुद्धिमत्ता से अपने क्षेत्र की रक्षा की थी।
उनकी जयंती के अवसर पर आयोजित इस सम्मान समारोह का उद्देश्य राज्य की हर महिला के भीतर छिपी उस शक्ति को बाहर लाना है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि तीलू रौतेली जी का जीवन हम सभी के लिए, खासतौर पर हमारी बेटियों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है। आज की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़कर काम कर रही हैं और तीलू रौतेली जी के दिखाए रास्ते पर चलकर राज्य का नाम रोशन कर रही हैं।
कार्यक्रम में मौजूद रहे कई बड़े जनप्रतिनिधि
मुख्यसेवक सदन में आयोजित इस भव्य सम्मान समारोह में राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री, सांसद और विधायक भी शामिल हुए। सभी नेताओं ने एक स्वर में राज्य की महिलाओं के प्रयासों की सराहना की।
समारोह में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्ति:
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या: महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहीं कैबिनेट मंत्री ने कार्यक्रम में महिलाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी।
विधायक खजान दास: कार्यक्रम में मौजूद रहकर उन्होंने सम्मानित होने वाली सभी महिलाओं को बधाई दी।
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल: उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे महिला विकास कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला।
विधायक उमेश शर्मा काऊ: उन्होंने स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
इन सभी जनप्रतिनिधियों के अलावा शासन-प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और राज्य भर से आईं महिलाएं इस गौरवशाली पल की गवाह बनीं।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम
उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है जहाँ की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने में महिलाओं की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। खेती-किसानी से लेकर बच्चों के लालन-पालन और सामाजिक बदलाव तक, हर जगह महिलाएं धुरी की तरह काम करती हैं।
ऐसे में तीलू रौतेली पुरस्कार और आंगनबाड़ी पुरस्कार जैसी पहल महिलाओं को यह अहसास कराती हैं कि उनका काम अनदेखा नहीं जा रहा है। पुरस्कार राशि में वृद्धि करने का यह कदम केवल वित्तीय मदद नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के स्वाभिमान और उनके काम की गरिमा को बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास है। इससे राज्य की अन्य महिलाओं और युवा लड़कियों को भी अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ने और कुछ नया करने की प्रेरणा मिलेगी।
समाज के विकास के लिए मातृशक्ति का सम्मान जरूरी
देहरादून के मुख्यसेवक सदन में आयोजित यह सम्मान समारोह इस बात का प्रमाण है कि जब समाज अपनी मातृशक्ति का सम्मान करता है, तो विकास की रफ्तार अपने आप तेज हो जाती है। वीरांगना तीलू रौतेली जी की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम ने राज्य की उन गुमनाम नायिकाओं को एक बड़ा मंच दिया है जो दिन-रात समाज की सेवा में लगी रहती हैं।
सम्मान राशि में की गई बढ़ोतरी से यह साफ संदेश जाता है कि सरकार महिलाओं के कल्याण और उनकी प्रगति को लेकर पूरी तरह गंभीर है। 35 आंगनबाड़ी बहनों और राज्य की अन्य उत्कृष्ट महिलाओं को मिला यह सम्मान पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। आने वाले समय में इस तरह के प्रोत्साहन से राज्य की बेटियां और महिलाएं हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगी।


