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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने युवाओं से साधा सीधा संवाद, परीक्षा में अंक से ज्यादा विषय की समझ और एआई के सही उपयोग पर दिया जोर

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों से सीधे जुड़ने की अपनी विशेष पहल के तहत सोमवार को आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों की सुविधा और संवाद को सुलभ बनाने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ नाम से एक विशेष डिजिटल पोर्टल का विधिवत शुभारंभ किया। इसके साथ ही प्रदेश भर के विद्यालयी छात्र-छात्राओं के बीच ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड: एक विकसित राज्य हेतु मेरा दृष्टिकोण’ विषय पर एक राज्यस्तरीय निबंध प्रतियोगिता का भी औपचारिक आगाज कर दिया गया है। इस पूरे आयोजन के दौरान प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र और शिक्षा जगत की नजरें मुख्यमंत्री के इस अनूठे संवाद कार्यक्रम पर टिकी रहीं।

साधारण पहनावे में पहुंचे मुख्यमंत्री, सादगी और आत्मीयता से जीता विद्यार्थियों का दिल
इस भव्य आयोजन के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री का अंदाज पूरी तरह से बदला हुआ और बेहद आत्मीय नजर आया। वे पारंपरिक औपचारिक पोशाक के स्थान पर पैंट और शर्ट पहनकर बेहद सादे रूप में विद्यार्थियों के बीच पहुंचे। बच्चों के साथ पूरी तरह से घुल-मिलकर उन्होंने न केवल उनकी बातें सुनीं, बल्कि विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए हर एक कठिन से कठिन सवाल का भी बेहद शालीनता, सरलता और धैर्यपूर्वक जवाब दिया।

मुख्यमंत्री की इस सादगी ने वहां मौजूद सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को गहराई से प्रभावित किया। संवाद के दौरान उन्होंने घोषणा की कि इस निबंध प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उत्तराखंड के 140 मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।
इसके अलावा, राज्य सरकार इन चयनित प्रतिभावान विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की राह आसान करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे नीट, जेईई, क्लैट और सैट आदि की नि:शुल्क कोचिंग की पूरी व्यवस्था करेगी। इन सभी परीक्षाओं की तैयारी से लेकर अन्य सभी आवश्यक शुल्कों का पूरा वित्तीय भार राज्य सरकार द्वारा स्वयं वहन किया जाएगा, ताकि आर्थिक तंगी किसी भी होनहार बच्चे की प्रगति में बाधा न बन सके।

तीन लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा, दिए कई रचनात्मक सुझाव
इस राज्यस्तरीय ऑनलाइन कार्यक्रम में उत्तराखंड के सभी जिलों से अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। प्रदेश भर के कुल 2,828 सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों के 11वीं और 12वीं कक्षा के 3 लाख से भी अधिक छात्र-छात्राओं ने डिजिटल माध्यम से इस संवाद में सीधे शिरकत की।
सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के सामने राज्य के सर्वांगीण विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण और व्यवहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। छात्रों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर अपनी बात रखी:
खेल गतिविधियों का विस्तार: विद्यालयों में खेलकूद की सुविधाओं को बढ़ाने और सप्ताह में कम से कम चार दिन खेल का विशेष पीरियड निर्धारित करने का सुझाव दिया।
शैक्षणिक अवसरों में वृद्धि: स्कूली स्तर पर मिल रहे शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक अवसरों का दायरा और अधिक व्यापक करने की मांग रखी।
उच्च शिक्षा में नेतृत्व: उत्तराखंड को देश भर में उच्च शिक्षा के एक प्रमुख और अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने पर विचार साझा किए।
पर्यावरण और पर्यटन में संतुलन: राज्य में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों द्वारा दिए गए प्रत्येक सुझाव को बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने न केवल छात्रों की बातों को स्वयं अपनी डायरी में नोट किया, बल्कि मौके पर मौजूद उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी रचनात्मक सुझावों के आधार पर एक विस्तृत और ठोस कार्ययोजना तुरंत तैयार की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के इन सुझावों को राज्य सरकार की भावी नीतियों में भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

परीक्षा में अंकों से ज्यादा विषय की व्यावहारिक समझ होना जरूरी
विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा ही किसी भी राष्ट्र का वर्तमान और उसका वास्तविक भविष्य होते हैं। प्रत्येक छात्र को अपने सपनों को साकार करने की दिशा में बिना किसी भय के निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने पढ़ाई के प्रति पारंपरिक दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि परीक्षा में केवल अधिक अंक प्राप्त कर लेना ही सफलता का मापदंड नहीं है, बल्कि संबंधित विषय की गहराई से समझ होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। जीवन में सफलता पाने के लिए अच्छे संस्कार और कड़ा अनुशासन अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पढ़ाई को किसी भी प्रकार के तनाव या मानसिक बोझ की तरह न देखें, बल्कि इसे अपने सुखद और स्वर्णिम भविष्य को संवारने के एक सुनहरे मार्ग के रूप में स्वीकार करें।

जीवन में स्वयं को बनाएं एक सच्चा मार्गदर्शक और नेतृत्वकर्ता
छात्रों के भीतर आत्मविश्वास का संचार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर विद्यार्थी को अपने जीवन में एक सच्चे लीडर की तरह आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने नेतृत्व की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा कि एक सफल लीडर वही व्यक्ति होता है जो अपने चुने हुए क्षेत्र में सबसे उत्कृष्ट और श्रेष्ठ कार्य करके दिखाता है।

उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि व्यक्ति का श्रेष्ठ कार्य, समाज के प्रति उसकी मानवीय संवेदनाएं और अपने लक्ष्य के प्रति उसकी निष्ठा ही उसके नाम को इतिहास में अमर बनाती है। सच्चा जीवन और वास्तविक सफलता केवल स्वयं अकेले आगे बढ़ जाने में नहीं है, बल्कि अपने साथ-साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाने और उनका हाथ थामने में निहित है। हम सभी का यह नैतिक कर्तव्य है कि हम अपनी ईश्वरप्रदत्त प्रतिभा और ऊर्जा का उपयोग सही और सकारात्मक दिशा में करते हुए अपने समाज और प्रदेश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।

तकनीक का बुद्धिमानी से करें प्रयोग, एआई पर अत्यधिक निर्भरता से बचें
आधुनिक दौर में तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर अत्यंत व्यावहारिक और काम की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग विद्यार्थियों को केवल तभी करना चाहिए जब उसकी वास्तव में अत्यधिक आवश्यकता हो। निसंदेह यह तकनीक हमारे लिए बहुत उपयोगी और ज्ञानवर्धक सिद्ध हो सकती है, परंतु इसके सीमा से अधिक और अंधाधुंध उपयोग के कई गंभीर दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा कि किसी भी विषय या समस्या पर विचार करते समय सबसे पहले अपनी स्वयं की बुद्धि, विवेक, तर्कशक्ति और सोचने की क्षमता का प्रयोग करें। इसके साथ ही अपने शिक्षकों और गुरुजनों के लंबे अनुभव एवं मार्गदर्शन से सीखें। जब ये सभी माध्यम पूरे हो जाएं, तब आवश्यकता पड़ने पर ही किसी तकनीकी साधन का सहारा लें। तकनीक को हमेशा अपना सहायक बनाकर रखना चाहिए, उसे अपनी सोचने, समझने और सीखने की मौलिक क्षमता का विकल्प कभी नहीं बनने देना चाहिए।

पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद भी जीवन का अनिवार्य हिस्सा
विद्यार्थियों के मानसिक और शारीरिक संतुलन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ खेलकूद की गतिविधियों को भी समान रूप से बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।

उन्होंने जानकारी दी कि, उत्तराखंड में हाल ही में आयोजित हुए राष्ट्रीय खेलों के सफल और भव्य आयोजन के बाद से पूरे राज्य के युवाओं और पूरे समाज के भीतर खेलों के प्रति एक नई ऊर्जा और अभूतपूर्व जागरूकता का संचार हुआ है। आज प्रदेश के बच्चे केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित न रहकर विभिन्न खेल विधाओं में भी अपना एक उज्ज्वल करियर और भविष्य देख रहे हैं और दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा खेलों और खिलाड़ियों को धरातल पर प्रोत्साहित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना’ को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया गया है, ताकि हर प्रतिभावान बाल खिलाड़ी को अपनी प्रतिभा चमकाने का पूरा अवसर मिल सके।

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