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हरिद्वार छात्रवृत्ति फर्जीवाड़ा: राष्ट्रीय पोर्टल की जांच के बाद घिरे कई संस्थान, शासन के आदेश पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई – जांच के लिए बनेगी एसआईटी

हरिद्वार छात्रवृत्ति फर्जीवाड़ा: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को मिलने वाली केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजना में बड़े स्तर पर धांधली का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल की प्रारंभिक जांच में संदिग्ध पाए गए हरिद्वार जिले के उन्नीस शिक्षण संस्थानों के खिलाफ पुलिस ने आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है। अंदेशा जताया जा रहा है कि यह पूरा प्रकरण सरकारी धनराशि के गबन और एक सुनियोजित बड़े घोटाले से जुड़ा हो सकता है।

वर्ष दो हजार इक्कीस से तेईस के बीच हुआ फर्जीवाड़ा
यह गंभीर मामला वर्ष दो हजार इक्कीस-बाईस और वर्ष दो हजार बाईस-तेईस के दौरान हरिद्वार जिले में बांटी गई छात्रवृत्ति राशि से संबंधित है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ निजी और सरकारी शिक्षण संस्थानों ने अपात्रों के नाम पर या फर्जी दस्तावेज तैयार कर नियमों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया और अवैध रूप से सरकारी धन हड़प लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हरिद्वार की जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी इप्सिता रावत ने पुलिस विभाग को एक लिखित शिकायत सौंपी, जिसके आधार पर सिडकुल थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के निर्देश पर हुई व्यापक जांच
दरअसल, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर तकनीकी ऑडिट और सत्यापन के दौरान हरिद्वार के कई कॉलेजों और संस्थानों का रिकॉर्ड संदिग्ध मिला था। इसके तत्काल बाद भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने उत्तराखंड शासन को इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल करने के कड़े निर्देश जारी किए। शासन से आदेश मिलते ही हरिद्वार जिला प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए विशेष जांच समितियों का गठन किया था।

उप जिलाधिकारियों की रिपोर्ट में हुआ वित्तीय अनियमितता का खुलासा
क्षेत्रीय उप जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में बनाई गई इन प्रशासनिक टीमों ने चिन्हित संस्थानों के रिकॉर्ड, दाखिला रजिस्टरों, छात्रवृत्ति से जुड़े बैंक खातों और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। जांच समितियों द्वारा सौंपी गई आधिकारिक रिपोर्ट में कई स्तरों पर वित्तीय गड़बड़ियां और सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने की बात प्रमाणित हुई। इसी संयुक्त रिपोर्ट को आधार बनाते हुए अब दोषी संस्थानों के विरुद्ध यह कानूनी शिकंजा कसा गया है।

मामले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच दल का गठन
हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने और गहनता से साक्ष्य जुटाने के लिए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया जा रहा है। यह विशेष टीम छात्रवृत्ति वितरण से संबंधित बैंक लेन-देन, वास्तविक लाभार्थियों के भौतिक सत्यापन और संदिग्ध संस्थानों के प्रबंधकों की भूमिका की गहराई से जांच करेगी। उन्होंने साफ किया कि जांच के दायरे में आने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

पुलिस प्रशासन अब मुख्य रूप से इस बात का पता लगाने में जुटा है कि छात्रवृत्ति के नाम पर कुल कितनी सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है और इस आपराधिक सांठगांठ में कौन-कौन से अधिकारी या बिचौलिए शामिल थे।

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