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50 पुलिसकर्मियों की फौज, फॉरेंसिक-डॉग स्क्वायड और खुद ‘कप्तान’: जानिए कैसे एसएसपी मंजूनाथ टी.सी. ने सुलझाई हल्द्वानी डकैती की गुत्थी

50 पुलिसकर्मियों की फौज, फॉरेंसिक-डॉग स्क्वायड और खुद ‘कप्तान’ जब खुद डेडिकेशन के साथ लगे तो फिर ऐसा कौन सा केस होगा जो अनसुलझा रह जाए । अभी हाल ही में उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले कोतवाली हल्द्वानी क्षेत्र में हाल ही में हुई दुस्साहसिक डकैती की वारदात ने पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था और जनसुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस बेहद संवेदनशील और संगीन अपराध के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता, आम जनता के बीच फैले भय और घटना की प्रकृति को देखते हुए नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। पुलिस कप्तान के कड़े रुख और त्वरित मार्गदर्शन के चलते नैनीताल पुलिस को इस मामले में एक और बेहद बड़ी और निर्णायक सफलता हाथ लगी है।

पुलिस की ओर से चलाई गई व्यापक जांच और अंतरराज्यीय छापेमारी अभियान के तहत गोरापड़ाव में हुई हथियारों के बल पर लाखों की डकैती में शामिल अन्य 4 नकाबपोश आरोपियों को भी पुलिस की विशेष टीम ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए अपराधियों के कब्जे से चार अवैध तमंचे, सात जिंदा कारतूस, वारदात के दौरान लूटी गई नकदी का हिस्सा और घटना में इस्तेमाल की गई दो चारपहिया गाड़ियां भी सफलतापूर्वक बरामद कर ली गई हैं। पुलिस द्वारा की गई इस त्वरित और ठोस कार्रवाई से न केवल इस सनसनीखेज वारदात का पूरी तरह से पर्दाफाश हो गया है, बल्कि इलाके के निवासियों और व्यापारी वर्ग के बीच सुरक्षा का विश्वास भी बहाल हुआ है।

वारदात का पूरा घटनाक्रम: गोरापड़ाव में हथियारबंद बदमाशों का तांडव
घटनाक्रम की शुरुआत 19 अगस्त 2026 की शाम को हुई, जब पुलिस आपातकालीन सेवा नंबर 112 के माध्यम से कोतवाली हल्द्वानी पुलिस को एक बेहद चौंकाने वाली सूचना प्राप्त हुई। सूचना में बताया गया कि हल्द्वानी कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत गोरापड़ाव इलाके में करीब 10 से 12 हथियारबंद बदमाशों ने एक बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान पर धावा बोलकर भारी लूटपाट की घटना को अंजाम दिया है। इतने सारे नकाबपोश और आधुनिक हथियारों से लैस अपराधियों के एक साथ हमला बोलने की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया और कोतवाली हल्द्वानी से भारी पुलिस बल को तत्काल मौके पर गोरापड़ाव के लिए रवाना किया गया। पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची तो वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण था। इसके बाद पीड़ित कारोबारी और मामले के वादी नारायण दास, जो अम्बा बिहार तीनपानी हल्द्वानी के निवासी हैं, उन्होंने पुलिस को लिखित तहरीर सौंपी।
पीड़ित नारायण दास ने अपनी शिकायत में बताया कि 19 अगस्त को तीनपानी गोरापड़ाव स्थित उनके कार्यालय और गैरेज पर, जो एक ऑटोमोबाइल शोरूम के ठीक पीछे स्थित है, करीब 10 अज्ञात बंदूकधारी बदमाशों ने अचानक हमला कर दिया। सभी बदमाशों ने अपने चेहरे ढके हुए थे और उनके हाथों में अवैध असलहे थे। बदमाशों ने कार्यालय में घुसते ही वहां मौजूद पीड़ित और उनके परिचितों को हथियारों के बल पर बंधक बना लिया और जान से मारने की धमकी दी।

खौफ का माहौल बनाकर बदमाशों ने वहां रखे लगभग 8 लाख रुपये की नकदी, 12 कीमती मोबाइल फोन और पीड़ितों के शरीर से सोने की 3 चेन तथा सोने की अंगूठियां लूट लीं। लूट की इस बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। पीड़ित की तहरीर के आधार पर कोतवाली हल्द्वानी में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में 10 अज्ञात बंदूकधारी अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। मामले की गहराई से जांच और विवेचना की जिम्मेदारी प्रभारी निरीक्षक विजय मेहता को सौंपी गई।

एसएसपी का सख्त रुख: 50 पुलिसकर्मियों की विशेष टीम और फोरेंसिक जांच
हल्द्वानी जैसे शांत और व्यावसायिक शहर में दिनदहाड़े या शाम के समय इतनी बड़ी डकैती की घटना होना पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था। इस सनसनीखेज डकैती का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने साफ कर दिया कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जल्द से जल्द पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

आरोपियों की पहचान करने और उनकी जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए एसएसपी ने तुरंत प्रभाव से लगभग 50 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलाकर एक विशेष कार्यबल का गठन किया। इस विशेष टीम को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं ताकि जांच का कोई भी पहलू छूट न पाए।

गठित टीम की कमान वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों के हाथों में सौंपी गई। इस टीम में पुलिस अधीक्षक अपराध व यातायात नैनीताल डॉ. जगदीश चंद्र, पुलिस अधीक्षक हल्द्वानी मनोज कत्याल, अपर पुलिस अधीक्षक व क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी अमित कुमार सैनी के साथ-साथ विभिन्न थानों के प्रभारी निरीक्षक, विशेष अभियान समूह (एसओजी), साइबर सेल और अपराध विशेषज्ञों को शामिल किया गया।

जांच को वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए घटनास्थल पर बम निरोधक दस्ता (बीडीएस), डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक सीन ऑफ क्राइम विशेषज्ञों को भी लगाया गया। इन टीमों ने घटनास्थल का अलग-अलग कोणों से सूक्ष्मता से निरीक्षण किया और अपराधियों के फिंगरप्रिंट तथा अन्य भौतिक साक्ष्य जुटाए।

खुद एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने व्यक्तिगत रूप से घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित पक्ष और घटना के समय वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों से आमने-सामने बातचीत की और पूरी घटना की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने अपने मातहत अधिकारियों और गठित पुलिस टीमों को अलग-अलग कार्य सौंपते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए कि किसी भी हाल में अपराधियों का सुराग लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

सीसीटीवी खंगाले और मिला पहला सुराग: 2 आरोपी पहले ही भेजे जा चुके हैं जेल
विशेष टीमों ने मामले की सुरागरसी और पतारसी का काम तेजी से शुरू किया। विवेचना अधिकारी और पुलिस टीम ने वादी तथा प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के विस्तृत बयान दर्ज किए। इसके साथ ही घटनास्थल और उसके आसपास के रास्तों पर लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। साइबर टीम और सर्विलांस सेल की मदद से घटनास्थल के आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों और तकनीकी डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया गया।

तकनीकी साक्ष्यों और धरातलीय सूचना तंत्र के तालमेल से पुलिस को घटना में शामिल कुछ संदिग्धों के बारे में अहम जानकारी मिली। कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस ने 21 अगस्त 2026 को घटना में शामिल 2 मुख्य अभियुक्तों—वंशप्रीत सिंह उर्फ पन्नू और रखवीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उनसे हुई प्रारंभिक पूछताछ और बरामदगी के आधार पर उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया था।

हालाँकि, वारदात में शामिल अन्य आरोपी अभी भी फरार थे और पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे। फरार चल रहे इन अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए नैनीताल पुलिस की कई टीमों को उत्तराखंड से बाहर अन्य पड़ोसी राज्यों में लगातार दबिश देने के लिए भेजा गया।

दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड से पकड़े गए 4 नए नकाबपोश बदमाश
अन्य राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही पुलिस टीमों, सर्विलांस के आंकड़ों और मुखबिरों से मिली सटीक गुप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस को बड़ी सफलता मिली। पुलिस टीम ने 22 और 23 अगस्त 2026 को विशेष घेराबंदी करते हुए घटना में शामिल 4 और खतरनाक अपराधियों को अलग-अलग जगहों से धर दबोचा।

पकड़े गए आरोपियों का विवरण इस प्रकार है:
पहला आरोपी यश सिडाना, जो कि उधम सिंह नगर जिले के किच्छा थाना क्षेत्र अंतर्गत बैंक ऑफ बड़ौदा के पास का रहने वाला है और उसकी उम्र 24 वर्ष है। इसे पुलिस टीम ने 23 अगस्त को हल्द्वानी क्षेत्र से ही गिरफ्तार किया।
दूसरा आरोपी अमनदीप सिंह, जो कि नई दिल्ली के थाना जैतपुर क्षेत्र स्थित जैतपुर गांव का निवासी है और उसकी उम्र 21 वर्ष है। इसे पुलिस टीम ने 22 अगस्त को दिल्ली के डीएनडी फ्लाई ओवर के पास स्थित जैतपुर मोड़ से घेराबंदी करके गिरफ्तार किया।
तीसरा आरोपी शिवराज सिंह, जो कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के थाना अमरिया अंतर्गत ग्राम सदरपुर का रहने वाला है और उसकी उम्र 21 वर्ष है। इसे भी पुलिस टीम ने 22 अगस्त को दिल्ली के पास डीएनडी फ्लाई ओवर क्षेत्र से ही अमनदीप के साथ दबोचा।
चौथा आरोपी अफजल मलिक, जो कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के अमरिया थाना क्षेत्र के बक्सपुर का निवासी है और उसकी उम्र भी 21 वर्ष है। इसे पुलिस टीम ने 23 अगस्त को किच्छा क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता पाई।

भारी मात्रा में अवैध हथियार, नकदी और गाड़ियां बरामद
गिरफ्तार किए गए इन चारों शातिर अपराधियों के कब्जे से पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल किए गए घातक हथियार, लूटी गई धनराशि और गाड़ियां बरामद की हैं।

आरोपी यश सिडाना के कब्जे से पुलिस ने घटना में प्रयुक्त एक क्रेटा कार (पंजीकरण संख्या यूके 06 बीई 9091) बरामद की। इसके साथ ही उसके पास से एक अवैध तमंचा 315 बोर और दो जिंदा कारतूस 315 बोर बरामद हुए।

आरोपी अमनदीप सिंह के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई एक स्कार्पियो कार (पंजीकरण संख्या डीएल 1 सीए 1984) मिली। इसके साथ ही एक अवैध तमंचा 315 बोर और दो जिंदा कारतूस 315 बोर बरामद किए गए।

तीसरे आरोपी शिवराज सिंह के कब्जे से पुलिस ने एक अवैध तमंचा 315 बोर और एक जिंदा कारतूस 315 बोर बरामद किया।
चौथे आरोपी अफजल मलिक के पास से पुलिस को लूटी गई धनराशि में से 18,000 रुपये नकद बरामद हुए। इसके अलावा उसके कब्जे से एक 12 बोर का अवैध तमंचा और दो जिंदा कारतूस 12 बोर भी मिले।

इन सभी आरोपियों से जब पुलिस कस्टडी में गहन पूछताछ की गई, तो उन्होंने गोरापड़ाव में हुई डकैती की वारदात में अपनी सीधी संलिप्तता स्वीकार कर ली। आरोपियों के पास से अवैध हथियार और लूटी गई संपत्ति बरामद होने के बाद पुलिस ने दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(2) और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 की बढ़ोतरी कर दी है।

आपराधिक इतिहास और पुलिस टीम को नकद पुरस्कार
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से यश सिडाना का पूर्व से भी आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ उधम सिंह नगर के किच्छा थाने में वर्ष 2022 में मारपीट, रास्ता रोकने और धमकी देने संबंधी धाराओं में मुकदमा दर्ज है। पुलिस प्रशासन अब अन्य गिरफ्तार अभियुक्तों का भी आपराधिक रिकॉर्ड खंगाल रहा है और यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या ये आरोपी अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य हैं या अन्य राज्यों में भी किसी वारदात में शामिल रहे हैं।

हल्द्वानी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में हुई इतनी बड़ी और खतरनाक डकैती की घटना का महज कुछ ही दिनों के भीतर सफल पर्दाफाश करने, अंतरराज्यीय अपराधियों को गिरफ्तार करने और वारदात में इस्तेमाल हथियार तथा गाड़ियां बरामद करने पर पुलिस महकमे की पीठ थपथपाई जा रही है। नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने पूरी पुलिस टीम, एसओजी, साइबर सेल और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के इस शानदार व तालमेल भरे कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने और उनके उत्कृष्ट कार्य के उत्साहवर्धन हेतु एसएसपी नैनीताल ने पूरी पुलिस टीम को 2,500 रुपये के नकद इनाम से पुरस्कृत करने की घोषणा की है।

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