कुमाऊं की आबोहवा में इन दिनों अकादमिक और सांस्कृतिक उल्लास की एक अलग ही बयार बह रही है। अवसर है हल्द्वानी स्थित प्रतिष्ठित राजकीय मेडिकल कॉलेज के दो दिवसीय वार्षिक उत्सव ‘क्रिसेण्डो-2026’ का, जिसका भव्य शुभारंभ रविवार को गरिमामयी उपस्थिति के बीच संपन्न हुआ। इस आयोजन ने न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में अध्ययनरत भावी डॉक्टरों की प्रतिभा को एक नया मंच प्रदान किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान सिर्फ किताबों और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के सांस्कृतिक ताने-बाने से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत ने बतौर मुख्य अतिथि इस समारोह का दीप प्रज्ज्वलन कर विधिवत उद्घाटन किया। उनके साथ कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर डॉक्टर अजय आर्य और अन्य गणमान्य विशेषज्ञों की उपस्थिति ने इस समारोह की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया। यह आयोजन उत्तराखंड के चिकित्सा शिक्षा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है, जहां देश के कोने-कोने से आए युवा डॉक्टर अपनी पढ़ाई के तनाव को पीछे छोड़कर कला, संस्कृति और खेलकूद के मैदान में अपनी ऊर्जा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
चिकित्सा शिक्षा और पाठ्येतर गतिविधियों का अनूठा संतुलन
आज के दौर में जब चिकित्सा शिक्षा का पाठ्यक्रम बेहद जटिल, भारी-भरकम और तनावपूर्ण होता जा रहा है, ऐसे में इस प्रकार के वार्षिक उत्सव विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए संजीवनी का काम करते हैं। मेडिकल की पढ़ाई कोई साधारण सफर नहीं है। रात-दिन जागकर анатоमी की किताबें खंगालना, एनाटॉमी लैब्स में घंटों बिताना और मरीजों की देखरेख के बीच परीक्षा के दबाव को झेलना एक मेडिकल छात्र की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होता है। ऐसे में ‘क्रिसेण्डो-2026’ जैसे आयोजन विद्यार्थियों को उस भारी मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाकर उनके भीतर छिपी रचनात्मकता को बाहर लाने का बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं।
जब एक भावी डॉक्टर मंच पर नृत्य करता है, संगीत की धुनों पर अपनी उंगलियां थिरकाता है या फिर किसी नाटक के जरिए समाज की विसंगतियों पर चोट करता है, तो उसकी संवेदनशीलता कई गुना बढ़ जाती है। एक संवेदनशील डॉक्टर ही एक अच्छा चिकित्सक बन सकता है, क्योंकि मरीज सिर्फ एक शारीरिक बीमारी से नहीं जूझ रहा होता, बल्कि वह मानसिक और भावनात्मक रूप से भी कमजोर होता है। इस तरह के सांस्कृतिक और खेल उत्सव विद्यार्थियों में टीम भावना, नेतृत्व क्षमता औरसहानुभूति जैसे मानवीय गुणों को विकसित करते हैं, जो आगे चलकर उनके चिकित्सीय जीवन में एक बेहतरीन इंसान और डॉक्टर बनने में मदद करते हैं।
मुख्य अतिथि दीपक रावत का प्रेरणादायी संबोधन और भविष्य का विजन
समारोह के दौरान कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को जो सीख दी, वह हर युवा के दिल को छू लेने वाली थी। उन्होंने अपने ओजस्वी भाषण में इस बात पर विशेष जोर दिया कि मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों का दायित्व केवल अस्पतालों के कमरों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनका मुख्य उद्देश्य पूरे समाज को एक स्वस्थ जीवन शैली के प्रति जागरूक करना भी है।
आयुक्त दीपक रावत ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। खानपान की गलत आदतें, मानसिक तनाव, शारीरिक श्रम की कमी और प्रदूषण जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। ऐसे समय में मेडिकल छात्रों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है कि वे न केवल डिग्री हासिल करके डॉक्टर बनें, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति अलख जगाएं। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भूरी-भरी प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के मंच युवाओं की बहुमुखी प्रतिभा को तराशने का काम करते हैं। उनका यह संदेश इस बात का प्रतीक था कि प्रशासन और शिक्षा जगत दोनों ही मिलकर राज्य के युवाओं को एक सकारात्मक दिशा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
संकाय सदस्यों की उपस्थिति और आयोजन की सुदृढ़ व्यवस्था
किसी भी बड़े और ऐतिहासिक आयोजन की सफलता के पीछे एक मजबूत नेतृत्व और कुशल प्रबंधन का हाथ होता है। हल्द्वानी राजकीय मेडिकल कॉलेज के इस वार्षिकोत्सव में कॉलेज प्रशासन की सक्रियता साफ तौर पर देखने को मिली। समारोह के दौरान प्राचार्य प्रोफेसर डॉक्टर अजय आर्य ने आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कॉलेज हमेशा से ही अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कटिबद्ध रहा है।
इस गरिमामयी मंच पर डॉक्टर बसंत जोशी, डॉक्टर एच एस पांडे, डॉक्टर ए के सिन्हा, डॉक्टर अजय विश्वकर्मा, डॉक्टर गौरव जिंदल और राजकीय नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्या डॉक्टर सामिस्तान अहमद जैसी दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि संस्थान का पूरा प्रशासनिक और शैक्षणिक अमला अपने विद्यार्थियों के प्रोत्साहन के लिए हमेशा तत्पर रहता है। इसके साथ ही, संकाय के अन्य वरिष्ठ सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारीगण और बड़ी संख्या में एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने। कार्यक्रम का बहुत ही सुंदर और ऊर्जावान संचालन आयोजन सचिव डॉक्टर गणेश सिंह द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी कुशल वाक्पटुता से पूरे समारोह में एक अलग ही जोश बनाए रखा।
दो दिवसीय महोत्सव: प्रतियोगिताओं और उल्लास का महाकुंभ
यह दो दिवसीय वार्षिक उत्सव पच्चीस और छब्बीस अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न प्रकार की रोमांचक प्रतियोगिताओं का तांता लगा हुआ है। इस महोत्सव को मुख्य रूप से तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है—सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, खेलकूद प्रतियोगिताएं और शैक्षणिक बौद्धिक गतिविधियां।
पहले दिन से ही कॉलेज परिसर का माहौल किसी बड़े उत्सव के मैदान जैसा नजर आ रहा है। एक तरफ जहां सभागार में संगीत, नृत्य, एकांकी नाटक और फैशन शो जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दर्शकों का मन मोह रही हैं, वहीं दूसरी तरफ खेल के मैदान में क्रिकेट, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, एथलेटिक्स और शतरंज जैसी स्पर्धाओं में कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। इसके अलावा, क्विज प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता और वैज्ञानिक मॉडल प्रदर्शन जैसी शैक्षणिक गतिविधियां विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता और तार्किक सोच को परखने का काम कर रही हैं। इन तमाम प्रतियोगिताओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर विद्यार्थी को अपनी रुचि के अनुसार अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा अवसर मिले।
उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा का बढ़ता दायरा और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज की भूमिका
हल्द्वानी राजकीय मेडिकल कॉलेज आज के समय में उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा का सबसे बड़ा गढ़ बन चुका है। सुदूर पहाड़ी इलाकों से आने वाले गरीब से गरीब मरीजों को भी जब इस संस्थान से बेहतर इलाज मिलता है, तो इसके पीछे इन्हीं मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले और प्रशिक्षण लेने वाले डॉक्टरों की मेहनत होती है।
समय के साथ इस संस्थान ने अपनी साख को लगातार मजबूत किया है। यहां से पढ़कर निकलने वाले डॉक्टर आज देश और दुनिया के बड़े-बड़े अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ‘क्रिसेण्डो-2026’ जैसे आयोजन इस बात को और अधिक पुख्ता करते हैं कि यह संस्थान केवल डिग्री बांटने वाली मशीन नहीं है, बल्कि यह ऐसे संस्कारवान और ऊर्जावान चिकित्सक तैयार कर रहा है जो भविष्य में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनेंगे। इस प्रकार के सांस्कृतिक और खेल उत्सव विद्यार्थियों के जीवन में एक ऐसा सकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं जो वे अपने पूरे पेशेवर जीवन में याद रखते हैं।
उम्मीद और उत्साह से भरा भविष्य
दो दिनों तक चलने वाले इस भव्य वार्षिकोत्सव का समापन भले ही छब्बीस अक्टूबर को हो जाएगा, लेकिन इसकी यादें और इसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों के दिलों-दिमाग में लंबे समय तक ताजा रहेगा। आयुक्त दीपक रावत के मार्गदर्शन और कॉलेज प्रशासन के सहयोग से आयोजित यह महोत्सव इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब शिक्षा, अनुशासन और संस्कृति का त्रिवेणी संगम होता है, तो एक स्वर्णिम भविष्य की नींव रखती है। हल्द्वानी राजकीय मेडिकल कॉलेज का ‘क्रिसेण्डो-2026’ केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह युवा ऊर्जा, सृजनात्मकता और चिकित्सा सेवा के प्रति अटूट समर्पण का एक भव्य उत्सव है, जो आने वाले समय में नए कीर्तिमान स्थापित करता रहेगा।


