कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने लॉन्च किया ‘आयुष सेतु पोर्टल’, योग और आयुर्वेद की योजनाओं से सीधे जुड़ेंगे नागरिक: देवभूमि उत्तराखंड की पावन धारा सदियों से योग, आयुर्वेद, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा की साधना स्थली रही है। हिमालय की गोद में बसी इस भूमि की जड़ी-बूटियों, पारंपरिक ज्ञान और स्वास्थ्य रक्षण की समृद्ध परंपराओं को अब आधुनिक तकनीक का साथ मिल गया है। राज्य सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को सर्वसुलभ बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और युगांतरकारी कदम उठाया है। आयुष सेतु पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ न केवल उत्तराखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे वैलनेस उद्योग के लिए एक नए युग का सूत्रपात करता है।
देहरादून स्थित आयुर्वेद एवं यूनानी सेवाएं निदेशालय के प्रांगण में आयोजित एक भव्य और गरिमामय समारोह के दौरान राज्य के आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री श्री मदन कौशिक द्वारा इस विशेष डिजिटल मंच का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस ऐतिहासिक पहल के साथ ही उत्तराखंड का आयुष विभाग औपचारिक रूप से पूरी तरह से डिजिटल युग में कदम रख चुका है।
इस अवसर पर राज्य के प्रशासनिक तंत्र और चिकित्सा जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की महत्ता को और बढ़ा दिया। कार्यक्रम में आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग की सचिव श्रीमती रंजना राजगुरु बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहीं। उनके साथ ही आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं निदेशालय के उच्च अधिकारी, होम्योपैथिक सेवाओं के निदेशक, राज्य औषधि अनुज्ञापन अधिकारी डॉक्टर मिथिलेश, भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड के अध्यक्ष डॉक्टर जे एन नौटियाल तथा शासन और प्रशासन के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी इस महत्वपूर्ण क्षण का गवाह बने।
सभी उपस्थित अतिथियों और विशेषज्ञों ने एक स्वर में इस बात को रेखांकित किया कि यह पोर्टल केवल एक वेबसाइट मात्र नहीं है, बल्कि यह राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों तक आयुष सेवाओं की पहुंच को आसान बनाने, उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता लाने का एक सशक्त और आधुनिक माध्यम साबित होगा।
पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक डिजिटल क्रांति का संगम
उत्तराखंड सरकार पिछले कुछ वर्षों से राज्य को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख स्वास्थ्य और वैलनेस केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस दिशा में सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण नीतियां लागू की गई हैं, जिनमें योग नीति 2025, आयुष नीति 2023 और राज्य की विभिन्न वैलनेस नीतियां शामिल हैं। इन सभी नीतियों का मूल उद्देश्य राज्य की प्राकृतिक संपदा, योग परंपरा और आयुर्वेदिक ज्ञान का उपयोग करके राज्य के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना और साथ ही साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
हालांकि, किसी भी दूरगामी नीति की सफलता उसके प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन पर निर्भर करती है। अतीत में अक्सर यह देखा गया है कि विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने, नए संस्थानों के पंजीकरण, सब्सिडी या अनुदान प्राप्त करने के लिए आवेदकों को विभिन्न सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस जटिल प्रक्रिया के कारण न केवल समय और धन का अपव्यय होता था, बल्कि कई बार वास्तविक लाभार्थी योजनाओं का पूरा लाभ उठाने से वंचित रह जाते थे।
आयुष सेतु पोर्टल का निर्माण इसी प्रशासनिक अंतर को समाप्त करने और व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से किया गया है। यह मंच सरकार की विभिन्न नीतियों को एक ही छत के नीचे लाकर खड़ा करता है। अब योग नीति, आयुष नीति और वैलनेस नीतियों के तहत दिए जाने वाले सभी प्रकार के प्रोत्साहन, वित्तीय अनुदान, सब्सिडी और पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रियाएं इसी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित होंगी।
आयुष सेतु पोर्टल की प्रमुख सुविधाएं और विशेषताएं
यह नया डिजिटल मंच आम नागरिकों, आयुष चिकित्सकों, योग प्रशिक्षकों, उद्यमियों और वैलनेस सेंटर संचालकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अत्यंत सरल और व्यावहारिक तरीके से तैयार किया गया है।
इस पोर्टल पर मिलने वाली मुख्य सुविधाओं को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
आसान पंजीकरण और प्रामाणिक प्रमाणीकरण: आयुष क्षेत्र से जुड़े नए और पुराने सभी संस्थानों, आयुर्वेदिक एवं यूनानी क्लीनिकों, होम्योपैथिक केंद्रों, वैलनेस सेंटरों और योग आश्रमों के लिए अब इस डिजिटल मंच पर पंजीकरण कराना अत्यंत सरल हो गया है। आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से कागजरहित बनाया गया है। आवेदक अपने दस्तावेज सीधे अपलोड कर सकते हैं और विभागीय जांच के उपरांत उन्हें ऑनलाइन ही प्रामाणिक प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा। इससे जाली या अप्रमाणिक सेंटरों पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी।
योग नीति के तहत प्रोत्साहन और अनुदान का पारदर्शी वितरण: राज्य की योग नीति 2025 के अंतर्गत योग केंद्रों की स्थापना, योग प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण और इस क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों के लिए विभिन्न प्रकार की वित्तीय प्रोत्साहन राशियों, प्रतिपूर्ति और सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। आयुष सेतु पोर्टल के माध्यम से पात्र व्यक्ति या संस्थाएं सीधे अपने दावे जमा कर सकती हैं। अनुदान की राशि बिना किसी मध्यस्थ के सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाएगी, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
वैलनेस सेंटरों के लिए गुणवत्ता आधारित स्टार रेटिंग प्रणाली: उत्तराखंड में बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक स्वास्थ्य लाभ और मानसिक शांति के लिए आते हैं। ऐसे में राज्य में संचालित वैलनेस सेंटरों की गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इस पोर्टल की सबसे अनोखी और सराहनीय विशेषता वैलनेस सेंटरों के लिए शुरू की गई स्टार रेटिंग प्रणाली है।
इस व्यवस्था के तहत राज्य के सभी पंजीकृत वैलनेस सेंटरों का उनकी अवसंरचना, वहां उपलब्ध सुविधाओं, विशेषज्ञों की उपलब्धता, स्वच्छता और सेवाओं के स्तर के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा और उन्हें स्टार रेटिंग प्रदान की जाएगी। इस प्रणाली से दोहरे फायदे होंगे। पहला, सेवाएं लेने वाले नागरिकों और पर्यटकों को एक पारदर्शी और विश्वसनीय विकल्प चुनने में आसानी होगी। दूसरा, वैलनेस सेंटरों के बीच अपनी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा होगी।
समयबद्ध ऑनलाइन आवेदन और निगरानी व्यवस्था: इस डिजिटल मंच पर हर प्रकार की सेवा और आवेदन के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की गई है। आवेदक अपने आवेदन की वर्तमान स्थिति को किसी भी समय अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए देख सकते हैं। यदि किसी आवेदन में कोई कमी पाई जाती है या उसे स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत आवेदक को डिजिटल माध्यम से मिल जाएगी। इससे पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय होगी।
उत्तराखंड में स्वास्थ्य पर्यटन और स्वरोजगार को मिलेगा नया बल
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पहचान में पर्यटन का हमेशा से बहुत बड़ा योगदान रहा है। लेकिन अब समय के साथ पर्यटन के स्वरूप में बदलाव आ रहा है। आज दुनिया भर से लोग केवल प्राकृतिक सुंदरता देखने ही नहीं, बल्कि तनावमुक्त जीवन शैली, योग अभ्यास, आयुर्वेद उपचार और कायाकल्प के लिए हिमालय की शरण में आ रहे हैं। इस बदलते परिदृश्य में उत्तराखंड के पास वैलनेस टूरिज्म का सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र बनने की असीम संभावनाएं मौजूद हैं।
आयुष सेतु पोर्टल इस दिशा में उत्प्रेरक का काम करेगा। जब राज्य में वैलनेस सेंटरों, योग संस्थानों और आयुष औषधालयों का पंजीकरण सरल और पारदर्शी होगा, तो इस क्षेत्र में निजी निवेश को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। नए-नए वेलनेस रिसॉर्ट्स, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र और योग नीड़ स्थापित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर प्राप्त होंगे।
इसके अलावा, राज्य के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में जड़ी-बूटी की खेती करने वाले किसानों, पारंपरिक वैद्यों और स्थानीय योग साधकों को भी इस डिजिटल क्रांति से सीधा लाभ पहुंचेगा। जब आयुष उद्योग का विस्तार होगा, तो स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली औषधीय वनस्पतियों की मांग बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
डिजिटल उत्तराखंड की दिशा में एक अनुकरणीय कदम
आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री श्री मदन कौशिक ने उद्घाटन के दौरान अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आयुष विभाग द्वारा उठाया गया यह कदम राज्य के अन्य विभागों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण पेश करता है।
विभाग की सचिव श्रीमती रंजना राजगुरु ने भी स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि नीतियों का लाभ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। आयुष सेतु पोर्टल इसी सोच का परिणाम है, जहां तकनीक का उपयोग आम जनता के जीवन को सुगम और स्वस्थ बनाने के लिए किया जा रहा है।
पोर्टल का उपयोग करने और जुड़ने की सरल प्रक्रिया
राज्य सरकार और आयुष विभाग ने प्रदेश के सभी नागरिकों, आयुष चिकित्सकों, योग प्रेमियों और वैलनेस उद्यमियों से अपील की है कि वे इस नई व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
इस डिजिटल मंच से जुड़ना अत्यंत आसान है। कोई भी इच्छुक व्यक्ति या संस्था अपने कंप्यूटर या मोबाइल ब्राउज़र के माध्यम से आधिकारिक वेब पते पर जाकर पोर्टल का उपयोग कर सकती है। इसके लिए वेब पता पोर्टल पर उपलब्ध है, जहां जाकर उपयोगकर्ता अपना नया खाता बना सकते हैं, उपलब्ध योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अपनी आवश्यकता अनुसार पंजीकरण या अनुदान के लिए आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं।
आयुष सेतु पोर्टल उत्तराखंड में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का एक अद्भुत और सफल संगम है। यह न केवल प्रशासनिक कामकाज को सुव्यवस्थित बनाएगा, बल्कि राज्य को स्वास्थ्य, योग और वैलनेस के क्षेत्र में एक नई वैश्विक पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।


