नैनीताल जनपद सहित संपूर्ण कुमाऊँ मंडल में उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा तथा प्रकृति संरक्षण के अनूठे प्रतीक हरेला पर्व को अत्यंत हर्षोल्लास और व्यापक जनसहभागिता के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर पर्यावरण संतुलन, हरित भविष्य के निर्माण तथा वैश्विक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से समूचे जनपद में एक वृहद और ऐतिहासिक पौधारोपण अभियान का सफल संचालन किया गया। यह विशेष अभियान जिला मुख्यालय के प्रशासनिक परिसरों से प्रारंभ होकर सुदूरवर्ती विकास खंडों, न्याय पंचायतों, ग्राम पंचायतों तथा वन पंचायतों के स्तर तक अत्यंत व्यापक रूप से चलाया गया, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। इस महाअभियान का मुख्य ध्येय न केवल नए पौधों का रोपण करना था, बल्कि उनके पूर्ण संरक्षण और संवर्धन की सामूहिक जिम्मेदारी को भी रेखांकित करना था।
उत्तराखंड के इस पारंपरिक पर्व को आधुनिक पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से जोड़ते हुए प्रशासनिक तंत्र ने एक अनूठी पहल की। पूरे जनपद में आयोजित इस वृहद कार्यक्रम के माध्यम से आम जनमानस को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि प्रकृति का संरक्षण किसी एक विभाग या संस्था का दायित्व नहीं है, अपूर्ण यह प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है। इस वर्ष के आयोजन में विशेष रूप से छायादार, चौड़ी पत्ती वाले, फलदार तथा औषधीय एवं पुष्पीय प्रजातियों के पौधों के रोपण पर विशेष बल दिया गया, जो पर्वतीय क्षेत्रों की पारिस्थितिकी को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत ने किया पौधारोपण और दिया संदेश
इस व्यापक जन-अभियान के अंतर्गत मुख्य कार्यक्रम कुमाऊँ कमिश्नरी परिसर में आयोजित किया गया। यहाँ कुमाऊँ आयुक्त एवं माननीय मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत ने देशव्यापी अभियान ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के अंतर्गत अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से पौधारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने संपूर्ण कुमाऊँ मंडल के नागरिकों को लोक पर्व हरेला की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। अपने संबोधन में उन्होंने भावुक और व्यावहारिक अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपनी जन्म देने वाली माता के सम्मान में तथा इस धरती माँ के स्वास्थ्य को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि केवल पौधा लगा देना ही औपचारिकता की पूर्ति नहीं है, बल्कि उस पौधे को एक शिशु की भांति सींचना और उसके बड़े होने तक उसकी सुरक्षा की संपूर्ण जिम्मेदारी उठाना ही सच्ची पर्यावरण सेवा है।
कुमाऊँ आयुक्त ने ऐतिहासिक संदर्भों और लोक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हरेला उत्तराखंड की अंतरात्मा में बसा हुआ पर्व है। यह केवल एक तिथि या त्योहार मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों द्वारा प्रकृति, जल स्रोतों, और वनों के संरक्षण के लिए सौंपी गई एक अत्यंत अमूल्य धरोहर है। यह पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि हमारा अस्तित्व पूरी तरह से इन जंगलों और प्राकृतिक संपदा पर निर्भर है। इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम के दौरान अपर आयुक्त जीवन सिंह नगन्याल सहित कमिश्नरी के समस्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, अनुभाग अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस हरित संकल्प को आगे बढ़ाने का सामूहिक प्रण लिया।
जिलाधिकारी ने रोपे पौधे और प्रशासनिक तंत्र को दिए कड़े निर्देश
इस महाअभियान की कमान संभालते हुए जिला मुख्यालय से दूर हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय परिसर में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने भी ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण कर इस मुहिम को और अधिक गति प्रदान की। जिलाधिकारी ने जनपद वासियों को पर्व की बधाई देते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक और नीतिगत बिंदु को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पौधारोपण की वास्तविक सार्थकता और उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि लगाए गए पौधों में से कितने पौधे जीवित रहकर वृक्ष का रूप ले पाते हैं। आंकड़ों के जाल से हटकर धरातल पर काम करने की आवश्यकता है।
इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए जिलाधिकारी ने संबंधित वन विभाग, उद्यान विभाग, और कृषि विभाग के अधिकारियों को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने निर्देशित किया कि चालू मानसून सत्र के दौरान जनपद के लिए जो भी पौधारोपण लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, उन्हें न केवल समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए, बल्कि उन लक्ष्यों से आगे बढ़कर कार्य किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को एक सुदृढ़ कार्ययोजना बनाने को कहा जिसके तहत रोपे गए पौधों की नियमित रूप से निगरानी, सिंचाई, और सुरक्षा की बाड़ का प्रबंधन किया जा सके, जिससे कि आगामी वर्षों में ये पौधे घने वृक्षों में परिवर्तित होकर पर्वतीय पर्यावरण और भू-जल स्तर को सुधारने में अपना प्रभावी योगदान दे सकें।
विकास भवन भीमताल में मुख्य विकास अधिकारी के नेतृत्व में अभियान
प्रशासनिक स्तर पर इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडे के कुशल मार्गदर्शन में विकास भवन भीमताल के विशाल परिसर में एक वृहद और अत्यंत व्यवस्थित पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें विकास भवन के अंतर्गत आने वाले समस्त विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के नागरिकों ने भी अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अभियान के तहत परिसर और उसके आस-पास के क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए वैज्ञानिक पद्धति से पौधों का चयन किया गया। यहाँ मुख्य रूप से पर्यावरण के अनुकूल चौड़ी पत्ती वाले पौधों, स्थानीय फलदार वृक्षों और सुंदर पुष्पीय प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी परिसरों को हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाना हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कार्मिकों ने शपथ ली कि वे पर्यावरण के प्रति संवेदनशील रहेंगे और अपने द्वारा रोपे गए पौधों की सुरक्षा के प्रति सदैव सजग रहेंगे।
ग्राम पंचायत और वन पंचायत स्तर पर जनसहभागिता का ऐतिहासिक उदाहरण
हरेला पर्व के अवसर पर जनपद नैनीताल के शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में भी पर्यावरण संरक्षण की एक अभूतपूर्व लहर देखने को मिली। जनपद के सभी विकास खंड मुख्यालयों, दूरस्थ न्याय पंचायतों, ग्राम पंचायतों तथा सदियों पुरानी पारंपरिक वन पंचायत क्षेत्रों में भी स्थानीय ग्रामीणों, महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों और स्कूली बच्चों के सहयोग से व्यापक स्तर पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। यह दृश्य इस बात का जीवंत प्रमाण था कि उत्तराखंड की ग्रामीण जनता आज भी अपनी लोक संस्कृति और वनों के प्रति कितनी अगाध श्रद्धा रखती है।
इस वृहद मानसून अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राज्य सरकार के विभिन्न प्रमुख विभागों जैसे वन विभाग, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, भेषज विभाग, सहकारिता विभाग तथा ग्राम्य विकास विभाग ने आपस में बेहतर समन्वय स्थापित किया है। इन सभी विभागों के अधिकारियों का कहना है कि यह पौधारोपण केवल हरेला पर्व के दिन तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संपूर्ण मानसून अवधि के दौरान यह अभियान निरंतर और योजनाबद्ध तरीके से चलता रहेगा, ताकि जनपद के हरित आवरण में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सके।
सामाजिक चेतना का उदय
नैनीताल जनपद के कोने-कोने में आयोजित इन समस्त कार्यक्रमों ने न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन जागरूकता के स्तर को एक नई ऊंचाई पर पहुँचाया है, बल्कि इसने सामुदायिक सहभागिता की भावना को भी अत्यधिक सुदृढ़ किया है। इस महाअभियान के माध्यम से यह संदेश अत्यंत स्पष्टता के साथ समाज में गया है कि स्वच्छ पर्यावरण और हरित विकास किसी एक व्यक्ति की इच्छा पर नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक उत्तरदायित्व और इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है।
प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता और आम जनता के सहयोग के इस अनूठे संगम ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि परंपराओं को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ दिया जाए, तो ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर वैश्विक समस्याओं का स्थानीय स्तर पर अत्यंत प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है। आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित वातावरण सौंपने की दिशा में नैनीताल जनपद द्वारा उठाया गया यह कदम निश्चय ही संपूर्ण राज्य के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।


