उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने नीतिगत फैसलों को शासन की फाइलों से निकलकर सीधे जनता और राज्य के अंतिम छोर तक पहुँचाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के अत्यंत निकट बसे चंपावत जिले के बनबसा क्षेत्र में आयोजित हुई पहली राज्य कैबिनेट बैठक ने पूरे प्रदेश में एक नया प्रशासनिक और राजनीतिक संदेश दिया है। अब तक राज्य के बड़े प्रशासनिक और नीतिगत निर्णय केवल देहरादून या ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण तक ही सीमित रहते थे, परंतु सीमांत क्षेत्र बनबसा में मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों की इस उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य का प्रत्येक नागरिक और हर सीमांत इलाका सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। यह केवल एक प्रशासनिक बैठक नहीं थी, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के सामाजिक, आर्थिक और भौतिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में उठाया गया एक बहुत बड़ा दूरगामी कदम है। इस बैठक में प्रदेश के समग्र विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, नागरिक सुविधाओं, भूमि अधिकारों, पारदर्शी प्रशासन और रोजगार से जुड़े अनेक अभूतपूर्व फैसलों पर मुहर लगाई गई है, जो आने वाले समय में उत्तराखंड की विकास यात्रा का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में बड़ा सुधार: डॉक्टरों के मानदेय का पुननिर्धारण
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना और पर्वतीय व दूरस्थ क्षेत्रों तक योग्य चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना उत्तराखंड राज्य के लिए सदैव एक बड़ी चुनौती रहा है। इस कैबिनेट बैठक में राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कार्यरत रेजिडेंट सीनियर और जूनियर डॉक्टरों के देय वेतन तथा मानदेय के पुननिर्धारण को मंजूरी प्रदान की गई है।
इस महत्वपूर्ण निर्णय से राज्य के स्वास्थ्य ढांचे पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा:
चिकित्सकों का प्रोत्साहन: वेतन और मानदेय का न्यायसंगत पुननिर्धारण डॉक्टरों के मनोबल को बढ़ाएगा, जिससे वे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी दीर्घकालिक सेवाएं देने के लिए प्रेरित होंगे।
पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता: अक्सर देखा जाता है कि मानदेय की अनिश्चितता या असंतोष के कारण चिकित्सक दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में तैनाती से कतराते हैं। इस नीतिगत निर्णय के बाद पर्वतीय जिलों में विशेषज्ञ और युवा डॉक्टरों की तैनाती को बल मिलेगा।
वेक्टर जनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण: इसके साथ ही कैबिनेट ने उत्तराखंड वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को भी अपनी मंजूरी दे दी है। इससे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसे संक्रामक और मौसमी रोगों पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्था को कानूनी और संस्थागत मजबूती मिलेगी।
शिक्षा, कौशल विकास और उच्च शिक्षा नीति में दूरगामी परिवर्तन
युवा शक्ति के सशक्तिकरण और उन्हें रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने के लिए कैबिनेट ने शिक्षा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े नीतिगत संशोधनों को स्वीकृति दी है।
शिक्षा और कौशल विकास के मुख्य निर्णय निम्नलिखित हैं:
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना, 2026: राज्य के युवाओं को पारंपरिक उच्च शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी और व्यावहारिक कौशल से लैस करने के लिए ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना, 2026’ को संचालित करने की मंजूरी दी गई है। इस योजना से युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना नीति में संशोधन: प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के प्रसार और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित नीति एवं मानकों में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इससे राज्य में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थानों के आगमन का मार्ग सुगम होगा, जिससे स्थानीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
प्रशासनिक सरलीकरण, पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार
प्रदेश में सुशासन (गुड गवर्नेंस), पारदर्शिता और समयबद्ध भर्ती प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई प्रशासनिक और संस्थागत ढांचों में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं:
उप कारापाल के पद पर साक्षात्कार समाप्त: भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने और भाई-भतीजावाद या भ्रष्टाचार की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करने के उद्देश्य से उप कारापाल (डिप्टी जेलर) के पद पर साक्षात्कार की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। अब अभ्यर्थियों का चयन केवल लिखित और निष्पक्ष परीक्षा के आधार पर होगा।
जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी पद में बदलाव: जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी पद को लोक सेवा आयोग के दायरे से बाहर करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है, जिससे इस पद की भर्ती प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करके विभागों में खाली पदों को तेजी से भरा जा सकेगा।
सतर्कता अधिष्ठान के ढांचे का पुनर्गठन: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को कड़ाई से लागू करने के लिए सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के सांगठनिक और कार्यपालक ढांचे के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई है। इससे जांच एजेंसियों को अधिक संसाधन और स्वायत्तता मिलेगी।
नरेंद्रनगर में उप निबंधक कार्यालय: टिहरी गढ़वाल जिले के नरेंद्रनगर में नए उप निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय की स्थापना को मंजूरी मिलने से स्थानीय निवासियों को संपत्ति रजिस्ट्री और अन्य कानूनी दस्तावेजों के निष्पादन के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
भूमि अधिकार, बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी का विस्तार
उत्तराखंड के विकास में भूमि अधिकारों का समाधान और हवाई व सड़क कनेक्टिविटी का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। कैबिनेट ने इस दिशा में वर्षों पुराने जटिल मुद्दों का समाधान निकाला है:
वर्ग-3 और वर्ग-4 भूमिधारकों को भूमिधरी अधिकार: राज्य के हजारों पट्टेदारों और लंबे समय से भूमि पर काबिज पात्र कब्जाधारकों को वर्ग-3 एवं वर्ग-4 की भूमि पर भूमिधरी अधिकार प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस दूरगामी फैसले से वर्षों से अनिश्चितता में जी रहे किसानों और गरीब परिवारों को मालिकाना हक मिलेगा, जिससे वे अपनी भूमि का उपयोग कानूनी तौर पर कर सकेंगे और बैंक ऋण या सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का विस्तार: राज्य में हवाई उड़ानों के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए पंतनगर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विस्तार हेतु तराई विकास निगम (टीडीसी) को ₹66.29 करोड़ की अवशेष धनराशि जारी करने की मंजूरी दी गई है। इससे कुमाऊं क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और उद्योग को बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026: राज्य की वित्तीय स्थिति को संतुलित रखने, राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का पारदर्शी व कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए इस संशोधन विधेयक को मंजूरी दी गई है।
पर्यावरण, वन प्रबंधन और कृषि-पशुपालन क्षेत्र में नवाचार
उत्तराखंड जैसा पर्वतीय राज्य जहां का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वनों से आच्छादित है, वहां विकास परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण एक जटिल प्रक्रिया होती है। सरकार ने इस दिशा में व्यावहारिक सुधार किए हैं:
परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) का गठन: वन भूमि हस्तांतरण के मामलों के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण के लिए विशेष परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) के गठन को मंजूरी दी गई है। इससे राज्य में सड़कों, पुलों, बिजली और पेयजल जैसी जनहित की रुकी हुई विकास परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा।
वन विभाग के विभागाध्यक्ष संबंधी व्यवस्था में संशोधन: वन प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों में सुगमता व स्पष्टता लाने के लिए विभागाध्यक्ष संबंधी व्यवस्था में आवश्यक संशोधन किए गए हैं।
संपत्ति लेन-देन में पैन वेरिफिकेशन व्यवस्था: बेनामी संपत्तियों, काले धन के प्रवाह पर रोक लगाने और भूमि खरीद-बिक्री की प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए संपत्ति लेन-देन में पैन वेरिफिकेशन व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने को मंजूरी दी गई है।
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन में महानिदेशक का पद: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभागों में बेहतर प्रशासनिक समन्वय स्थापित करने हेतु महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल) के नए पद के सृजन को स्वीकृति मिली है।
कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर: कुक्कुट (पोल्ट्री) पालन को बढ़ावा देने और किसानों तक सब्सिडी का शत-प्रतिशत लाभ बिना किसी बिचौलिए के पहुँचाने के लिए ‘कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना’ के तहत डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भुगतान करने का निर्णय लिया गया है।
सीमांत क्षेत्र बनबसा में बैठक का सामाजिक और रणनीतिक महत्व
भारत-नेपाल सीमा पर बसे बनबसा में आयोजित इस कैबिनेट बैठक का संदेश केवल प्रशासनिक फैसलों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा सामाजिक, आर्थिक और सामरिक विज़न निहित है। सीमांत क्षेत्रों के निवासी देश की प्रथम रक्षा पंक्ति माने जाते हैं। जब राज्य सरकार स्वयं चलकर इन सुदूर सीमांत इलाकों में पहुँचती है और वहां से पूरे प्रदेश के लिए बड़े फैसले लेती है, तो इससे स्थानीय जनता के भीतर विश्वास और मुख्यधारा से जुड़ाव की भावना सुदृढ़ होती है।
चंपावत को ‘आदर्श जिला’ बनाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है। बनबसा में इस तरह की कैबिनेट बैठक का आयोजन यह दर्शाता है कि राज्य के दूरस्थ जिलों को अब विकास की मुख्यधारा से अलग-थलग नहीं रखा जाएगा। इससे स्थानीय पर्यटन, बुनियादी ढांचे के निर्माण और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को अप्रत्यक्ष रूप से जबरदस्त प्रोत्साहन मिलता है।
बनबसा में आयोजित यह पहली ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक उत्तराखंड के समावेशी और संतुलित विकास की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित होगी। इसमें लिए गए निर्णय – चाहे वे डॉक्टरों के मानदेय में सुधार हों, युवाओं के लिए कौशल संवर्धन योजना हो, पट्टेदारों को भूमिधरी अधिकार देना हो या फिर पंतनगर एयरपोर्ट का विस्तार – हर एक फैसला सीधे तौर पर राज्य के आम नागरिक के जीवन स्तर को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। सीमांत इलाकों से सुशासन और विकास की इस नई लहर ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में उत्तराखंड का विकास केवल शहरों तक सीमित न रहकर राज्य के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।


