देहरादून में NDA और CDS परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत कड़ा और पुख्ता कर दिया गया है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और सम्मिलित रक्षा सेवा की परीक्षाओं के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। शहर भर में कुल 54 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहाँ हज़ारों की संख्या में अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाने और देश सेवा का सपना पूरा करने के लिए पहुँच रहे हैं। इन सभी केंद्रों पर निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से परीक्षा संपन्न कराने के लिए प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों ने अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। इन्हीं प्रमुख केंद्रों में से एक, SBN Academy Inter College की तैयारियों का विस्तृत जायजा लेने के लिए हमारे संवादाता आर्यन सिंह ने कॉलेज के प्रधानाचार्य विशाल अग्रवाल से खास बातचीत की। इस विशेष वार्ता में प्रधानाचार्य ने परीक्षा की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की सुविधा और आयोग के नए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
देहरादून में एनडीए और सीडीएस परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था के तहत केंद्र संचालन और परीक्षार्थियों का विभाजन
एसबीएन अकादमी इंटर कॉलेज में अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या को देखते हुए बेहद व्यवस्थित और योजनाबद्ध ढांचा तैयार किया गया है। प्रधानाचार्य ने बताया कि केंद्र में अनुशासन और सुगमता बनाए रखने के लिए पूरे परिसर को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है, जिन्हें ब्लॉक ए और ब्लॉक बी का नाम दिया गया है। इन दोनों ही ब्लॉक में परीक्षार्थियों के बैठने के लिए सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण वातावरण तैयार किया गया है।
आँकड़ों की बात करें तो ब्लॉक ए में 576 परीक्षार्थियों के बैठने और परीक्षा देने की पूरी व्यवस्था की गई है। वहीं दूसरी ओर ब्लॉक बी में 384 परीक्षार्थी अपनी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इस प्रकार एक ही केंद्र पर कुल मिलाकर 960 अभ्यर्थियों के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं के साथ परीक्षा देने का प्रबंध किया गया है। पूरी परीक्षा प्रक्रिया को दो अलग-अलग पारियों में बाँटा गया है। पहली पारी सुबह के सत्र में शुरू होगी, जबकि दूसरी और अंतिम पारी का समय शाम साढ़े चार बजे समाप्त होगा। इस पूरी अवधि के दौरान केंद्र के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए निरीक्षकों और प्रशासनिक कर्मियों की तैनाती की गई है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध और आधुनिक सिग्नल अवरोधक तकनीक का उपयोग
संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित साधनों के प्रयोग को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है। इस कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण कदम परीक्षा कक्षों में सिग्नल अवरोधक यानी जैमर उपकरणों की स्थापना है। प्रधानाचार्य ने स्पष्ट किया कि कॉलेज के प्रत्येक उस कमरे में जैमर लगाए जा चुके हैं जहाँ बैठकर अभ्यर्थी अपना प्रश्नपत्र हल करेंगे।
यह सिग्नल अवरोधक प्रणाली बेहद शक्तिशाली है और परीक्षा केंद्र के 200 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक तरंगों या संचार साधनों को पूरी तरह निष्प्रभावी कर देती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि परीक्षा कक्ष के भीतर कोई भी मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, स्मार्ट घड़ी या अन्य कोई भी वायरलेस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कार्य नहीं कर सकेगा। परीक्षा शुरू होने से काफी पहले ही इन उपकरणों को सक्रिय कर दिया जाता है ताकि सुरक्षा तंत्र में किसी भी स्तर पर कोई चूक न रह जाए। इस कड़े कदम से परीक्षा की शुचिता और गरिमा पूरी तरह से सुरक्षित रहती है।
फर्जीवाड़े को रोकने के लिए चेहरा पहचान तकनीक और त्रिस्तरीय सुरक्षा जाँच प्रक्रिया
आधुनिक दौर में परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए संघ लोक सेवा आयोग ने एक ऐतिहासिक पहल की है। परीक्षा में केवल वास्तविक और योग्य अभ्यर्थी ही सम्मिलित हो सकें, इसके लिए चेहरा पहचान तकनीक यानी फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। एसबीएन अकादमी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य के अनुसार, यह व्यवस्था फर्जीवाड़े और किसी अन्य के स्थान पर परीक्षा देने की कुप्रथा को जड़ से खत्म करने में अत्यंत कारगर साबित हो रही है।
इस तकनीक के सुचारू क्रियान्वयन के लिए केंद्र पर विशेष जनशक्ति की तैनाती की गई है। नियम के अनुसार, प्रत्येक 100 परीक्षार्थियों पर एक समर्पित तकनीकी कर्मी को नियुक्त किया गया है। यह कर्मी प्रत्येक अभ्यर्थी के चेहरे का मिलान आयोग के डिजिटल डेटा से करेगा और उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करेगा। चेहरा सत्यापित होने के बाद ही अभ्यर्थी को आगे जाने की अनुमति दी जाती है। प्रधानाचार्य ने बताया कि संघ लोक सेवा आयोग द्वारा पिछली दो-तीन परीक्षाओं से इस तकनीक का सफल प्रयोग किया जा रहा है, जिसके बेहद सकारात्मक और प्रामाणिक परिणाम सामने आए हैं।
परीक्षार्थियों के केंद्र में प्रवेश की प्रक्रिया को त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में बाँटा गया है:
प्रथम चरण (पुलिस फ्रिस्किंग): जब कोई अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र के मुख्य द्वार पर पहुँचता है, तो सबसे पहले वहाँ तैनात पुलिस कर्मी उसकी गहन शारीरिक जाँच करते हैं। इस प्राथमिक जाँच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी संदिग्ध वस्तु या प्रतिबंधित सामान केंद्र के भीतर न जा सके।
द्वितीय चरण (चेहरा सत्यापन): पुलिस जाँच से सफलतापूर्वक गुजरने के बाद अभ्यर्थी को द्वितीय चरण में चेहरा पहचान केंद्र पर जाना होता है। वहाँ तैनात तकनीकी विशेषज्ञ अभ्यर्थी के चेहरे की प्रामाणिकता की जाँच करते हैं।
तृतीय चरण (कक्ष प्रवेश): जब चेहरा पूरी तरह से सत्यापित हो जाता है, तब तीसरे और अंतिम चरण में अभ्यर्थी को उसके आवंटित परीक्षा कक्ष में प्रवेश करने दिया जाता है।
यह बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि की गुंजाइश को समाप्त कर देता है।
बाहरी और दूर-दराज से आने वाले परीक्षार्थियों के लिए अमानती सामान गृह की विशेष सुविधा
देहरादून एक प्रमुख परीक्षा केंद्र होने के कारण यहाँ केवल स्थानीय परीक्षार्थी ही नहीं आते, बल्कि उत्तराखंड के पहाड़ी और दूर-दराज के जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में युवा परीक्षा देने पहुँचते हैं। ऐसे में बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने यात्रा बैग, बैगपैक, मोबाइल फोन और अन्य निजी वस्तुओं को सुरक्षित रखने की होती है, क्योंकि परीक्षा कक्ष के भीतर इन चीजों को ले जाना पूरी तरह वर्जित होता है।
परीक्षार्थियों की इस व्यावहारिक समस्या को समझते हुए एसबीएन अकादमी इंटर कॉलेज प्रशासन ने विशेष संवेदनशीलता दिखाई है। प्रधानाचार्य ने जानकारी दी कि कॉलेज के दोनों ब्लॉक में अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित अमानती सामान गृह यानी क्लॉक रूम की व्यवस्था की गई है। दूर-दराज से आए परीक्षार्थी केंद्र में प्रवेश करते ही अपना अतिरिक्त सामान इस अमानती कक्ष में सुरक्षित जमा करा सकते हैं और उन्हें एक टोकन या रसीद दे दी जाती है। परीक्षा समाप्त होने के उपरांत वे आसानी से अपना सामान वापस प्राप्त कर सकते हैं। इस व्यवस्था से बाहरी जिलों से आए युवाओं को काफी राहत मिली है और वे बिना किसी मानसिक तनाव के पूरी एकाग्रता के साथ अपनी परीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।
पारदर्शी परीक्षा संचालन से मजबूत होता युवाओं का विश्वास और प्रशासनिक मुस्तैदी
संघ लोक सेवा आयोग और स्थानीय प्रशासन का मूल उद्देश्य यही है कि देश की रक्षा सेवाओं में जाने का सपना देखने वाले युवाओं को एक पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण मिले। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और सम्मिलित रक्षा सेवा जैसी परीक्षाएं देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक हैं, जहाँ अभ्यर्थी वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद पहुँचते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता बनाए रखना तंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।
देहरादून के सभी 54 केंद्रों पर की गई यह चाक-चौबंद तैयारियां इसी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। सिग्नल अवरोधक उपकरण, चेहरा पहचान प्रणाली, पुलिस की कड़ी निगरानी और अभ्यर्थियों के लिए अमानती गृह जैसी सुविधाएं यह साबित करती हैं कि प्रशासन हर पहलू पर पूरी तरह सतर्क है। एसबीएन अकादमी इंटर कॉलेज में की गई व्यवस्थाएं अन्य केंद्रों के लिए भी एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। इन कड़े और पारदर्शी उपायों से न केवल अनुचित साधनों पर पूरी तरह रोक लगती है, बल्कि परीक्षा प्रणाली में देश के होनहार युवाओं का विश्वास और अधिक दृढ़ होता है।


