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हरिद्वार साधु हत्याकांड: शिवगढ़ के प्राचीन मंदिर में दो संतों की नृशंस हत्या, परिसर में दफनाए गए शव, तीन संदिग्ध भेषधारी फरार

हरिद्वार साधु हत्याकांड ने देवभूमि उत्तराखंड के धार्मिक वातावरण और स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। पथरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम शिवगढ़ में स्थित एक अति प्राचीन शिव मंदिर के भीतर घटित दोहरे कत्ल की इस विदारक घटना ने संपूर्ण लक्सर और हरिद्वार अंचल में तीव्र सनसनी फैला दी है। मंदिर में वर्षों से रहकर पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करने वाले दो पूज्य संतों की अति निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई और साक्ष्यों को नष्ट करने के उद्देश्य से उनके पार्थिव शरीरों को मंदिर प्रांगण के भीतर ही भूमिगत कर दिया गया। घटना की जानकारी होते ही संपूर्ण ग्रामीण अंचल में आक्रोश और भय की लहर व्याप्त हो गई है। कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने तथा अपराधियों को तत्काल सलाखों के पीछे भेजने हेतु वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना का विस्तृत विवरण
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिवगढ़ स्थित इस ऐतिहासिक शिव धाम में संत सेवा गिरि तथा संत उत्तम गिरि दीर्घकाल से निवास कर रहे थे। दोनों संतों का जीवन अत्यंत साधारण, शांत और भक्तिभाव से परिपूर्ण था। वे प्रतिदिन प्रातःकाल मंदिर के कपाट खोलकर नियमित पूजा-अर्चना, आरती तथा धार्मिक विधियों का संपादन करते थे।

सोमवार की प्रातः जब काफी समय बीत जाने के उपरांत भी मंदिर के कपाट बंद रहे और प्रांगण में कोई चहल-पहल दिखाई नहीं दी, तब आसपास के निवासियों को किसी अनहोनी का संदेह हुआ। ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में प्रवेश कर दोनों संतों को पुकारना आरंभ किया, परंतु भीतर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई। जब ग्रामीणों ने ध्यानपूर्वक निरीक्षण किया, तो मंदिर प्रांगण के एक कोने में हाल ही में खोदी गई मिट्टी और अस्वाभाविक स्थिति दिखाई दी। संदेह गहराने पर जब ग्रामीणों द्वारा उस स्थान की आंशिक खुदाई की गई, तो दोनों संतों के क्षत-विक्षत शरीर भूमि में दबे हुए मिले। इस दृश्य को देखते ही ग्रामीणों के होश उड़ गए और तत्काल स्थानीय थाना पुलिस को इसकी सूचना प्रदान की गई।

अपराध का तरीका और फॉरेंसिक साक्ष्य
सूचना प्राप्त होते ही पथरी थाना पुलिस तथा उच्च प्रशासनिक अधिकारी भारी बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस प्रशासन द्वारा पूरे मंदिर परिसर को घेराबंदी कर सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। कार्यपालक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में विधिवत खुदाई करवाकर दोनों संतों के शवों को भूमि से बाहर निकाला गया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम हेतु जिला चिकित्सालय भिजवाया गया।

प्राथमिक वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच में जो तथ्य उभरकर सामने आए हैं, वे अत्यंत खौफनाक हैं:
संत सेवा गिरि की हत्या: फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार, संत सेवा गिरि की हत्या का कारण दम घोटना अथवा गला दबाना प्रतीत होता है। अपराधियों ने अत्यंत बेरहमी से उनके श्वास मार्ग को अवरुद्ध कर इस कृत्य को अंजाम दिया।
संत उत्तम गिरि की हत्या: संत उत्तम गिरि पर किसी तीव्र धारदार शस्त्र अथवा चाकू से प्रहार किए गए। उनके शरीर पर कई घाव पाए गए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि अपराधियों ने अत्यंत क्रूरतापूर्वक इस हत्याकांड को अंजाम दिया है।
साक्ष्य मिटाने का प्रयास: दोनों संतों की सांसें थम जाने के पश्चात, अपराधियों ने साक्ष्यों को पूरी तरह से नष्ट करने के मंसूबे से मंदिर प्रांगण के भीतर ही गहरा गड्ढा खोदा और दोनों शवों को उसमें गाड़कर ऊपर से मिट्टी समतल कर दी, ताकि किसी को जल्दी से भनक न लग सके।

तीन संदिग्ध साधु भेषधारियों की भूमिका
पुलिस द्वारा आसपास के क्षेत्र में की गई गहन पूछताछ में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील सुराग हाथ लगा है। ग्रामीणों और मंदिर के निकटवर्ती निवासियों ने पुलिस को सूचित किया कि शनिवार की रात्रि तीन अज्ञात व्यक्ति, जिन्होंने साधुओं का भेष धारण कर रखा था, मंदिर परिसर में आकर ठहरे थे।
इन संदिग्ध व्यक्तियों की उपस्थिति और उनके आचरण को लेकर निम्नलिखित बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं:
पूर्व परिचय की संभावना: संदिग्धों का मंदिर परिसर में बिना रोक टोक प्रवेश और रात्रि विश्राम यह संकेत देता है कि वे मृतक संतों के लिए पूर्णतः अनजान नहीं थे। संभवतः उनका पूर्व से कोई संपर्क अथवा जान-पहचान थी।
घटना के पश्चात से रहस्यमय स्थिति: शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि के आसपास घटित इस जघन्य वारदात के बाद से ही वे तीनों भेषधारी व्यक्ति मंदिर से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हैं।
गहन संदेह के घेरे में: जिस प्रकार से घटना के तुरंत बाद तीनों संदिग्ध फरार हुए हैं, उससे पुलिस प्रशासन का मुख्य संदेह उन्हीं व्यक्तियों पर केंद्रित हो गया है। पुलिस का मानना है कि किसी गंभीर आपसी वैचारिक मतभेद, व्यक्तिगत विवाद अथवा किसी गुप्त लेन-देन के कारण इस वीभत्स हत्याकांड को अंजाम दिया गया है।

पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और जांच की दिशा
इस अति संवेदनशील दोहरे हत्याकांड की सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी लक्सर देवेंद्र नेगी और पथरी थाना प्रभारी रविंद्र कुमार ने पुलिस दल के साथ घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया। फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की विशेष टीम ने घटना स्थल से उंगलियों के निशान, रक्त के नमूने तथा अन्य भौतिक साक्ष्य एकत्र किए हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने स्वयं इस मामले का संज्ञान लेते हुए घटना के शीघ्र अनावरण हेतु कड़े निर्देश जारी किए हैं। पुलिस की जांच मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित है:
विशेष टीमों का गठन: संदिग्ध अपराधियों की धरपकड़ हेतु पुलिस की पांच अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो संभावित ठिकानों और अंतराज्यीय सीमाओं पर छापेमारी कर रही हैं।
तकनीकी एवं डिजिटल साक्ष्य: मंदिर की ओर जाने वाले सभी मार्गों, तिराहों और मुख्य चौराहों पर स्थापित स्वचालित दूरदर्शन (सीसीटीवी) कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है, ताकि संदिग्धों के आने और भागने के मार्ग का सटीक रेखांकन किया जा सके।
दूरभाष और नेटवर्किंग जांच: क्षेत्र में सक्रिय रहे मोबाइल टावरों के आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे घटना के समय उपस्थित संदिग्ध दूरभाष नंबरों की पहचान की जा सके।
संतों की पृष्ठभूमि का सत्यापन: मृतक संतों, सेवा गिरि और उत्तम गिरि, के मूल निवास स्थान और उनके अतीत के संबंधों के विषय में भी जानकारी जुटाई जा रही है, क्योंकि स्थानीय निवासियों को उनके मूल निवास क्षेत्र के बारे में विस्तृत ज्ञान नहीं था।

क्षेत्र में जनाक्रोश
धार्मिक नगरी हरिद्वार की पावन सीमा के भीतर एक पवित्र शिव मंदिर में दो संतों की इस प्रकार नृशंस हत्या किए जाने से स्थानीय निवासियों, साधु-संत समाज और धार्मिक संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। शिवगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भय का वातावरण निर्मित हो गया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि शांतप्रिय ग्रामीण अंचलों में स्थित मंदिरों को निशाना बनाया जाना अत्यंत चिंताजनक है। संतों के इस प्रकार असामयिक और दर्दनाक अंत ने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न खड़े किए हैं। साधु-संत समाज ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि अपराधियों की शीघ्र अति शीघ्र गिरफ्तारी की जाए और उन्हें कठोरतम कानूनी दंड दिलाया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी इस प्रकार के दुस्साहस का विचार न कर सके।

संभावित कारणों का विश्लेषण और जांच का निष्कर्ष
वर्तमान में इस दोहरे कत्ल के पीछे का वास्तविक कारण एक गूढ़ रहस्य बना हुआ है। पुलिस प्रशासन विभिन्न कोणों से मामले की पड़ताल कर रहा है। मुख्य रूप से तीन संभावित कोणों पर जांच आगे बढ़ रही है:
प्रथम कोण: क्या संतों और आगंतुक भेषधारियों के मध्य किसी तात्कालिक अथवा पुराने व्यक्तिगत विवाद ने हिंसक रूप ले लिया?
द्वितीय कोण: क्या मंदिर परिसर में किसी गुप्त संपत्ति, दान-पात्र अथवा मूल्यवान वस्तुओं के लोभ में इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया?
तृतीय कोण: क्या यह कृत्य किसी सुनियोजित षड्यंत्र का परिणाम है, जिसमें अपराधियों ने साधु भेष का उपयोग केवल पहचान छुपाने के लिए किया?

पुलिस अधिकारियों का पूर्ण आश्वासन है कि फॉरेंसिक साक्ष्यों, वैज्ञानिक तकनीकों और स्थानीय सूचना तंत्र के समन्वित प्रयासों से इस रहस्यमय हत्याकांड का पटाक्षेप अति शीघ्र कर दिया जाएगा और दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा। क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने हेतु अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

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