भीमताल विधानसभा क्षेत्र की समस्याएं: वर्तमान समय में पर्वतीय अंचल के आम नागरिकों के दैनिक जीवन, सुगम आवागमन और बुनियादी आजीविका को गहराई से प्रभावित कर रही हैं। उत्तराखंड के प्रशासनिक केंद्र देहरादून में हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक के दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि एवं मंत्री राम सिंह कैड़ा ने सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की।
इस शिष्टाचार व कार्य-केंद्रित भेंट के दौरान मंत्री राम सिंह कैड़ा ने भीमताल घाटी सहित पूरे पर्वतीय भूभाग में फैली जमीनी समस्याओं, विकास से जुड़ी रुकावटों और मानसूनी आपदा से पैदा हुए संकटों को अत्यंत प्रमुखता और गंभीरता के साथ मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया।
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु हाल के महीनों में आई प्राकृतिक आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हुए बुनियादी ढांचे की तुरंत बहाली और पर्वतीय क्षेत्रों में लागू विकास प्राधिकरण के कठिन एवं जटिल नियमों में ढील देना रहा। पर्वतीय जनजीवन को सुव्यवस्थित करने और स्थानीय निवासियों को प्रशासनिक जटिलताओं से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से यह बातचीत बेहद निर्णायक मानी जा रही है।
प्राकृतिक आपदा से बेपटरी हुआ जनजीवन: सड़कों की बदहाली और आवागमन का संकट
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में मानसून का मौसम हर वर्ष नई चुनौतियां लेकर आता है, लेकिन इस बार प्राकृतिक आपदा ने भीमताल विधानसभा क्षेत्र के एक विस्तृत दायरे को बुरी तरह प्रभावित किया है। मंत्री राम सिंह कैड़ा ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रमुख ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी इलाकों जैसे कि ओखलकांडा, धारी, रामगढ़ और स्वयं भीमताल के विभिन्न हिस्सों में मानसूनी बारिश, भूस्खलन और पहाड़ी धंसने की घटनाओं से अनेक मुख्य व संपर्क मार्ग गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
सड़कों के टूटने और कट जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों का आपस में तथा नजदीकी मुख्य बाजारों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इससे न केवल दैनिक यात्रियों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए भी मरीजों को अस्पताल पहुंचाना अत्यंत दुष्कर कार्य बन गया है।
पर्वतीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कृषि, फल उत्पादन (विशेषकर रामगढ़ और धारी जैसे फल-पट्टी क्षेत्रों में) तथा पर्यटन पर आधारित है। सड़कें बंद होने या जर्जर स्थिति में होने के कारण स्थानीय किसान और फल उत्पादक अपनी उपज को समय पर मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी पर्यटकों की संख्या में आई कमी के कारण आजीविका के संकट से जूझना पड़ रहा है।
विशेष मांग: मंत्री राम सिंह कैड़ा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आग्रह किया कि भीमताल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ओखलकांडा, धारी, रामगढ़ और भीमताल के आपदा से तबाह हुए सभी मोटर मार्गों के नवनिर्माण, मरम्मत और सुरक्षा दीवारों के निर्माण के लिए विशेष आपदा प्रबंधन कोष से तुरंत पर्याप्त धनराशि स्वीकृत और जारी की जाए, ताकि युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य पूरा हो सके।
पर्वतीय क्षेत्र में निर्माण कार्यों पर लगी पाबंदियां
भीमताल विधानसभा क्षेत्र में सड़कों की बदहाली के अलावा दूसरी सबसे बड़ी और जटिल समस्या विकास प्राधिकरण के कड़े और अव्यावहारिक नियम हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के लागू होने के बाद से आम नागरिकों के लिए अपना खुद का मकान बनाना, छोटी-मोटी दुकान खोलना या जीवनयापन के लिए कोई अन्य निर्माण कार्य करना बेहद मुश्किल हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि मैदानी क्षेत्रों की तर्ज पर बनाए गए निर्माण संबंधी नियम-कानून पर्वतीय इलाकों की भौगोलिक स्थिति, पारंपरिक निर्माण शैली और वित्तीय क्षमता के बिल्कुल विपरीत हैं। नक्शा पास कराने की लंबी, जटिल और खर्चीली प्रक्रिया के कारण आम गरीब और मध्यमवर्गीय ग्रामीण अपने ही स्वामित्व वाली भूमि पर एक छोटा सा घर बनाने में भी असमर्थ सिद्ध हो रहे हैं। नक्शे की स्वीकृति के अभाव में लोग बैंक ऋण प्राप्त करने से भी वंचित रह जाते हैं, जिससे स्वरोजगार की योजनाएं ठप पड़ जाती हैं।
मंत्री राम सिंह कैड़ा ने इस विषय को मुख्यमंत्री के सामने अत्यंत प्रखरता से उठाया और स्पष्ट किया कि प्राधिकरण के प्रशासनिक ढाँचे और नियमों के कारण स्थानीय जनता में भारी असंतोष व्याप्त है। आम आदमी को छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के लिए भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और अनावश्यक प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।
पहाड़ से प्राधिकरण नियमों के सरलीकरण का स्पष्ट प्रस्ताव
जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए मंत्री राम सिंह कैड़ा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष दो प्रमुख और दूरगामी समाधान प्रस्तुत किए:
प्राधिकरण के नियमों का पूर्ण सरलीकरण: यदि पर्वतीय क्षेत्रों में प्राधिकरण को बनाए रखना प्रशासनिक रूप से आवश्यक है, तो इसके नियमों को बेहद सरल, सुलभ और जनहितैषी बनाया जाए। ग्रामीण और छोटे पर्वतीय कस्बों के लिए नक्शा पास कराने की शर्तों को शिथिल किया जाए, शुल्क में कटौती की जाए और एक निश्चित समय-सीमा के भीतर एकल खिड़की व्यवस्था से स्वीकृति देने का कड़ा नियम बने।
पहाड़ी क्षेत्रों से प्राधिकरण को समाप्त करना: यदि सरलीकरण संभव न हो, तो व्यावहारिक धरातल को देखते हुए पर्वतीय जनपदों तथा ग्रामीण इलाकों को विकास प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार से पूरी तरह से बाहर कर दिया जाए। इससे स्थानीय लोगों को अपने मकान, दुकान और रोजगार से जुड़े निर्माण कार्य बिना किसी प्रशासनिक उत्पीड़न के करने की स्वतंत्रता मिल सकेगी।
मंत्री कैड़ा का तर्क था कि पर्वतीय भूगोल और वहां की आजीविका की परिस्थितियां मैदानों से पूरी तरह अलग हैं। इसलिए, नियमों को थोपने के बजाय जनता की सहूलियत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि पलायन रोकने में भी मदद मिल सके।
क्षेत्रीय विकास और अन्य जनसमस्याओं के समाधान की प्रतिबद्धता
केवल आपदा और प्राधिकरण तक ही बातचीत सीमित नहीं रही, बल्कि मंत्री राम सिंह कैड़ा ने भीमताल विधानसभा क्षेत्र की अन्य कई मूलभूत और दीर्घकालिक समस्याओं पर भी विस्तृत चर्चा की। इसमें क्षेत्र में पेयजल की निर्बाध आपूर्ति, प्राथमिक एवं माध्यमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, दुर्गम विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती और स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने जैसे विषय शामिल रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्री कैड़ा द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं को अत्यंत ध्यानपूर्वक सुना और सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास और जनसामान्य को राहत पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों के प्रस्तावों का शीघ्र आंकलन कर धनराशि आवंटित करने और प्राधिकरण के नियमों में आम जनता के हित में आवश्यक संशोधन अथवा छूट देने के संबंध में समीक्षा करने का निर्देश दिया।
जनसमस्याओं के निस्तारण से ही मजबूत होगा पर्वतीय विकास
उत्तराखंड जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में विकास का खाका तैयार करते समय स्थानीय आवश्यकताओं और व्यावहारिक धरातल को ध्यान में रखना अनिवार्य है। भीमताल विधानसभा क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और सड़कों की मरम्मत केवल बुनियादी सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह वहां की अर्थव्यवस्था और जनजीवन की जीवनरेखा से जुड़ा प्रश्न है।
उसी प्रकार, विकास प्राधिकरण का मुद्दा यह दर्शाता है कि नीतियां बनाते समय राज्य शासन को ‘एक ही चश्मे से सब कुछ देखने’ की नीति से बचना चाहिए। मैदान और पहाड़ की आवश्यकताएं भिन्न हैं। यदि कठोर नियमों के कारण एक आम ग्रामीण अपने ही पैतृक स्थान पर छोटा सा निर्माण कार्य नहीं कर पाएगा, तो राज्य में पलायन की समस्या और अधिक विकराल रूप धारण कर सकती है।
मंत्री राम सिंह कैड़ा द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष उठाए गए ये मुद्दे भीमताल के आम नागरिक की वास्तविक आवाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इन मांगों पर कितनी तेजी से प्रशासनिक कदम उठाती है और बजट आवंटन से लेकर नियम संशोधन तक की प्रक्रियाओं को धरातल पर कैसे उतारती है।


