उत्तराखंड: प्रवर्तन निदेशालय ने विदेशी मुद्रा के अवैध लेनदेन और हवाला कारोबार की शिकायतों पर बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की देहरादून शाखा ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत उत्तराखंड के देहरादून, ऋषिकेश और देश की राजधानी दिल्ली में स्थित कई ‘फुल-फ्लेज्ड मनी चेंजर्स’ और उनकी सहयोगी संस्थाओं के परिसरों पर छापेमारी की। इस तलाशी अभियान के दौरान करीब ₹88 लाख मूल्य की भारतीय और विदेशी मुद्रा के साथ-साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
आरबीआई के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई मनी चेंजिंग गतिविधियों से संबंधित फेमा और भारतीय रिजर्व बैंक के मास्टर डायरेक्शंस के उल्लंघन के मामले में की गई है। केंद्रीय एजेंसी को गोपनीय सूचना मिली थी कि पर्यटकों की विदेशी मुद्रा बदलने वाली कुछ लाइसेंसधारी संस्थाएं और उनकी फ्रेंचाइजी तय नियमों को ताक पर रखकर काम कर रही हैं। इन पर अनिवार्य केवाईसी मानकों, निर्धारित दस्तावेजी प्रक्रियाओं और बिलिंग नियमों का पालन न करने तथा अनधिकृत विदेशी मुद्रा लेनदेन व हवाला गतिविधियों में संलिप्त होने का संदेह है।
इन प्रमुख फॉरेक्स कंपनियों पर पड़ा छापा जांच एजेंसी ने कार्रवाई के तहत मैसर्स गंगा फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स जेपीजेएन फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स अल्पाइन फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स जय जीन फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड और इनसे संबद्ध इकाइयों (जेपीजेएन जेम्स यूनिट व विंटेज इंडिया) के कार्यालयों एवं उनके संचालकों के आवासीय परिसरों की तलाशी ली।
लाखों की नकदी और डिजिटल साक्ष्य बरामद
तलाशी के दौरान अमेरिकी डॉलर, यूरो, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और थाई बहत समेत विभिन्न देशों की विदेशी मुद्राएं बरामद की गईं, जिनका विनिमय मूल्य लगभग ₹54.58 लाख आंका गया है। इसके अतिरिक्त, ₹33.98 लाख की भारतीय मुद्रा, आपत्तिजनक दस्तावेज, मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क का अंदेशा
ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच और जब्त किए गए साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि देश-विदेश में फैले सहयोगियों के एक नेटवर्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय हवाला लेनदेन संचालित किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान कई व्यावसायिक परिसरों में विदेशी मुद्रा की खरीद से जुड़े क्रय रजिस्टर, ग्राहकवार रिकॉर्ड और एनकैशमेंट प्रमाणपत्र जैसे अनिवार्य दस्तावेज गायब मिले। आरबीआई के नियमों के अनुसार, फ्रेंचाइजी केवल अपने फ्रेंचाइजर की तरफ से ही विदेशी मुद्रा खरीद सकती है और उसका पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होता है।
इसके अलावा, कई कार्यालयों के स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक विदेशी मुद्रा की उपलब्धता में भारी अंतर पाया गया है, जो खातों में हेराफेरी की ओर इशारा करता है। प्रवर्तन निदेशालय अब जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रहा है ताकि नियमों के उल्लंघन के इस पूरे नेटवर्क का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।


