
अजय सिंह
शिवभक्तों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। इस साल की पावन कैलाश मानसरोवर यात्रा आगामी 5 जुलाई से टनकपुर के रास्ते शुरू होने जा रही है। आस्था के इस सफर को खास बनाने के लिए खुद सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी टनकपुर टीआरसी से पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। उत्तराखंड प्रशासन इस यात्रा को बेहद सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह कमर कस चुका है। हाल ही में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने अफसरों के साथ बैठक कर सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए हैं।
कैसा रहेगा यात्रा का सफरनामा?
अगर आप इस यात्रा के स्वरूप को समझना चाहते हैं, तो इस बार का गणित कुछ ऐसा है:
10 जत्थे, 500 श्रद्धालु: इस साल कुल 10 दल मानसरोवर के लिए रवाना होंगे और हर दल में करीब 50 यात्री शामिल होंगे।
18 दिनों का रोमांच: टनकपुर से शुरू होकर यह यात्रा कुल 18 दिनों में पूरी होगी।
दिल्ली से चीन तक का सफर: श्रद्धालुओं की तैयारी 30 जून को दिल्ली से ही शुरू हो जाएगी, जहां उनका मेडिकल और वीजा वेरिफिकेशन होगा। इसके बाद 4 जुलाई को टनकपुर पहुंचने के बाद, 5 जुलाई से उनकी असली चढ़ाई शुरू होगी जो धारचूला, गुंजी और नाभीढांग से होते हुए लिपुलेख दर्रे के रास्ते चीन की सीमा में दाखिल होगी।
एक सफल परंपरा की अगली कड़ी
आपको बता दें कि टनकपुर से इस यात्रा को शुरू करने की पहल पिछले साल यानी 2025 में खुद मुख्यमंत्री धामी ने की थी। पिछले साल का अनुभव बेहद शानदार रहा था, जहाँ पंजीकरण कराने वाले 250 लोगों में से 237 श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया था। इस बार भी प्रशासन को उम्मीद है कि यात्रा पिछले साल से भी अधिक सुव्यवस्थित और भव्य होगी।