उत्तराखंड में मातृशक्ति का सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता एक बार फिर देखने को मिली है। देहरादून स्थित मुख्यमंत्री निवास के मुख्य सेवक परिसर में आयोजित एक भावुक और गरिमामय कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के कोने-कोने से आई महिलाओं ने राज्य के मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सफल जीवन की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सभी बहनों का तहे दिल से स्वागत और सम्मान किया तथा राज्य की समस्त जनता को भाई-बहन के इस पवित्र त्यौहार की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
राज्य के मुख्य सेवक ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्षा बंधन केवल एक साधारण धागा बांधने का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह परस्पर विश्वास, अटूट स्नेह और बहनों की रक्षा के संकल्प का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की देवतुल्य बहनों और माताओं का स्नेह तथा आशीर्वाद ही उन्हें उत्तराखंड की निष्ठापूर्वक सेवा करने और प्रदेश को विकास के पथ पर आगे ले जाने के लिए हर पल एक नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है। उनका कहना था कि महिलाएं केवल परिवार का आधार ही नहीं होतीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के समग्र विकास तथा प्रगति की सबसे मजबूत नींव भी वही हैं।
उत्तराखंड में मातृशक्ति का सम्मान और सशक्तिकरण के तहत केंद्र और राज्य सरकार की पहल
उत्तराखंड में मातृशक्ति का सम्मान और सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चलाए जा रहे विभिन्न जनकल्याणकारी अभियानों का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के शीर्ष नेतृत्व ने सदैव महिलाओं के आत्मसम्मान, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। देश की नीति निर्माण प्रणालियों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए तैंतीस प्रतिशत आरक्षण का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो रहा है।
इसके अतिरिक्त, रसोई को धुएं से मुक्त करने और महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए चलाई गई मुफ्त गैस कनेक्शन योजना, महिलाओं को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने वाला विशेष अभियान, गर्भवती महिलाओं के पोषण और सुरक्षा से जुड़ी कल्याणकारी योजनाएं तथा बेटियों के सुरक्षित भविष्य और शिक्षा को बढ़ावा देने वाला ‘बेटी बचाओ’ अभियान जैसे अनेक प्रयासों ने देश और प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक और निर्णायक बदलाव लाया है। इन सभी योजनाओं के माध्यम से न केवल महिलाओं का सामाजिक दृष्टिकोण बदला है, बल्कि वे आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने में भी सक्षम हुई हैं।
राज्य स्तर पर सरकारी नौकरियों और रोजगार में महिलाओं को विशेष अवसर
प्रदेश सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी अपनी तरफ से माताओं और बहनों के कल्याण और स्वावलंबन के लिए दिन-रात प्रयासरत है। राज्य की सभी सरकारी सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें रोजगार के समान अवसर देने के उद्देश्य से तीस प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को पूरी मजबूती से लागू किया गया है।
정 सरकार का यह मानना है कि जब तक किसी राज्य की महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होंगी, तब तक उस राज्य का समग्र और न्यायसंगत विकास संभव नहीं हो सकता। इसीलिए नौकरियों में आरक्षण के साथ-साथ स्वरोजगार के क्षेत्र में भी महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि वे अपनी क्षमताओं का पूर्ण उपयोग कर सकें।
आर्थिक मजबूती की ओर कदम: तीन लाख से अधिक महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
देश के प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की योजना को उत्तराखंड राज्य में बहुत ही प्रभावी और तेजी से धरातल पर उतारा गया है। इस दूरदर्शी नीति का ही परिणाम है कि वर्तमान में प्रदेश की तीन लाख नौ हजार से अधिक महिलाएं पूरी तरह से आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बन चुकी हैं।
गांव-गांव में गठित स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब केवल अपने घरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय उत्पादों के निर्माण, जैविक खेती, हस्तशिल्प और विभिन्न प्रकार की कुटीर गतिविधियों से जुड़कर अपनी आजीविका को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं। यह महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधार रही हैं, बल्कि राज्य की समग्र अर्थव्यवस्था में भी अपना बहुमूल्य योगदान दे रही हैं।
महिला कल्याण के लिए संचालित प्रमुख राज्य स्तरीय योजनाएं
राज्य में महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर प्रदान करने के लिए कई विशेष योजनाएं पूरी सक्रियता से चलाई जा रही हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
महिला उत्सव और स्वरोजगार प्रोत्साहन योजना: इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को बड़ा मंच प्रदान किया जाता है।
महिला स्वयं सहायता समूह सुदृढ़ीकरण योजना: इसके तहत स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
विशेष महालक्ष्मी योजना: इस योजना के माध्यम से नवजात शिशुओं और माताओं के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य की देखभाल सुनिश्चित की जाती है।
राज्य सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उच्च गुणवत्ता वाले स्थानीय सामानों को बेहतर बाजार, सही मूल्य और व्यापक पहचान मिल सके। इसके लिए सरकारी स्तर पर विपणन मेलों, प्रदर्शनियों और बिक्री केंद्रों की व्यवस्था की जा रही है ताकि महिलाओं की मेहनत का पूरा और उचित फल उन्हें मिल सके।
समारोह में प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस गरिमामय और आत्मीय आयोजन के दौरान अनेक प्रमुख हस्तियां और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी गीता धामी, क्षेत्रीय विधायक सविता कपूर, आशा नौटियाल, सत्तारूढ़ दल के महिला मोर्चे की प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट के साथ-साथ राज्य के अलग-अलग दुर्गम और सुदूर क्षेत्रों से आई सैकड़ों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। सभी उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री को रक्षा सूत्र बांधकर अपनी शुभकामनाएं दीं और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे महिला केंद्रित कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त की।
मातृशक्ति के प्रति कृतज्ञता और उज्ज्वल भविष्य का संकल्प
यह आयोजन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि उत्तराखंड का विकास बिना मातृशक्ति के सहयोग के अधूरा है। सरकार का यह स्पष्ट दृष्टिकोण है कि राज्य की हर महिला को सुरक्षा, सम्मान और प्रगति के समान अवसर मिलें। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के समापन पर यह दोहराया कि राज्य सरकार प्रदेश की महिलाओं के सपनों को पूरा करने और उनके जीवन को अधिक खुशहाल बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करती रहेगी। बहनों द्वारा बांधा गया रक्षा सूत्र केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तराखंड के समग्र विकास, सुरक्षा और जनसेवा के प्रति राज्य सरकार के अटूट संकल्प को दोहराने का एक पावन अवसर है।


