धामी कैबिनेट बैठक में आज उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास और जनहित से जुड़े कई दूरगामी फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासनिक ढाँचे को मजबूत करने, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने, सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देने तथा ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने वाले कुल 17 प्रमुख प्रस्तावों पर अंतिम सहमति दी गई। राज्य सरकार के इस निर्णय से जहाँ एक ओर सरकारी महकमों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति आएगी, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से राहत की उम्मीद लगाए बैठे उपनल कर्मचारियों को भी बड़ी सौगात मिली है।
बैठक संपन्न होने के उपरांत मुख्यमंत्री के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशासनिक निर्णयों की विस्तृत जानकारी साझा की। सरकार के इस कदम से स्पष्ट संकेत मिलता है कि राज्य प्रशासन ग्रामीण विकास, शहरी सुधार, जनस्वास्थ्य और पूर्व सैनिकों के हित में एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहा है।
उपनल कर्मचारियों के लिए राहत भरा फैसला: समान कार्य समान वेतन की प्रक्रिया तय
धामी कैबिनेट बैठक का सबसे चर्चित और राहतकारी फैसला उपनल के माध्यम से कार्यरत हजारों कर्मचारियों से जुड़ा रहा। शासन ने उपनल कर्मियों की वर्षों पुरानी मांगों पर विचार करते हुए समान कार्य के लिए समान वेतन देने की व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है।
सरकार की ओर से तय की गई रूपरेखा के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया को तीन अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा।
द्वितीय चरण की समयसीमा: योजना का दूसरा चरण 9 नवंबर से प्रभाव में आएगा। इसके अंतर्गत वर्ष 2018 तक अपनी सेवाएँ दे चुके कर्मियों को सीधे तौर पर लाभान्वित किया जाएगा।
महंगाई भत्ते का लाभ: 1 जनवरी 2016 के बाद जिन कर्मचारियों की सेवा में किसी कारणवश विराम (ब्रेक) आया था, उन्हें भी महंगाई भत्ते का लाभ देने का मार्ग प्रशस्त कर दिया गया है।
नए पदों का सृजन: विभिन्न विभागों में स्वीकृत पदों के सापेक्ष जितने उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं, उन्हीं के अनुरूप नए पद तैयार करने और आवश्यकता पड़ने पर उनका समायोजन करने का ढाँचा भी स्वीकृत किया गया है।
इस दूरदर्शी निर्णय से राज्य भर के विभिन्न सरकारी विभागों, निकायों और स्वायत्त संस्थाओं में अपनी सेवाएँ दे रहे कर्मियों का भविष्य अधिक सुरक्षित होगा और उनमें कार्य के प्रति नया उत्साह देखने को मिलेगा।
अग्निवीरों के सम्मान और रोजगार के लिए विशेष प्रकोष्ठ का गठन
सैन्य बाहुल्य राज्य उत्तराखंड में युवाओं के भविष्य को संवारने की दिशा में सरकार ने एक और संवेदनशील पहल की है। अपनी निश्चित अवधि की सेवा पूरी करके लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए एक अलग और समर्पित प्रकोष्ठ (सेल्स यूनिट) गठित करने का संकल्प लिया गया है।
इस विशेष प्रकोष्ठ का मुख्य उद्देश्य अपनी सैन्य सेवा पूरी कर चुके युवाओं के अनुभव, अनुशासन और कौशल का सदुपयोग करना होगा।
यह प्रकोष्ठ पूर्व अग्निवीरों को राज्य के भीतर रोजगार, स्वरोजगार, पुनर्वास और विभिन्न सरकारी सेवाओं में समायोजित करने के लिए एक मजबूत तंत्र के रूप में कार्य करेगा।
इस समर्पित व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए छह प्रशासनिक पदों के सृजन का प्रस्ताव पारित किया गया है।
सरकार के इस कदम से सेना में सेवा देकर लौटने वाले जांबाज युवाओं को नागरिक जीवन में सम्मानजनक आजीविका तलाशने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं को नया जीवन: मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन और कैंसर संस्थान
प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में कई अहम निर्णय लिए गए हैं। दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों तक दवाइयों और चिकित्सीय उपकरणों की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक पृथक संस्था का निर्माण किया जाएगा।
उत्तराखंड मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन
राज्य में सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक केंद्रों में आवश्यक औषधियों तथा शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) सामग्री की सुगम और समयबद्ध खरीद के लिए ‘उत्तराखंड मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन’ का गठन किया जाएगा।
यह कॉरपोरेशन राज्य के मुख्य सचिव की प्रत्यक्ष निगरानी और अध्यक्षता में अपनी गतिविधियाँ संचालित करेगा। इससे खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की कमी से राहत मिलेगी।
ऋषिकेश में कैंसर संस्थान और राष्ट्रीय केंद्र
धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को एक नया आयाम देते हुए वहाँ कैंसर संस्थान स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। इससे राज्य के कैंसर पीड़ितों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, हरिद्वार में ‘राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र’ की स्थापना हेतु एक एकड़ भूमि निशुल्क उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी मोहर लगाई गई है।
साथ ही, स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत चिकित्सा एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग के पुनर्गठन को भी सहमति दी गई है, जिससे आँकड़ों के प्रबंधन में सटीकता आएगी।
सहकारिता और परिवहन क्षेत्र में दूरगामी सुधार
राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सहकारिता तथा परिवहन नीति में महत्वपूर्ण फेरबदल किए गए हैं।
उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नई सहकारिता नीति को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सात मुख्य लक्ष्यों को चिह्नित किया गया है, जिनके माध्यम से कृषि, दुग्ध उत्पादन और स्थानीय स्वरोजगार से जुड़े समूहों को सीधे वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।
परिवहन एवं वाहन कराधान नीति
परिवहन क्षेत्र में सुशासन स्थापित करने के लिए मोटर वाहन कराधान सुधार संबंधी प्रावधानों को स्वीकृति दी गई है।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) से चलने वाले वाहनों को हरित कर (ग्रीन सेस) में मिलने वाली छूट को यथावत रखने का फैसला लिया गया है।
हाइब्रिड (दोहरे ईंधन वाले) वाहनों पर पूर्व में दी जा रही छूट को वापस ले लिया गया है।
देश के विभिन्न राज्यों में लागू की गई विद्युत वाहन (इलेक्ट्रिक व्हीकल) नीतियों का गहराई से विश्लेषण करने के बाद उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुकूल एक नई और आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन नीति तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे का विस्तार: 1320 मेगावाट पावर प्लांट
राज्य में निरंतर बढ़ रही बिजली की माँग को पूरा करने और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक बड़े ऊर्जा समझौते को हरी झंडी दिखाई गई है।
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) द्वारा 1320 मेगावाट क्षमता वाले कोयला आधारित बिजली घर के निर्माण और संचालन के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस परियोजना के लिए न्यूनतम बोली लगाने वाली संस्था ‘अडानी पावर’ को अनुबंध सौंपने संबंधी प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई है। छत्तीसगढ़ में कोयला ब्लॉक का आवंटन होने के पश्चात यह बिजली परियोजना आगामी 25 वर्षों की अवधि के लिए संचालित की जाएगी। इस कदम से राज्य को लंबी अवधि तक निर्बाध और सस्ती बिजली मिलने की उम्मीद है।
बुनियादी ढाँचा, स्थानीय निकाय और जन कल्याणकारी कदम
मौसम की मार और बुनियादी ढाँचे के नुकसान से निपटने के लिए सरकार ने विशेष बजट और प्रशासनिक ढील देने का ऐलान किया है।
सड़कों की त्वरित मरम्मत
मानसून और भारी वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों का कायाकल्प करने के लिए ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। यदि निकायों के पास बजट का अभाव होता है, तो शासन स्तर से विशेष आर्थिक सहायता जारी की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को समय रहते पूरा कर लिया जाए ताकि वर्षा का दौर समाप्त होते ही सड़कों के पुनर्निर्माण और गड्ढा-मुक्ति का काम तेजी से शुरू किया जा सके।
विस्थापितों और मलिन बस्तियों के लिए आर्थिक मदद
राजधानी देहरादून की रिस्पना नदी के तट पर बसे काठबंगला क्षेत्र के 116 परिवारों के पुनर्वास के लिए सरकार ने बड़ा दिल दिखाया है। मलिन बस्ती के इन निवासियों से पुनर्वास आवास योजना के तहत ली जाने वाली 10 प्रतिशत की अंशदान राशि का भुगतान स्वयं राज्य सरकार करेगी।
शहीदों का सम्मान और अन्य निर्णय
शहीदों की प्रतिमाएं: उत्तराखंड के अमर शहीदों के त्याग को स्मरणीय बनाने के लिए उनके पैतृक गाँवों में उनकी भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।
आवश्यक वस्तुओं की निगरानी: बाजार में चीनी जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और मूल्यों पर लगातार निगरानी रखने का तंत्र विकसित किया जाएगा।
लोकायुक्त एवं नियमावली: पारदर्शी शासन के लिए लोकायुक्त खोजबीन समिति से जुड़े नियमों और आबादी सर्वेक्षण अभिलेख नियमावली को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
उत्तरांचल विश्वविद्यालय नियमावली: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उत्तरांचल विश्वविद्यालय की प्रशासनिक नियमावली में आवश्यक संशोधन को मंजूरी दी गई।


