Homeउत्तराखंडलोक भवन में सीमांत छात्रों से बोले राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह:...

लोक भवन में सीमांत छात्रों से बोले राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह: बड़े लक्ष्य, कड़ा अनुशासन और दैनिक डायरी ही बनाएगी आपको सफल

लोक भवन में राष्ट्रीय एकता यात्रा और युवा सशक्तिकरण का एक अनूठा संगम उस समय देखने को मिला जब उत्तराखंड के सीमावर्ती कुमाऊं क्षेत्र के होनहार विद्यार्थियों का एक प्रतिनिधिमंडल राजधानी स्थित लोक भवन पहुंचा। यह विशेष अवसर भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत आयोजित की गई एक अंतर-राज्यीय शैक्षणिक और सांस्कृतिक यात्रा का हिस्सा था। इस महत्वपूर्ण पहल का आयोजन 119 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड के कुशल दिशा-निर्देशन और तत्वावधान में 101 फील्ड रेजिमेंट द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।

इस ऐतिहासिक यात्रा का मुख्य ध्येय देश के सुदूर और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्रशासनिक व्यवस्था, रक्षा प्रणाली और प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों से प्रत्यक्ष रूप से रूबरू कराना है। लोक भवन में राज्यपाल से हुई यह औपचारिक और प्रेरणादायी भेंट सीमावर्ती विद्यार्थियों के जीवन में एक दूरगामी और सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनी है।

सीमांत क्षेत्रों की युवा प्रतिभाओं के लिए एक दूरदर्शी पहल
भारतीय सेना लंबे समय से केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित न रहकर देश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में सामाजिक और शैक्षणिक चेतना का संचार करने का कार्य भी कर रही है। ऑपरेशन सद्भावना इसी प्रतिबद्धता की एक जीवंत मिसाल है। कुमाऊं क्षेत्र के दूरदराज और दुर्गम इलाकों से आए छात्र-छात्राओं के लिए यह यात्रा केवल एक पर्यटन स्थल का भ्रमण नहीं है, बल्कि यह उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और उनके भीतर छिपी क्षमताओं को पहचानने का एक सशक्त माध्यम है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को अक्सर देश के मुख्य प्रशासनिक, तकनीकी और सांस्कृतिक केंद्रों को करीब से देखने के अवसर सीमित ही मिल पाते हैं। भौगोलिक विषमताओं और संसाधनों की सीमितता के कारण इन क्षेत्रों के बच्चे मुख्यधारा से कटे रहते हैं। ऐसे में भारतीय सेना की 101 फील्ड रेजिमेंट और 119 स्वतंत्र इन्फैंट्री ब्रिगेड ने इन बच्चों को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने के लिए यह राष्ट्रीय एकता यात्रा आयोजित की। इस यात्रा के दौरान विद्यार्थियों को देश के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों, उच्च शिक्षण संस्थानों, सैन्य प्रतिष्ठानों और प्रशासनिक केंद्रों का दौरा कराया गया, जिससे उनमें एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूती मिली है।

राजभवन में संवाद: राज्यपाल का विद्यार्थियों को अमूल्य मार्गदर्शन
लोक भवन परिसर में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड के राज्यपाल ने सीमांत क्षेत्र के विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बच्चों के उत्साह और उनकी जिज्ञासा की सराहना करते हुए उन्हें जीवन में सफलता प्राप्त करने के कई महत्वपूर्ण मूल मंत्र दिए।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह की राष्ट्रीय यात्राएं जीवन में बहुत कम मिलती हैं, इसलिए इन क्षणों का सही उपयोग करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे इस भ्रमण के अनुभवों को केवल कुछ दिनों की यादों तक सीमित न रखें, बल्कि इन्हें अपने जीवन भर के संस्मरणों के रूप में सुरक्षित और सहेजे रखें।

अनुभवों का दस्तावेजीकरण: राज्यपाल ने सभी छात्र-छात्राओं को एक बहुत ही व्यावहारिक और दूरदर्शी सलाह दी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान विद्यार्थियों को प्रतिदिन की गतिविधियों, नए देखे गए स्थानों, सीखी गई नई बातों और विभिन्न व्यक्तित्वों से हुए संवाद का विवरण एक समर्पित नोटबुक में लिखना चाहिए।

स्मृतियों का संकलन: उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया कि वे यात्रा के दौरान ली गई तस्वीरों और महत्वपूर्ण दृश्यों को एक सुव्यवस्थित संग्रह के रूप में संभाल कर रखें ताकि यह रिकॉर्ड भविष्य में उन्हें और उनके साथियों को प्रेरित करता रहे।

सोच का आत्म-मूल्यांकन: राज्यपाल ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को यह विश्लेषण जरूर करना चाहिए कि इस यात्रा पर निकलने से पहले जीवन, समाज और राष्ट्र को लेकर उनके विचार क्या थे और विभिन्न संस्थानों का भ्रमण करने के बाद उनकी सोच और लक्ष्यों में किस प्रकार का सकारात्मक बदलाव आया है।

जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारण और शीर्ष नेतृत्व की प्रेरणा
संवाद के दौरान राज्यपाल ने सीमांत क्षेत्रों से आए युवाओं के भीतर आत्मविश्वास का संचार करते हुए कहा कि आज का भारत हर नागरिक को आगे बढ़ने का समान अवसर प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में छोटे सपनों से आगे बढ़कर बड़े और व्यापक लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया।

“सफलता केवल किसी क्षेत्र या करियर में प्रवेश पाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आपका लक्ष्य उस क्षेत्र के सबसे ऊंचे शिखर तक पहुंचने का होना चाहिए। यदि आप भारतीय सेना में शामिल होने की इच्छा रखते हैं, तो केवल एक सैनिक के रूप में सेवा देने की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि अपने भीतर वह क्षमता और संकल्प विकसित करें कि आप सेना के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने का सपना देखें और उसे साकार करें।”

राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि किसी भी बड़े सपने को धरातल पर उतारने के लिए तीन मौलिक सिद्धांतों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है:
कठिन और निरंतर परिश्रम: किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान पाने के लिए बिना थके और बिना रुके मेहनत करना पहला नियम है।
दृढ़ अनुशासन: जीवन में अनुशासन ही वह पुल है जो संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाता है।
पूर्ण समर्पण और निष्ठा: विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना ही एक सच्चे नेतृत्वकर्ता की पहचान है।

वाइब्रेंट विलेज अभियान और सीमावर्ती विकास की नई दिशा
बातचीत के दौरान राज्यपाल ने देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और वहां चल रही परिवर्तनकारी योजनाओं का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के शीर्ष नेतृत्व की दूरदर्शी नीतियों के कारण आज सीमावर्ती क्षेत्रों को अंतिम गांव नहीं, बल्कि देश के पहले गांव के रूप में मान्यता दी जा रही है।

केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों और नीतियों के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में सड़कों, बिजली, पानी, इंटरनेट और पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे का तीव्र गति से विकास किया जा रहा है। इससे इन क्षेत्रों में छिपी हुई अपार संभावनाएं अब देश और दुनिया के पटल पर खुलकर सामने आ रही हैं।

राज्यपाल ने उपस्थित विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय कला और अनूठी विशेषताओं को पहचानें। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इन संभावनाओं का उपयोग करके अपने क्षेत्रों के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं और अपने गृह क्षेत्र को देश के पर्यटन और सांस्कृतिक मानचित्र पर उभारने में योगदान दें।

विद्यार्थियों के अनुभव और सैन्य नेतृत्व की उपस्थिति
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को भी राज्यपाल के समक्ष अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला। छात्र-छात्राओं ने बहुत ही सरल और सहज अंदाज में बताया कि इस यात्रा ने उनके देखने के नजरिए को पूरी तरह से बदल दिया है। उन्होंने बताया कि विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और महत्वपूर्ण संस्थानों के भ्रमण से उन्हें देश की कार्यप्रणाली और गौरवशाली इतिहास को समझने का अनूठा अवसर मिला।

विद्यार्थियों ने बताया कि सेना के अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई इस यात्रा से उनके भीतर राष्ट्र सेवा की प्रेरणा और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि लोक भवन जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर राज्यपाल से सीधे बात करना उनके लिए एक कभी न भूलने वाला क्षण है।

इस गरिमामय अवसर पर भारतीय सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल थे:
कर्नल अभिनव शर्मा
लेफ्टिनेंट अनमोल शर्मा
सूबेदार मेजर जीएन भुसारी
सैन्य अधिकारियों ने राज्यपाल को यात्रा के उद्देश्य, यात्रा मार्ग और विद्यार्थियों द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने सभी छात्र-छात्राओं को उनके उज्ज्वल, सफल और समृद्ध भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए।

राष्ट्र निर्माण में सीमांत युवाओं का योगदान
‘ऑपरेशन सद्भावना’ के अंतर्गत आयोजित यह राष्ट्रीय एकता यात्रा केवल एक शैक्षणिक भ्रमण नहीं है, बल्कि यह सुदूर क्षेत्रों के युवाओं को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने की एक अत्यंत प्रभावी और मजबूत रणनीति है। जब सीमांत इलाकों के बच्चे देश के प्रमुख शहरों, प्रशासनिक भवनों, तकनीकी केंद्रों और ऐतिहासिक स्मारकों का भ्रमण करते हैं, तो उनके मन से अलगाव और दूरी का भाव पूरी तरह समाप्त हो जाता है।

इस प्रकार के आयोजनों से सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और आत्मनिर्भरता की भावना बलवती होती है। यह यात्रा यह सिद्ध करती है कि जब सुदूर इलाकों के युवाओं को सही मार्गदर्शन, अवसर और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे देश के किसी भी अन्य क्षेत्र के युवाओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। राजभवन में आयोजित यह संवाद इन बच्चों के दिलों में देश सेवा और अपने सपनों को पूरा करने की एक नई अलख जगाने में पूरी तरह सफल रहा है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments