कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण सभागार, नैनीताल में एक बहुत ही महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में उद्यान विभाग और कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही सभी सरकारी योजनाओं की समीक्षा करना तथा डिजिटल खेती पोर्टल की प्रगति को परखना था। बैठक की शुरुआत करते हुए उन्होंने अधिकारियों को साफ शब्दों में कहा कि सरकार की तरफ से चलाई जा रही योजनाओं का सीधा लाभ हर एक योग्य और वास्तविक किसान तक पहुंचना अनिवार्य है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विभागीय योजनाओं और लक्ष्यों की गहराई से जांच
समीक्षा बैठक के दौरान कृषि और उद्यान विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं पर विस्तार से बात की गई। कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने सेब उत्पादन को बढ़ावा देने वाले मिशन, पॉलीहाउस निर्माण योजना और दालों के उत्पादन को बढ़ाने से जुड़ी सभी सरकारी नीतियों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि चालू वर्ष के लिए जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनमें से कितने पूरे हो चुके हैं और कितना काम अभी बाकी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कागजों पर आंकड़े पूरे करना काफी नहीं है, बल्कि धरातल पर किसानों को इसका फायदा दिखना चाहिए। पहाड़ों में खेती और बागवानी ही लोगों की कमाई का मुख्य जरिया है, इसलिए हर एक योजना को पूरी ईमानदारी और तेजी के साथ लागू किया जाना जरूरी है।
किसान पहचान पत्र और डिजिटल तंत्र पर विशेष जोर
बैठक में डिजिटल तकनीक और डेटा को बेहतर बनाने पर भी लंबा विचार-विमर्श हुआ। कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने डिजिटल कृषि पोर्टल के तहत बनाए जा रहे किसान पहचान पत्र के काम की विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने अधिकारियों से यह समझा कि यह पहचान पत्र बनाने की प्रक्रिया क्या है, यह कैसे काम करता है और आने वाले समय में इससे किसानों को क्या-क्या प्रत्यक्ष लाभ मिलने वाले हैं।
उन्होंने अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया कि पहचान पत्र बनाने के काम में तेजी लाई जाए और इस काम को बिना किसी रुकावट के जल्द से जल्द पूरा किया जाए। डिजिटल माध्यम से योजनाओं में पारदर्शिता आती है और असली लाभार्थियों तक सहायता पहुँचाना बहुत आसान हो जाता है।
सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की पारदर्शिता पर बड़ा फैसला
बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की मौजूदा स्थिति की भी बारीकी से जांच की गई। कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता, लाभार्थियों के सत्यापन और कागजी कार्यवाही की स्थिति की समीक्षा की।
उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं और आर्थिक मदद का लाभ सिर्फ और सिर्फ उन किसानों को मिलना चाहिए जो सचमुच खेती कर रहे हैं। फर्जी या अयोग्य लोगों को इस सूची से बाहर रखने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने का आदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि हकदार व्यक्ति का अधिकार किसी भी हालत में मारा नहीं जाना चाहिए।
आवारा और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा पर गंभीर मंथन
पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में किसानों की सबसे बड़ी समस्या जंगली और आवारा जानवरों से फसलों को होने वाला नुकसान है। इस गंभीर समस्या को उठाते हुए कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने सभी उपस्थित अधिकारियों से व्यावहारिक और असरदार सुझाव मांगे।
बैठक में जानवरों से सुरक्षा के लिए जालीदार बाड़ लगाने, इस पर मिलने वाली सरकारी छूट और अन्य स्थानीय तरीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने निर्देश दिए कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखकर ऐसी ठोस कार्ययोजना बनाई जाए, जिससे किसानों की मेहनत और फसल दोनों को बचाया जा सके। फसल बचेगी तभी किसान की आर्थिक स्थिति में सुधार संभव हो सकेगा।
पहाड़ी क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक और रोजगार के अवसर
पहाड़ी क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने कहा कि बागवानी और कृषि ही यहाँ की आजीविका की रीढ़ की हड्डी हैं। इसलिए किसानों को पुरानी पद्धतियों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों से जोड़ना बहुत आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को:
उन्नत किस्म के बीज और पौधे उपलब्ध कराए जाएं।
खेती के आधुनिक तरीकों और नई तकनीकों की जानकारी दी जाए।
समय-समय पर विशेषज्ञों द्वारा सही मार्गदर्शन प्रदान किया जाए।
पॉलीहाउस निर्माण, कीवी और सेब की आधुनिक खेती को बढ़ावा दिया जाए।
इन सभी प्रयासों से न केवल किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए दरवाजे भी खुलेंगे।
डिजिटल पोर्टल पर शत-प्रतिशत डेटा सुधारने के निर्देश
डिजिटल कृषि पोर्टल की समीक्षा करते हुए कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने कहा कि सरकारी कामकाज में डिजिटल माध्यमों का उपयोग आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इससे काम में तेजी आती है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आदेश दिए कि पोर्टल पर किसानों और विभिन्न योजनाओं से संबंधित सारा विवरण समय पर और पूरी तरह से सही दर्ज किया जाए। कोई भी जानकारी अधूरी या लंबित नहीं रहनी चाहिए ताकि भविष्य में नीतियों को बनाते समय सही आंकड़ों का उपयोग किया जा सके।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और भावी रणनीति
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मंडल और जिला स्तर के कई प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे। इनमें अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग के संयुक्त निदेशक राजेंद्र तिवारी, उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक डॉक्टर नरेंद्र कुमार और कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक अभय सक्सेना शामिल थे। इनके अलावा कुमाऊँ मंडल के सभी जिलों के मुख्य कृषि अधिकारी और उद्यान अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।
बैठक के अंत में सभी अधिकारियों ने आयुक्त द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने और क्षेत्र में कृषि तथा उद्यान विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया। कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में वे खुद इन योजनाओं की प्रगति का निरीक्षण करेंगे और ढिलाई बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


