शौर्य और समर्पण की मिसाल: भारत की संप्रभुता, अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा को जब भी किसी बड़े खतरे का सामना करना पड़ा है, तब-तब एक ऐसी शक्ति का नाम सबसे पहले सामने आया है, जिस पर हर भारतवासी को अटूट विश्वास है। वह शक्ति है राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी NSG। ‘सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा’ के मूल मंत्र को अपने जीवन का ध्येय बनाने वाले एनएसजी के वीर जवानों को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। इनका अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य और निःस्वार्थ समर्पण न केवल देश की सीमा और शहरों को सुरक्षित रखता है, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का एक सशक्त स्रोत भी है।
आतंकवाद और विशेष सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए भारत के पास कई सैन्य और अर्धसैन्य बल मौजूद हैं, लेकिन एनएसजी की भूमिका इन सभी से बिल्कुल अलग और बेहद विशिष्ट है। इन्हें देश का ‘फेडरल काउंटर टेररिज्म फोर्स’ कहा जाता है। यानी जब परिस्थितियां सामान्य सुरक्षा बलों के नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं या जब किसी बेहद जटिल और संवेदनशील ऑपरेशन को अंजाम देना होता है, तब एनएसजी के कमांडो मैदान में उतरते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड का ऐतिहासिक सफर और स्थापना की पृष्ठभूमि
एनएसजी के गठन की कहानी भारत के इतिहास की कुछ बेहद चुनौतीपूर्ण घटनाओं से जुड़ी हुई है। अस्सी के दशक के शुरुआती वर्षों में देश के भीतर आंतरिक सुरक्षा की स्थिति काफी संवेदनशील हो चुकी थी। विशेष रूप से पंजाब में पनपे उग्रवाद और उसके बाद 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ ने देश के रक्षा रणनीतिकारों को एक नई दिशा में सोचने पर मजबूर कर दिया।
उस समय यह गहराई से महसूस किया गया कि पारंपरिक पुलिस बल या सेना की नियमित टुकड़ियां हाई-जैकिंग, बंधक संकट या जटिल शहरी आतंकवादी हमलों से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित नहीं होती हैं। ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए एक बेहद त्वरित, घातक और अत्यधिक प्रशिक्षित विशेष बल की आवश्यकता थी जो कम से कम समय में और न्यूनतम नुकसान के साथ बड़े से बड़े संकट को टाल सके।
इसी सोच के साथ 1984 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक विशेष कमांडो बल के गठन का निर्णय लिया। इसके बाद संसद द्वारा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड अधिनियम 1986’ पारित किया गया, जिसके तहत एनएसजी को विधिवत वैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ। तब से लेकर आज तक, एनएसजी ने अपने तीन दशकों से अधिक के इतिहास में देश की सुरक्षा के लिए कई ऐसे कारनामे किए हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता।
एनएसजी की संरचना: ब्लैक कैट्स का आंतरिक ढांचा
एनएसजी को आम भाषा में ‘ब्लैक कैट कमांडो’ भी कहा जाता है। यह नाम उनके ऑल-ब्लैक यूनिफॉर्म और उनकी पोशाक पर बने ब्लैक कैट के इंसिग्निया (चिह्न) के कारण पड़ा। लेकिन यह केवल एक नाम नहीं है, बल्कि उस फुर्ती, सटीकता और गोपनीयता का प्रतीक है जो एक काली बिल्ली की विशेषता मानी जाती है।
एनएसजी कोई सीधी भर्ती करने वाला बल नहीं है। इसमें शामिल होने वाले सभी जवान और अधिकारी भारतीय सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों जैसे बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और राज्य पुलिस बलों से प्रतिनियुक्ति पर आते हैं। एनएसजी मुख्य रूप से दो प्रमुख भागों में विभाजित है:
1. स्पेशल एक्शन ग्रुप (एसएजी)
एसएजी एनएसजी का मुख्य स्ट्राइक फोर्स या आक्रामक हिस्सा है। इसमें 100 प्रतिशत कर्मी भारतीय सेना से आते हैं। एसएजी के दो मुख्य भाग हैं—51 एसएजी और 52 एसएजी। 51 एसएजी का मुख्य काम आतंकवाद विरोधी अभियानों को अंजाम देना है, जबकि 52 एसएजी को विमानों के अपहरण से निपटने और बंधकों को छुड़ाने में महारत हासिल है।
2. स्पेशल रेंजर ग्रुप (एसआरजी)
एसआरजी में मुख्य रूप से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और राज्य पुलिस बलों के जवान शामिल होते हैं। इनका मुख्य काम एसएजी को लॉजिस्टिकल और रणनीतिक सहायता प्रदान करना होता है। इसके अलावा, अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा, घेराबंदी और सुरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करने में एसआरजी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रशिक्षण की कठोरता: लोहे को फौलाद बनाने की प्रक्रिया
एक साधारण सैनिक को ‘ब्लैक कैट कमांडो’ में बदलना कोई आसान काम नहीं है। एनएसजी का प्रशिक्षण चक्र इतना कठिन और मानसिक रूप से थका देने वाला होता है कि इसमें केवल वही लोग टिक पाते हैं जिनके भीतर अदम्य इच्छाशक्ति होती है। हरियाणा के मानेसर में स्थित एनएसजी का ट्रेनिंग सेंटर दुनिया के सबसे बेहतरीन और कठिन सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों में गिना जाता है।
प्रारंभिक चयन प्रक्रिया के बाद, जवानों को लगभग तीन महीने के गहन और कठोर प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। इस दौरान उन्हें हर प्रकार की प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना सिखाया जाता है।
सटीक निशानेबाजी: एनएसजी कमांडो को जीरो-एरर शूटर बनाया जाता है। उन्हें इस तरह प्रशिक्षित किया जाता है कि वे अंधेरे में भी केवल आवाज सुनकर सही निशाना लगा सकें।
मार्शल आर्ट और हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट: बिना हथियार के दुश्मन को कैसे ढेर किया जाए, इसका गहन अभ्यास कराया जाता है।
हॉस्टेज रेस्क्यू और रूम इंटरवेंशन: किसी इमारत या बंद जगह में घुसकर बिना किसी बेकसूर को नुकसान पहुंचाए आतंकवादियों को कैसे मार गिराया जाए, इसका अभ्यास बार-बार कराया जाता है।
सहनशक्ति और मानसिक मजबूती: घंटों तक बिना भोजन और पानी के अत्यधिक तनावपूर्ण स्थिति में भी शांत रहकर निर्णय लेने की क्षमता विकसित की जाती है।
यह कठोर प्रशिक्षण ही वह वजह है जिसके कारण जब एनएसजी किसी ऑपरेशन में उतरती है, तो सफलता की संभावना लगभग सौ प्रतिशत होती है।
ऐतिहासिक ऑपरेशन्स: जब एनएसजी ने देश का मान बढ़ाया
एनएसजी का इतिहास देशभक्ति, बलिदान और अभूतपूर्व सफलता की कहानियों से भरा हुआ है। देश पर जब भी कोई बड़ा संकट आया, एनएसजी के जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना स्थिति को संभाला।
1. ऑपरेशन ब्लैक थंडर (1988)
1988 में जब अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में उग्रवादियों ने फिर से कब्जा कर लिया था, तब एनएसजी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। इस ऑपरेशन की सबसे खास बात यह थी कि कमांडो ने अत्यधिक संयम, रणनीति और सटीकता का परिचय दिया। बिना किसी बड़े नुकसान के और धार्मिक स्थल की पवित्रता बनाए रखते हुए सभी उग्रवादियों को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया गया।
2. अक्षरधाम मंदिर हमला (2002)
गांधीनगर के प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर पर जब आतंकवादियों ने हमला कर कई श्रद्धालुओं को बंधक बना लिया था, तब एनएसजी के ‘ऑपरेशन वज्र शक्ति’ ने स्थिति पर काबू पाया। रात के अंधेरे में कमांडो ने मंदिर परिसर में प्रवेश किया और सभी आतंकवादियों को मार गिराया।
3. मुंबई 26/11 आतंकवादी हमला (2008)
भारत के इतिहास के सबसे भीषण आतंकवादी हमलों में से एक, 26/11 के मुंबई हमलों के दौरान एनएसजी की भूमिका को पूरी दुनिया ने देखा। ‘ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो’ के तहत एनएसजी कमांडो ने ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट और नरीमन हाउस में छिपे लश्कर-ए-तैयबा के घातक आतंकवादियों को मार गिराया। इस ऑपरेशन में एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन और हवलदार गजेंद्र सिंह ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
4. पठानकोट एयरबेस हमला (2016)
पठानकोट में भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण एयरबेस पर हुए हमले के दौरान भी एनएसजी ने ‘ऑपरेशन ढांगू’ चलाकर पूरे एयरबेस को सुरक्षित किया और रणनीतिक संपत्तियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दिया।
बदलते समय के साथ एनएसजी का आधुनिकीकरण
आज का आतंकवाद केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है। यह तकनीक, ड्रोन, साइबर नेटवर्क और अत्यधिक आधुनिक हथियारों से लैस हो चुका है। ऐसे में एनएसजी ने भी खुद को समय के साथ आधुनिक और प्रासंगिक बनाए रखा है।
वर्तमान में एनएसजी केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं है। 2008 के मुंबई हमलों के बाद यह महसूस किया गया कि संकट की स्थिति में देश के किसी भी कोने में तेजी से पहुंचने के लिए क्षेत्रीय हब की आवश्यकता है। आज मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई और अहमदाबाद में एनएसजी के क्षेत्रीय हब पूरी तरह से सक्रिय हैं, जिससे रिस्पॉन्स टाइम बहुत कम हो गया है।
इसके अलावा, एनएसजी अब नाइट-विज़न उपकरणों, उन्नत ड्रोन, रोबोटिक आर्म्स, कॉर्नर-शॉट गन्स और अत्याधुनिक संचार प्रणालियों का उपयोग करती है। रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) खतरों से निपटने के लिए भी एनएसजी ने अपनी क्षमताओं को काफी बढ़ाया है।
सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव: एक राष्ट्रीय विश्वास
एनएसजी केवल एक सुरक्षा बल नहीं है, बल्कि देशवासियों के लिए एक मनोवैज्ञानिक संबल है। जब भी टीवी पर समाचारों में यह आता है कि “घटनास्थल पर एनएसजी कमांडो पहुंच चुके हैं”, तो आम जनता के दिल में एक राहत और विश्वास की लहर दौड़ जाती है। लोगों को पता होता है कि अब संकट चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका समाधान निश्चित है।
एनएसजी के जवानों का जीवन त्याग और तपस्या की एक जीवित मिसाल है। वे हर समय, चौबीसों घंटे और सातों दिन अपनी जान हथेली पर रखकर काम करते हैं। उनके परिवार भी इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि देश की पुकार पर उनका प्रियजन किसी भी क्षण युद्ध के मैदान में जा सकता है। यह परिवार का त्याग ही है जो जवान को सीमा या मोर्चे पर निर्भीक होकर लड़ने की शक्ति देता है।
स्थापना दिवस का यह अवसर केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि उन सभी ज्ञात और अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि देने का भी दिन है, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए एनएसजी की वर्दी में अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका बलिदान हमें यह याद दिलाता है कि जिस शांति और सुरक्षा का आनंद हम अपने घरों में लेते हैं, उसकी कीमत इन वीरों के पसीने और खून से चुकाई जाती है।
भविष्य की चुनौतियां और एनएसजी की तैयारी
आने वाले समय में सुरक्षा परिदृश्य और अधिक जटिल होने वाला है। हाइब्रिड वॉरफेयर, एआई-संचालित हथियार, और घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में आतंकवाद के नए तरीके सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
एनएसजी इन भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार खुद को तैयार कर रही है। मित्र देशों के विशेष बलों के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास, नई तकनीकों को अपनाना और अपने कमांडो के प्रशिक्षण को और अधिक निखारना इस दिशा में निरंतर जारी है।
राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड स्थापना दिवस के इस पावन अवसर पर, पूरा देश अपने इन शूरवीरों को नमन करता है। उनका अदम्य साहस, उच्च कोटि का अनुशासन और मातृभूमि के प्रति निष्ठा हर भारतीय के हृदय में गर्व की अनुभूति कराती है। हमें अपने ‘ब्लैक कैट्स’ पर गर्व है, जो हमारी नींद सुरक्षित रखने के लिए खुद जागते रहते हैं।


