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जमीनी हकीकत परखने तड़के सड़कों पर उतरे लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय और उनकी टीम, 18 अक्टूबर तक राज्य की सड़कें गड्ढामुक्त करने की समयसीमा तय

जमीनी हकीकत परखने तड़के सड़कों पर उतरे लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय और उनकी टीम का यह कदम सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। उत्तराखंड में मानसून के बीतने के बाद अक्सर सड़कों की बदहाली और जगह-जगह उभरे गड्ढे आम जनता के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन जाते हैं। इस बार प्रदेश सरकार ने त्योहारों की आहट और पर्यटन के मुख्य मौसम को देखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा जारी सख्त निर्देशों के बाद शासन और प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ चुका है। सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के दावों की जमीनी हकीकत जांचने के लिए लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारी अब कागजी रिपोर्टों से इतर खुद सड़कों पर उतरकर पड़ताल कर रहे हैं। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य 18 अक्टूबर की तय समयसीमा तक प्रदेश के हर प्रमुख और संपर्क मार्ग को पूरी तरह गड्ढामुक्त बनाना है, ताकि आम यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को किसी भी प्रकार की दुश्वारी का सामना न करना पड़े।

तड़के छह बजे से निरीक्षण अभियान, शहर के प्रमुख मार्गों का जायजा
लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने प्रशासनिक अमले और वरिष्ठ इंजीनियरों की टीम के साथ तड़के सुबह छह बजे ही राजधानी देहरादून की सड़कों का स्थलीय निरीक्षण शुरू कर दिया। आमतौर पर सरकारी बैठकों और कागजी समीक्षाओं तक सीमित रहने वाले ढांचे में इस तरह की अचानक और सुबह-सुबह की गई जमीनी पड़ताल से विभागीय तंत्र में हड़कंप मच गया।

निरीक्षण दल ने शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्गों का रुख किया। इस अभियान की शुरुआत कालिदास रोड मोड़ से हुई। इसके बाद अधिकारियों का काफिला कैनाल रोड, नागल, प्रसिद्ध पर्यटन मार्ग मसूरी डायवर्जन, सहस्रधारा तिराहा, लाडपुर, जोगीवाला, रिस्पना पुल, ऐतिहासिक घंटाघर, व्यस्त चकराता रोड और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गढ़ी कैंट क्षेत्रों तक पहुंचा। इन सभी स्थानों पर सड़कों की सतह, नालियों की सफाई, पानी की निकासी और हाल ही में भरे गए गड्ढों की मजबूती को बारीकी से देखा गया।

18 अक्टूबर की अंतिम सीमा और गुणवत्ता पर कड़ा रुख
सरकार ने साफ कर दिया है कि 18 अक्टूबर तक राज्य भर की सड़कों को हर हाल में चलने योग्य और सुरक्षित बनाना होगा। इस समयसीमा को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान सचिव ने स्पष्ट किया कि समयसीमा का पालन जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण कार्य की गुणवत्ता भी है।

अक्सर यह देखा जाता है कि बारिश के बाद आनन-फानन में भरे जाने वाले गड्ढे पहली ही हल्की बारिश में फिर से उखड़ जाते हैं। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी होती है, बल्कि वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि पैच वर्क और डामरीकरण के दौरान प्रयुक्त सामग्री के मानकों से कोई समझौता न किया जाए। आधुनिक तकनीकों और टिकाऊ मिश्रण का उपयोग किया जाए, ताकि सड़कें लंबे समय तक दुरुस्त रह सकें।

क्यों आवश्यक है सड़कों का तत्काल सुधारीकरण?
उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और आर्थिक ताना-बाना बहुत हद तक सड़क परिवहन पर निर्भर है। राज्य में रेल और हवाई सेवा का दायरा सीमित होने के कारण सड़कें ही जीवन रेखा का काम करती हैं। वर्तमान में सड़कों की मरम्मत के कई व्यावहारिक और आर्थिक कारण हैं:
1. आगामी त्योहार और धार्मिक यात्राएं
आगामी दिनों में नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार हैं। इस दौरान बाजारों में भीड़ बढ़ती है और लोग अपनों के घर आते-जाते हैं। टूटी सड़कें न केवल ट्रैफिक जाम का कारण बनती हैं, बल्कि दुर्घटनाओं को भी न्योता देती हैं।
2. पर्यटन उद्योग और राज्य की अर्थव्यवस्था
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार पर्यटन है। मसूरी, सहस्रधारा, ऋषिकेश और चारधाम मार्ग पर रोजाना हजारों वाहन दौड़ते हैं। खराब सड़कें पर्यटकों के अनुभव को खराब करती हैं, जिससे राज्य की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। चिकनी और सुगम सड़कें पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा देती हैं।
3. सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं पर रोक
सड़कों पर बने गहरे गड्ढे विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित होते हैं। रात के समय या कम रोशनी में गड्ढे दिखाई न देने के कारण अक्सर गंभीर हादसे होते हैं। गड्ढामुक्त अभियान से दुर्घटनाओं की दर में सीधी कमी आएगी।
4. वाहनों का रखरखाव और ईंधन की बचत
खराब सड़कों पर चलने से वाहनों के पुर्जे जल्दी खराब होते हैं, टायर घिसते हैं और ईंधन की खपत काफी बढ़ जाती है। सड़कों के सुधरने से आम नागरिक के जेब पर पड़ने वाला यह अतिरिक्त बोझ कम होगा।

विभागीय समन्वय और उत्तरदायित्व तय करने की जरूरत
सड़क निर्माण और रखरखाव में सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की कमी रही है। अक्सर देखा जाता है कि लोक निर्माण विभाग नई सड़क बनाता है और कुछ ही दिनों बाद पेयजल निगम, बिजली विभाग या टेलीकॉम कंपनियां केबल और पाइपलाइन बिछाने के लिए उसे खोद देती हैं।

इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए निरीक्षण के दौरान यह बात भी सामने आई कि सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर समन्वय बनाना होगा। यदि किसी जगह खुदाई की अत्यंत आवश्यकता है, तो काम पूरा होते ही सड़क की मूल स्थिति में बहाली की जिम्मेदारी भी तुरंत पूरी की जानी चाहिए।
निरीक्षण दल में लोक निर्माण विभाग के अपर सचिव विनीत कुमार, मुख्य अभियंता दयानंद, अधीक्षण अभियंता ओमपाल सिंह, अधीक्षण अभियंता अरुण पांडेय, अधिशासी अभियंता बी.एन. द्विवेदी समेत कई वरिष्ठ इंजीनियर शामिल रहे। वरिष्ठ अधिकारियों की इस मौजूदगी ने यह संदेश दिया है कि कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

भविष्य की चुनौतियां और दीर्घकालिक समाधान
केवल अस्थायी तौर पर गड्ढे भर देना ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में सड़कों के टिकाऊपन के लिए कुछ ठोस दीर्घकालिक कदम उठाने की अत्यंत आवश्यकता है:

उचित जल निकासी व्यवस्था: पर्वतीय और मैदानी इलाकों में सड़कों के समय से पहले टूटने का सबसे बड़ा कारण जलजमाव है। सड़कों के किनारे मजबूत और साफ नालियों का होना अनिवार्य है।

गुणवत्ता नियंत्रण और जीपीएस निगरानी: ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की नियमित जांच के लिए स्वतंत्र लैब टेस्ट और जीपीएस आधारित ट्रैकिंग का उपयोग किया जाना चाहिए।

समयबद्ध रखरखाव नीति: मानसून से पहले और मानसून के तुरंत बाद नियमित रखरखाव का एक तय कैलेंडर होना चाहिए, जिससे आपात स्थिति की नौबत ही न आए।

जनता की भागीदारी और शिकायत निवारण: आम नागरिकों के लिए एक पारदर्शी शिकायत पोर्टल या मोबाइल ऐप होना चाहिए, जहां वे अपने आसपास की खराब सड़कों की तस्वीरें अपलोड कर सकें और उस पर तय समय के अंदर कार्रवाई हो।

शासन स्तर पर सचिव पंकज कुमार पांडेय और उनकी टीम द्वारा तड़के उठकर सड़कों पर उतरना यह दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर कितनी गंभीर है। कागजी दावों से अलग हटकर जब उच्च अधिकारी खुद धरातल पर निरीक्षण करते हैं, तो निचले स्तर के कर्मचारियों और ठेकेदारों में जवाबदेही का भाव पैदा होता है। 18 अक्टूबर तक प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त करने का यह अभियान यदि अपनी पूर्ण गुणवत्ता के साथ पूरा होता है, तो इससे न केवल उत्तराखंड के आम नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य में आने वाले लाखों पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए भी यात्रा सुगम, सुरक्षित और आनंददायक बन सकेगी।

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