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ग्राउंड ज़ीरो पर सरकार: ऋषिकेश में तबाही का मंजर देख एक्शन में मंत्री मदन कौशिक और विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल, दिए कड़े निर्देश

ग्राउंड ज़ीरो पर सरकार: बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक और क्षेत्रीय विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल ऋषिकेश के आपदा ग्रस्त इलाकों में पहुँचे। उन्होंने गौहरी माफी और रायवाला के बाढ़ तथा जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए और प्रभावित लोगों तक त्वरित सहायता पहुँचाई जाए।

उत्तराखंड के इस इलाके में हर साल बारिश के मौसम में नदियों का जलस्तर बढ़ने से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है। इस बार भी मानसून की वजह से ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जनप्रतिनिधियों और शासन के अधिकारियों ने खुद मौके पर जाकर हालात का आंकलन किया।

निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अमले में हड़कंप देखने को मिला। मंत्री और विधायक ने संबंधित विभागों के अधिकारियों से अब तक चलाए गए राहत अभियानों और भविष्य की सुरक्षा योजनाओं का पूरा ब्योरा मांगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गौहरी माफी में सौंग नदी का बढ़ता कटाव बना बड़ी चुनौती
गौहरी माफी क्षेत्र में सौंग नदी के उफान पर आने से बड़े पैमाने पर जमीन का कटाव हो रहा है। नदी का बहाव इतना तेज है कि किनारे की मिट्टी लगातार बह रही है, जिससे आसपास की बस्तियों और रिहाइशी मकानों पर भारी खतरा मंडराने लगा है। कई जगहों पर नदी का पानी लोगों के घरों तक पहुँच गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में डर का माहौल बना हुआ है।
आपदा प्रबंधन मंत्री और स्थानीय विधायक ने सौंग नदी से प्रभावित क्षेत्रों का काफी देर तक बारीक निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद सिंचाई विभाग और जिला आपदा प्रबंधन टीम के अधिकारियों से पूछा कि कटाव रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्थायी सुरक्षा कार्यों के भरोसे रहने के बजाय एक ऐसा मजबूत और टिकाऊ ढांचा तैयार किया जाए जिससे हर साल बनने वाली इस विपदा से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि तटबंधों को मजबूत करने और नदी की धारा को सुरक्षित दिशा देने के लिए तत्काल जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए जाएं, ताकि आबादी वाले इलाकों को सुरक्षित रखा जा सके।

रायवाला में सुसुवा नदी से टूटी पुलिया, नया ढांचा बनाने के आदेश
रायवाला खेल मैदान के पास स्थित वह महत्वपूर्ण पुलिया पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जो गौहरी माफी और रायवाला को आपस में जोड़ती थी। सुसुवा नदी के प्रचंड वेग के कारण इस पुलिया की नींव और ढांचा बुरी तरह कमजोर होकर ढह गया है। इस रास्ते के बंद हो जाने से दोनों गांवों के बीच का सीधा संपर्क टूट गया है, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

निरीक्षण के दौरान मंत्री और विधायक ने पुलिया के टूटे हुए हिस्से को देखा और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बिना किसी देरी के काम शुरू करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि पुलिया के दोबारा निर्माण और आवश्यक मरम्मत के लिए तुरंत एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाए।

इस रिपोर्ट को तुरंत जिलाधिकारी कार्यालय और जिला आपदा प्रबंधन विभाग को भेजने के आदेश दिए गए हैं, ताकि निर्माण कार्य के लिए जरूरी धनराशि जल्द से जल्द स्वीकृत और आवंटित की जा सके। जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों से कहा कि कागजी कार्रवाई को जल्द पूरा करके जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराया जाए ताकि आम जनता को आवाजाही में हो रही मुसीबत से मुक्ति मिल सके।

अड़वाणी प्लॉट में जलभराव की समस्या का पक्का समाधान तलाशने पर जोर
रायवाला का अड़वाणी प्लॉट इलाका लंबे समय से मानसून के दिनों में भारी जलभराव का सामना करता आ रहा है। इस बार भी लगातार हुई बारिश की वजह से क्षेत्र के निचली गलियों और आंगनों में पानी जमा हो गया है। जलभराव के कारण लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है और संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।

निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय निवासियों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक टीम को सख्त हिदायत दी कि जब तक मानसून का समय चल रहा है, तब तक बड़े और उच्च क्षमता वाले पंपों के जरिए पानी की निकासी का काम बिना रुके लगातार जारी रखा जाए।

केवल अस्थायी रूप से पानी निकालने तक सीमित न रहते हुए, अधिकारियों को इस समस्या का पक्का और तकनीकी समाधान खोजने को कहा गया है। मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों से कहा कि इस पूरे क्षेत्र में पानी की निकासी की एक बेहतरीन और दीर्घकालिक योजना बनाई जाए, जिसमें बड़े नालों का निर्माण और जल प्रवाह की सही दिशा तय करना शामिल हो। इसका प्रस्ताव बनाकर तुरंत शासन को भेजा जाए ताकि अगली बार लोगों को इस मुसीबत का सामना न करना पड़े।

अंतर-विभागीय तालमेल और त्वरित कार्रवाई पर सरकार का रुख सख्त
बाढ़ और आपदा जैसी आपातकालीन स्थितियों में विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी अक्सर काम को धीमा कर देती है। इस बात को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण के दौरान मंत्री और विधायक ने सभी प्रशासनिक विभागों को एक मंच पर आकर काम करने के निर्देश दिए।

तहसील प्रशासन, जिला आपदा प्रबंधन दल, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग और स्थानीय निकाय के अधिकारियों को आपस में बेहतर समन्वय बनाए रखने को कहा गया है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक बाढ़ का खतरा पूरी तरह टल नहीं जाता, तब तक सभी विभाग चौबीसों घंटे सतर्क रहें।

निरीक्षण के दौरान मंत्री मदन कौशिक और विधायक प्रेमचंद्र अग्रवाल ने संयुक्त रूप से कहा:
“प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा हमारी सरकार की सर्वोच्च प्रतिबद्धता है। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए हम पूरी तरह से सतर्क हैं। आपदा प्रभावितों को तुरंत हर संभव राहत सामग्री और आर्थिक सहायता पहुँचाना हमारी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है। किसी भी विभाग के अधिकारी ने अगर राहत कार्यों में देरी की, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी।”

दूरगामी सुरक्षा योजना से ही रुकेगी बार-बार आने वाली तबाही
ऋषिकेश और उसके आसपास के मैदानी व तटीय इलाके प्राकृतिक दृष्टिकोण से संवेदनशील माने जाते हैं। सौंग और सुसुवा जैसी नदियाँ मानसून के समय अपने भयानक रूप में आ जाती हैं, जिससे हर साल करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान होता है और लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
इस निरीक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल तात्कालिक राहत देना ही नहीं था, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत और दूरगामी सुरक्षा घेरा तैयार करना भी था। सरकार का मानना है कि अस्थायी तौर पर मिट्टी के बोरे रखने या छोटा-मोटा भराव करने से समस्या खत्म नहीं होती।

इसके लिए निम्नलिखित दीर्घकालिक बिंदुओं पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं:
नदियों के किनारों पर मजबूत पक्के तटबंधों का निर्माण: सौंग और सुसुवा नदी के सबसे ज्यादा संवेदनशील कटाव वाले हिस्सों को चिन्हित करके वहाँ कंक्रीट और पत्थरों के मजबूत तटबंध बनाए जाएंगे।
सड़कों और पुलियों की मजबूती: भविष्य में आने वाले पानी के भारी दबाव को सहने में सक्षम जल निकासी संरचनाओं और पुलियों की डिजाइन तैयार की जाएगी।
प्राकृतिक जल निकासी रास्तों को पुनर्जीवित करना: रिहाइशी इलाकों में पानी जमा होने की मुख्य वजह प्राकृतिक नालों पर हुआ अतिक्रमण या उनकी सफाई न होना है। इसे दुरुस्त करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
आपदा प्रबंधन टीम की चौबीसों घंटे तैनाती: प्रभावित इलाकों में किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटने के लिए आपदा प्रबंधन की टीमों को उपकरणों और बचाव नौकाओं के साथ तैनात रहने को कहा गया है।

प्रभावितों को तुरंत राहत सामग्री और सहायता राशि वितरण का भरोसा
स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने मंत्री और विधायक को अपनी-अपनी समस्याओं से अवगत कराया। कई परिवारों के खेतों की उपजाऊ मिट्टी नदी के कटाव में बह गई है, जबकि कुछ लोगों के मकानों की दीवारें पानी के भराव से कमजोर हो गई हैं।

जनप्रतिनिधियों ने प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि नुकसान का सही-सही आंकलन करने के लिए राजस्व विभाग की टीमों को सर्वे के काम में लगा दिया गया है। जैसे ही नुकसान की रिपोर्ट तैयार होगी, प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता राशि तुरंत वितरित की जाएगी।

स्थानीय प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि जिन लोगों के घरों में पानी घुस जाने के कारण रहने या खाने-पीने का संकट पैदा हो गया है, उनके लिए सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी शिविरों और भोजन की व्यवस्था बिना किसी देरी के की जाए।
इस निरीक्षण के दौरान क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में यह माना कि जनप्रतिनिधियों के इस तरह धरातल पर उतरकर जायजा लेने से प्रशासनिक मशीनरी में तेजी आती है और प्रभावित जनता का विश्वास मजबूत होता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दिए गए निर्देशों के आधार पर अधिकारी कितनी जल्दी धरातल पर काम पूरा करके जनता को राहत पहुँचाते हैं।

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