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देहरादून में ‘सेवा संकल्प’: सीएम धामी ने रायपुर से दिया सुशासन का मंत्र, ‘बिना चक्कर काटे समस्याओं का होगा तुरंत समाधान’

देहरादून के रायपुर क्षेत्र में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार और प्रशासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुँचते हैं, तो शासन-प्रशासन के प्रति आम जनमानस का विश्वास गहरा होता है। नालापानी स्थित महाराणा प्रताप सामुदायिक भवन में आयोजित इस विशाल शिविर में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जनपद के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल तथा क्षेत्रीय विधायक उमेश शर्मा काऊ की मौजूदगी ने इस आयोजन को एक बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक व सामाजिक पड़ाव बना दिया। यह आयोजन केवल औपचारिक योजनाओं के विवरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक स्वास्थ्य, कृषि, महिला सशक्तिकरण और श्रमिक कल्याण की योजनाओं को सीधे हस्तांतरित करने का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया।

उत्तराखंड जैसे भौगोलिक विषमताओं से भरे राज्य में अक्सर आम नागरिक को अपनी छोटी-मोटी समस्याओं, प्रमाणपत्रों, सरकारी योजनाओं के आवेदन और चिकित्सीय जाँचों के लिए जिला मुख्यालयों या सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस तरह की परिस्थितियों में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित बहुउद्देशीय शिविर एक ऐसा मंच बनकर सामने आते हैं, जहाँ एक ही छत के नीचे दर्जनों विभागों की सुविधाएँ पारदर्शी और त्वरित रूप से उपलब्ध हो जाती हैं। रायपुर का यह शिविर इसी दूरगामी नीति का एक जीवंत स्वरूप बनकर उभरा।

प्रशासनिक संवेदनशीलता और स्वास्थ्य जागरूकता का अनूठा उदाहरण
शिविर का एक अत्यंत प्रेरणादायक पहलू तब देखने को मिला जब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तथा देहरादून जिले के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल ने स्वयं स्वास्थ्य शिविर में पहुँचकर अपना स्वास्थ्य परीक्षण करवाया। किसी जनप्रतिनिधि और कैबिनेट मंत्री का इस प्रकार आम नागरिकों के बीच खड़े होकर चिकित्सीय जाँच कराना केवल एक औपचारिक क्रियाकलाप नहीं है, बल्कि यह जनमानस में स्वास्थ्य के प्रति चेतना और सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर जन-विश्वास बढ़ाने का एक प्रभावी संदेश है।

इस बहुउद्देशीय शिविर में चिकित्सा विभाग द्वारा विशेष तैयारियाँ की गई थीं, जिसके अंतर्गत कुल 44 प्रकार की पैथोलॉजिकल एवं चिकित्सीय जाँचों की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। सामान्यतः देखा जाता है कि ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों के निवासियों को विभिन्न स्वास्थ्य जाँचों के लिए महंगे निजी पैथोलॉजी लैब का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ता है। शिविर में इतनी विस्तृत जाँच सुविधाओं की उपलब्धता ने स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत दी। वरिष्ठ डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम ने यहाँ न केवल जाँच की, बल्कि नागरिकों को मौसमी बीमारियों, खान-पान और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक भी किया।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में पहल
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जनजीवन में कृषि व बागवानी का केंद्रीय स्थान है। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से कृषि विभाग ने स्थानीय किसानों को आधुनिक खेती और स्वरोजगार की ओर प्रेरित करने के लिए कई ठोस कदम उठाए। शिविर के दौरान पात्र लाभार्थियों को आधुनिक कृषि यंत्र प्रदान किए गए, जिससे कृषि कार्यों में श्रम और समय दोनों की बचत हो सके।

इसके साथ ही, राज्य में मशरूम उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए किसानों को मशरूम मिनीकिट का वितरण किया गया। मशरूम उत्पादन एक ऐसा क्षेत्र है जो कम स्थान और कम लागत में किसानों तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को बेहतर आमदनी का साधन प्रदान करता है। सरकार द्वारा इस प्रकार के मिनीकिट सीधे शिविरों में उपलब्ध कराए जाने से युवाओं और महिलाओं को घर पर ही स्वरोजगार अपनाने का सीधा प्रोत्साहन मिलता है।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास: महालक्ष्मी और किशोरी किट का वितरण
किसी भी समाज का सर्वांगीण विकास तब तक संभव नहीं है जब तक उसकी महिलाएँ और बच्चे स्वस्थ व सुरक्षित न हों। रायपुर के शिविर में बाल विकास विभाग की ओर से इस दिशा में सराहनीय प्रयास दिखाई दिए। शिविर में नवजात शिशुओं और माताओं के बेहतर पोषण व देखभाल के लिए महालक्ष्मी किट प्रदान की गईं, वहीं किशोरियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण को ध्यान में रखते हुए किशोरी किट का वितरण किया गया।

महालक्ष्मी किट योजना राज्य सरकार की एक अत्यंत संवेदनशील पहल है, जिसका उद्देश्य प्रसव के बाद माता और नवजात शिशु को आवश्यक पौष्टिक सामग्री और स्वच्छता उत्पाद उपलब्ध कराना है। इसी तरह, किशोरियों में एनीमिया जैसी समस्याओं को दूर करने और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से किशोरी किट बेहद मददगार साबित हो रही हैं। इस प्रकार के शिविरों के माध्यम से इन किटों का प्रत्यक्ष वितरण यह सुनिश्चित करता है कि योजना का लाभ बिना किसी बिचौलिए के सीधे लक्षित वर्ग तक पहुँचे।

श्रमिक परिवारों के कल्याण के लिए बहुआयामी सहायता
समाज के नवनिर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला श्रमिक वर्ग अक्सर मूलभूत सुविधाओं और विभागीय जानकारियों के अभाव में पीछे छूट जाता है। इस शिविर में श्रम विभाग ने विशेष तत्परता दिखाते हुए 500 से अधिक श्रमिक परिवारों को विभिन्न आवश्यक किट उपलब्ध कराईं। इन किटों में पोषण किट, स्वच्छता किट और बच्चों की शिक्षा से जुड़ी किट शामिल थीं।

श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा किट दिए जाने से उनके भीतर पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़ेगा और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव कम होगा। वहीं, पोषण और स्वच्छता किट के माध्यम से निर्माण कार्य व अन्य कठिन श्रम में लगे मजदूरों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकेगी। श्रम विभाग का यह प्रयास यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार असंगठित और संगठित दोनों क्षेत्रों के मजदूरों के सामाजिक सुरक्षा चक्र को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्रियों का निर्देश: समयबद्ध समाधान और सरलीकृत शासन
शिविर में प्रतिभाग करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सेवा संकल्प अभियान के मूल दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन बहुउद्देशीय शिविरों की आत्मा यही है कि सरकार खुद चलकर जनता के पास आए। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए कि शिविर में आने वाली हर जनसमस्या, शिकायत या आवेदन का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर और निर्धारित समयावधि के भीतर होना चाहिए।

मुख्यमंत्री का यह रुख इस बात को रेखांकित करता है कि प्रशासनिक तंत्र को लालफीताशाही से मुक्त करके जन-केंद्रित बनाया जाए। अक्सर नागरिक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर हतोत्साहित हो जाते हैं, लेकिन यदि बहुउद्देशीय शिविर में ही उनकी समस्याओं की सुनवाई हो जाए और समाधान का समय तय कर दिया जाए, तो इससे शासन की कार्यशैली में पारदर्शिता और गतिशीलता आती है।

जिला प्रशासन की सजगता और उच्च अधिकारियों की मौजूदगी
रायपुर के इस बहुउद्देशीय शिविर की सफलता के पीछे जिला प्रशासन का सुव्यवस्थित संयोजन और समन्वय रहा। शिविर में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोभाल और मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह सहित तमाम जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की मौके पर मौजूदगी से यह फायदा होता है कि अंतर-विभागीय मामलों का निस्तारण तुरंत हो जाता है। साथ ही, आम जनता को भी यह विश्वास मिलता है कि उनकी समस्याओं को शासन के शीर्ष स्तर पर गंभीरता से सुना जा रहा है। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से यह अपील भी की है कि वे आगामी दिनों में आयोजित होने वाले ऐसे बहुउद्देशीय शिविरों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों और योजनाओं की जानकारी लेकर उनका पूरा लाभ उठाएँ।

सेवा संकल्प अभियान का सामाजिक व आर्थिक प्रभाव
सेवा संकल्प अभियान केवल एक दिन का आयोजन या कोई सामान्य प्रशासनिक कवायद नहीं है, बल्कि यह सुशासन का एक दीर्घकालिक मॉडल है। जब स्वास्थ्य, कृषि, श्रम, बाल विकास, समाज कल्याण और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभाग एक मंच पर आते हैं, तो इससे योजनाओं के दोहरेपन और विभागीय देरी जैसी समस्याएँ स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

सामाजिक दृष्टि से देखें तो यह अभियान समाज के कमजोर, वंचित और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मुख्यधारा से जोड़ता है। आर्थिक दृष्टि से, कृषि यंत्रों, मशरूम किटों और श्रमिक कल्याण योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ सीधे तौर पर ग्रामीण व स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देता है। भविष्य में इस प्रकार के शिविरों की नियमितता से न केवल सरकारी योजनाओं की शत-प्रतिशत पहुँच सुनिश्चित होगी, बल्कि प्रशासनिक ढाँचा भी अधिक उत्तरदायी और लोक-कल्याणकारी बनेगा।

रायपुर का यह बहुउद्देशीय शिविर इस बात का प्रमाण है कि जब दृष्टि स्पष्ट हो और प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो जनकल्याण की योजनाओं को धरातल पर उतरने में देर नहीं लगती। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सेवा संकल्प अभियान उत्तराखंड में जन-सेवा और पारदर्शी शासन का एक नया अध्याय लिख रहा है।

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