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उत्तराखंड के चौमुखी विकास पर मंथन: सांसद अजय भट्ट और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया की सौहार्दपूर्ण बैठक

उत्तराखंड के नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट ने हाल ही में नई दिल्ली स्थित केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के आवास पर उनसे विशेष रूप से मुलाकात की। यह भेंट एक तरफ जहां दो वरिष्ठ राजनेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण संवाद का प्रतीक रही, वहीं दूसरी तरफ इसने उत्तराखंड जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य के लिए अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर संवाद का मार्ग प्रशस्त किया।

राजधानी में आयोजित इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच वातावरण अत्यंत सौहार्दपूर्ण और आत्मीय रहा। इस वार्तालाप में तात्कालिक राजनीतिक परिदृश्य के साथ-साथ जनहित के उन मुख्य विषयों को प्राथमिकता दी गई, जिनका सीधा सरोकार आम नागरिक, युवा वर्ग और असंगठित व संगठित क्षेत्र के कामगारों से है।

श्रम और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर केंद्रित संवाद
इस उच्चस्तरीय बैठक का एक प्रमुख पहलू देश और प्रदेश में श्रम और रोजगार की स्थिति में निरंतर सुधार लाना था। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की कमान संभाल रहे मनसुख मांडविया और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट के बीच श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर गहन चिंतन हुआ।
कामगारों के अधिकारों का संरक्षण: देश भर में कार्यरत श्रमिकों के जीवन स्तर को उठाने और उनके लिए सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने पर बात की गई।
उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में रोजगार: पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसरों का सृजन कैसे किया जाए, इस पर विशेष ध्यान दिया गया।
कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन: केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुँचाने की रणनीतियों पर सहमति व्यक्त की गई।

उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले श्रमिकों को सरकारी योजनाओं से पूरी तरह जोड़ने और उनकी कार्य स्थितियों में गुणात्मक सुधार लाने जैसे बिंदुओं को इस बातचीत में प्राथमिकता से शामिल किया गया।

युवा कल्याण और खेल सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण
उत्तराखंड की धरती ने हमेशा से देश को कई बेहतरीन खिलाड़ी दिए हैं। चाहे वह क्रिकेट हो, बैडमिंटन हो या फिर एथलेटिक्स, यहाँ के युवाओं ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। इसी संदर्भ में अजय भट्ट की मनसुख मांडविया से मुलाकात के दौरान युवा कल्याण और खेल अवसंरचना को मजबूत बनाने पर विशेष रूप से जोर दिया गया।

खेल और युवा मामलों के मंत्री मनसुख मांडविया के साथ चर्चा के दौरान अजय भट्ट ने राज्य के खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रतिभाओं को सही मंच: ग्रामीण और पर्वतीय अंचलों में छिपी प्रतिभाओं को सही समय पर प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराने की बात कही गई।
खेल ढांचे का विस्तार: राज्य के विभिन्न हिस्सों में नए खेल परिसरों और प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना से युवाओं को अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शित करने में सहायता मिलेगी।
युवाओं का सर्वांगीण विकास: युवाओं को सही दिशा देने, उन्हें रचनात्मक कार्यों से जोड़ने और खेल के माध्यम से उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करने से जुड़े कार्यक्रमों को गति देने पर सहमति बनी।

समसामयिक मुद्दों पर आत्मीय और सार्थक विचार-विमर्श
इस बैठक की सबसे बड़ी विशेषता इसका बहुआयामी होना था। केवल विभागीय विषयों तक सीमित न रहकर दोनों नेताओं ने वर्तमान समय के अनेक समसामयिक मुद्दों पर भी अपने दृष्टिकोण साझा किए।

सांसद अजय भट्ट ने अपने लंबे संसदीय और प्रशासनिक अनुभव के आधार पर कई व्यावहारिक सुझाव केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखे। वहीं केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने भी उत्तराखंड के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए इन सुझावों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया।

इस पूरी बैठक के दौरान जिस प्रकार का आत्मीय भाव और परस्पर सम्मान देखने को मिला, वह यह स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के बीच का समन्वय अत्यंत मजबूत है। यह समन्वय अंततः जनता के कल्याण और विकास कार्यों की गति को तेज करने में सहायक सिद्ध होता है।

पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों का संतुलित विकास: रणनीति और क्रियान्वयन
उत्तराखंड की भौगोलिक बनावट देश के अन्य राज्यों से काफी भिन्न है। एक ओर जहाँ ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जैसे मैदानी जिले औद्योगिक विकास और कृषि उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं, वहीं दूसरी ओर नैनीताल, पिथौरागढ़, चमोली और अल्मोड़ा जैसे पर्वतीय जिले कठिन चढ़ाइयों, दूरस्थ घाटियों और सीमित संसाधनों की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इस प्राकृतिक विषमता के कारण विकास की नीतियां भी ऐसी होनी चाहिए जो मैदानी और पर्वतीय – दोनों क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को समान रूप से संतुलित कर सकें।

सांसद अजय भट्ट ने इस विषय पर हमेशा मुखर होकर अपनी राय रखी है। उनका मानना है कि जब तक राज्य के अंतिम छोर पर बसे गाँव तक मूलभूत सुविधाएँ और आजीविका के साधन नहीं पहुँचते, तब तक विकास की परिभाषा अधूरी रहेगी। मनसुख मांडविया के साथ हुई चर्चा में भी पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने और स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर पैदा करने की नीति पर गहन मंथन किया गया।

पलायन की समस्या और स्थानीय आजीविका का सृजन
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है – युवाओं का बड़े पैमाने पर होने वाला पलायन। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आजीविका की तलाश में राज्य का युवा वर्ग अपने पैतृक गाँवों को छोड़कर मैदानी शहरों या अन्य राज्यों की ओर रुख कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप कई गाँव पूरी तरह से जनशून्य हो चुके हैं, जिन्हें सामान्य भाषा में ‘भूतहा गाँव’ भी कहा जाने लगा है।

इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है:
कृषि एवं बागवानी का आधुनिकीकरण: पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक खेती के स्थान पर नकदी फसलों, ऑर्गेनिक खेती, जड़ी-बूटी उत्पादन और फल-पट्टी (ऑर्चर्ड) विकास को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है। सेब, कीवी, मशरूम और स्थानीय दालों (जैसे गहत, भट्ट) की मार्केटिंग और ब्रांडिंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करके किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

इको-टूरिज्म और होमस्टे योजना: उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता विश्व प्रसिद्ध है। राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही होमस्टे योजना को केंद्र सरकार के पर्यटन और खेल मंत्रालयों के सहयोग से और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही घर में रोजगार मिलेगा और पर्यटकों को भी प्रामाणिक पहाड़ी संस्कृति एवं आतिथ्य का अनुभव प्राप्त होगा।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME): पर्वतीय इलाकों के अनुकूल कुटीर उद्योगों की स्थापना, हस्तशिल्प, हथकरघा और स्थानीय खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को रियायती दरों पर ऋण और बिजली उपलब्ध कराकर युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

श्रम कल्याण एवं असंगठित क्षेत्र के कामगारों की सुरक्षा
केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ उत्तराखंड के असंगठित कामगारों तक पहुँचाना बेहद आवश्यक है। निर्माण कार्य से जुड़े मजदूर, मनरेगा कार्यकर्ता, छोटे दुकानदार, वाहन चालक और कृषि श्रमिक – ये सभी असंगठित क्षेत्र की रीढ़ हैं।

ई-श्रम पोर्टल का शत-प्रतिशत आच्छादन: राज्य में कार्यरत सभी असंगठित श्रमिकों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित करके उन्हें दुर्घटना बीमा, पेंशन योजनाओं और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों से जोड़ा जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी की कमी के कारण इस कार्य में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए विशेष मोबाइल वैन और स्थानीय जन सेवा केंद्रों (CSC) की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाया जाना तय किया गया है।

श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ: केंद्रीय मंत्री के साथ चर्चा के दौरान श्रमिकों और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर भी बल दिया गया। श्रम कल्याण बोर्डों के माध्यम से श्रमिकों के बच्चों को छात्रवृत्ति, व्यावसायिक प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा जैसी सुविधाएँ सुलभ कराने की योजना है, जिससे उनकी भावी पीढ़ी का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

केंद्र और राज्य का मजबूत समन्वय: विकास का नया रोडमैप
सांसद अजय भट्ट और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया की यह महत्वपूर्ण बैठक इस बात की पुष्टि करती है कि केंद्र सरकार उत्तराखंड के बहुआयामी विकास के प्रति पूरी तरह गंभीर है। एक ओर जहाँ ढांचागत विकास के अंतर्गत सड़कों, सुरंगों, ऑल-वेदर रोड और रेल लाइनों का नेटवर्क तेज़ी से बिछाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मानव संसाधन विकास, युवा कल्याण, खेल और रोजगार जैसी जन-आकांक्षी प्राथमिकताओं को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

भविष्य की संभावनाओं और विकास का नया अध्याय
नैनीताल-ऊधमसिंह नगर क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में अजय भट्ट लगातार अपने क्षेत्र और संपूर्ण राज्य की समस्याओं और आवश्यकताओं को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाते रहे हैं। अजय भट्ट की मनसुख मांडविया से मुलाकात भी इसी निरंतर प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

इस सार्थक संवाद से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में उत्तराखंड को खेल अवसंरचना के विकास और रोजगार सृजन की नई योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा। केंद्र और राज्य के बीच यह जीवंत संवाद निश्चित रूप से प्रदेश के युवाओं और श्रमिक वर्ग के लिए नए अवसर पैदा करेगा, जिससे राज्य के समग्र सामाजिक और आर्थिक ढांचे को नई ऊर्जा मिलेगी।

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