अजय भट्ट ने संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में उत्तराखंड राज्य के शैक्षणिक ढांचे को लेकर एक बड़ा मुद्दा उठाया है। उधमसिंह नगर से सांसद अजय भट्ट ने केंद्र सरकार से यह साफ करने को कहा कि राज्य में पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पिछले तीन सालों में कितना पैसा दिया गया है और आने वाले समय के लिए क्या तैयारी है। सांसद अजय भट्ट के इस सवाल पर केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने विस्तार से जानकारी साझा की है।
केंद्र सरकार की तरफ से शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सांसद अजय भट्ट के सवाल का औपचारिक जवाब दिया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कई केंद्रीय योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें मुख्य रूप से समग्र शिक्षा अभियान, पीएम श्री योजना और उल्लास कार्यक्रम शामिल हैं। इन योजनाओं के ज़रिए राज्य के सरकारी स्कूलों का ढांचा बदला जा रहा है।
अजय भट्ट के सवाल पर केंद्र सरकार ने पेश किए तीन सालों के आंकड़े
सांसद अजय भट्ट द्वारा पूछे गए अतारांकिक सवाल के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों यानी 2023-24 से लेकर 2025-26 तक का पूरा हिसाब-किताब संसद के सामने रखा।
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:
समग्र शिक्षा योजना: उत्तराखंड को सबसे ज़्यादा वित्तीय मदद इसी योजना के तहत मिली है। पिछले तीन सालों में इस योजना पर करीब 2,042 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है।
पीएम श्री योजना: इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत राज्य के स्कूलों को आधुनिक बनाने के लिए लगभग 155 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
उल्लास योजना: बुनियादी साक्षरता और डिजिटल जानकारी को बढ़ावा देने के लिए राज्य में लगभग 4 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार उत्तराखंड में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भारी-भरकम धनराशि उपलब्ध करा रही है।
पीएम श्री योजना से बदल रही है उत्तराखंड के स्कूलों की तस्वीर
सांसद अजय भट्ट के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएम श्री योजना राज्य के सरकारी स्कूलों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। इस योजना के तहत उत्तराखंड के 241 स्कूलों को चुना गया है।
इन चुने गए स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सभी नए नियमों और आधुनिक तरीकों को लागू किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों के बच्चों को भी शहरों जैसी आधुनिक शिक्षा मिल सके।
स्कूलों में कौन-कौन सी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं
संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा दिए गए बजट का इस्तेमाल स्कूलों की कमियों को दूर करने और नई सुविधाएं बनाने में किया जा रहा है।
मुख्य रूप से निम्नलिखित सुविधाओं पर काम किया जा रहा है:
स्मार्ट क्लासरूम और कंप्यूटर लैब: बच्चों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब स्थापित की जा रही हैं।
नई प्रयोगशालाएं और लाइब्रेरी: विज्ञान के प्रयोगों के लिए नई लैब और पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए लाइब्रेरी बनाई जा रही हैं।
अतिरिक्त कमरे और स्वच्छता सुविधा: छात्र संख्या के हिसाब से नए क्लासरूम, पीने के साफ पानी की व्यवस्था और अलग-अलग शौचालय बनाए जा रहे हैं।
मुफ़्त अध्ययन सामग्री: हर ज़रूरतमंद बच्चे को मुफ़्त यूनिफॉर्म और किताबें दी जा रही हैं।
समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों पर ध्यान
उत्तराखंड में शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ समानता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। मंत्रालय ने अपने उत्तर में बताया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ बराबरी का अवसर देने के लिए समावेशी शिक्षा योजना पर काम हो रहा है।
इसके तहत दिव्यांग और विशेष ध्यान चाहने वाले बच्चों के लिए स्कूलों में विशेष रैंप, सुलभ शौचालय और उनके अनुकूल पढ़ाई की सामग्री तैयार की जा रही है, ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने की संयुक्त कोशिश
सांसद अजय भट्ट के उठाए गए इस मुद्दे से यह भी स्पष्ट हुआ है कि केंद्र और उत्तराखंड राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत गुणवत्तापूर्ण, समान और सभी को साथ लेकर चलने वाली शिक्षा व्यवस्था बनाना दोनों सरकारों का मुख्य लक्ष्य है।आने वाले समय में इन योजनाओं के पूरा होने से राज्य के दूर-दराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आसानी से मिल सकेगी।


