देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने वाले पंद्रह वर्षीय छात्र के साथ संस्थान के ही प्रबंधक द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने का एक बेहद शर्मनाक और पीड़ादायक मामला उजागर हुआ है। पीड़ित बच्चे के पिता द्वारा प्रेमनगर पुलिस थाने में दर्ज कराई गई लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज की और आरोपी स्कूल संचालक को गिरफ्तार कर लिया। इसके पश्चात आरोपी को सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से विद्वान न्यायाधीश ने उसे न्यायिक हिरासत में सीधे जेल भेजने के आदेश जारी कर दिए। इस जघन्य घटना ने आवासीय शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों की शारीरिक सुरक्षा और वहां के प्रशासनिक वातावरण पर एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने घटना का ब्यौरा देते हुए मीडिया को अवगत कराया कि जैसे ही इस संबंध में प्रेमनगर थाने को लिखित शिकायत प्राप्त हुई, पुलिस टीम ने बिना कोई समय गंवाए त्वरित और कड़ी वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई। पुलिस ने आरोपी प्रबंधक को गिरफ्तार करने के साथ ही पीड़ित छात्र का चिकित्सकीय परीक्षण कराया है और उसके औपचारिक बयान दर्ज कराने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि बच्चों के साथ इस प्रकार के अपराध करने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और अदालत में कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए मजबूत साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।
छात्र की खामोशी और व्यवहार में बदलाव से खुला घिनौने अपराध का राज
यह पूरी दर्दनाक घटना उस समय उजागर हुई जब पिछले कई दिनों से पीड़िता छात्र का स्वभाव अचानक पूरी तरह बदल गया। पीड़ित बच्चा अपने सहपाठियों और अध्यापकों से दूर-दूर रहने लगा था तथा अधिकांश समय गुमसुम और डरा-सहमा रहता था। वह न तो किसी से ठीक से बातचीत कर रहा था और न ही स्कूल जाने में कोई रुचि दिखा रहा था। जब छात्र कई दिनों तक अत्यधिक मानसिक तनाव और निराशा के दौर से गुजरता रहा, तो उसके घर वालों को किसी अनहोनी का संदेह हुआ। परिजनों ने शुरुआती दिनों में इसे सामान्य बात माना, लेकिन बच्चे की लगातार बढ़ती चुप्पी से परेशान होकर उन्होंने उससे बहुत ही प्यार और दुलार के साथ एकांत में बातचीत शुरू की।
परिवार के सदस्यों द्वारा बहुत अधिक समझाने-बुझाने और सुरक्षा का भरोसा देने के बाद पीड़ित मासूम अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सका और सिसकियां भरते हुए फूट-फूटकर रोने लगा। छात्र ने अपने परिजनों को बताया कि जिस स्कूल प्रबंधक के भरोसे उसके अभिभावकों ने उसे पढ़ाई के लिए भेजा था, उसी व्यक्ति ने उसके साथ लंबे समय से अश्लील और गलत हरकतें की हैं। बच्चे के मुंह से यह भयानक आपबीती सुनते ही परिजनों के पैर तले जमीन खिसक गई और वे हक्के-बक्के रह गए। जिस व्यक्ति पर छात्र की बेहतर परवरिश और सुरक्षित भविष्य की पूरी जिम्मेदारी थी, वही उसका सबसे बड़ा शोषक निकला। परिजनों ने बिना कोई विलंब किए प्रेमनगर थाना पहुंचकर पुलिस को पूरी स्थिति से अवगत कराया।
प्रेमनगर पुलिस की त्वरित कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया की स्थिति
पीड़ित छात्र के पिता द्वारा प्रेमनगर पुलिस थाने में दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और बच्चों की सुरक्षा से संबंधित कड़े कानूनों की सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया। प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौर के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने तुरंत दबिश देकर आरोपी स्कूल संचालक को उसके ठिकाने से हिरासत में ले लिया। आरोपी से पूछताछ के बाद उसे विधिक धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित छात्र की सुरक्षा और उसकी मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसके बयान दर्ज कराए जा रहे हैं। पुलिस की विशेष टीम घटना से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू की बहुत ही गहनता और वैज्ञानिक आधार पर जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्कूल परिसर के भीतर के माहौल और वहां काम करने वाले अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस घिनौने कृत्य को छिपाने में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई संलिप्तता थी या नहीं।
आवासीय शिक्षण संस्थानों का विवादों और उत्पीड़न की घटनाओं से पुराना नाता
राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में संचालित होने वाले निजी बोर्डिंग स्कूलों में बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और ऐसे मामलों को दबाने की कोशिशों का इतिहास काफी पुराना और चिंताजनक रहा है। पूर्व में भी ऐसे कई संगीन मामले सामने आ चुके हैं, जिन्होंने पूरे समाज और शिक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया था। ताज़ा घटना ने एक बार फिर से इन आवासीय संस्थानों के भीतर बच्चों की वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था और वहां तैनात कर्मचारियों के चरित्र सत्यापन पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
कई बार यह देखने में आया है कि दूर-दराज के राज्यों और शहरों से अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद में उन्हें लाखों रुपये खर्च करके इन बोर्डिंग स्कूलों में भेजते हैं। परंतु, कई संस्थानों में सुरक्षा मानकों और नैतिक निगरानी की भारी कमी के कारण मासूम बच्चे यौन और मानसिक उत्पीड़न के शिकार हो जाते हैं। इतना ही नहीं, पूर्व की घटनाओं में यह भी उजागर हुआ है कि कई बार घटना सामने आने पर संस्था का प्रबंधन बदनामी के डर से मामले को पुलिस तक पहुंचने से रोकने और दबाने का प्रयास करता है।
अतीत में हुए ऐसे ही जघन्य मामले जिनमें अदालतों ने सुनाई कठोर सजाएं
इस क्षेत्र में स्थित विभिन्न बोर्डिंग स्कूलों में पहले भी ऐसी शर्मनाक वारदातें हो चुकी हैं, जिनमें अदालतों ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा है:
वर्ष दो हजार अठारह का सहसपुर बोर्डिंग स्कूल कांड: सहसपुर थाना क्षेत्र में स्थित एक प्रसिद्ध बोर्डिंग स्कूल में बाहरी राज्य की एक नाबालिग छात्रा के साथ उसके ही चार सहपाठियों ने दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। जब इस बात का खुलासा हुआ तो संस्था के अधिकारियों, आया और हॉस्टल वार्डन ने मामले को दबाने का प्रयास किया तथा छात्रा को गर्भपात कराने की दवाइयां तक पिला दीं। जब पुलिस ने कड़ाई से जांच की तो षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ। इस मामले में मुख्य आरोपी छात्र को आजीवन कारावास तथा स्कूल प्रबंधन के तीन अधिकारियों को दस-दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
दृष्टिबाधित छात्राओं के साथ हुआ यौन उत्पीड़न: राजपुर रोड स्थित दृष्टिबाधित छात्रों के एक विशेष स्कूल में वर्ष दो हजार अठारह के दौरान संगीत शिक्षक सुचित नारंग ने कई मासूम छात्राओं के साथ यौन दुर्व्यवहार किया था। संस्थान के ही कुछ साहसी बच्चों ने पत्र लिखकर इस जुर्म की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी थी। इसके बाद आरोपी शिक्षक को जनवरी दो हजार उन्नीस में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी पाया और उसे बीस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
शिक्षक द्वारा छात्रा का उत्पीड़न: शहर से सटे एक अन्य बोर्डिंग स्कूल में वर्ष दो हजार इक्कीस में एक शिक्षक ने छात्रा के साथ घिनौना काम किया था और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी। पीड़िता की मां ने जब पुलिस में शिकायत दर्ज कराई तो पुलिस ने आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में अदालत ने आरोपी शिक्षक को दोषी ठहराते हुए बीस साल की कठोर जेल की सजा सुनाई थी।
विशेष बच्चों के छात्रावास में केयरटेकर की करतूत: पिछले वर्ष जून के महीने में शहर के एक आवासीय पुनर्वास संस्थान में शारीरिक और मानसिक रूप से विशेष बच्चों के छात्रावास में तैनात केयरटेकर ने एक मासूम बच्चे के साथ कुकृत्य किया था। बच्चों द्वारा दी गई जानकारी के बाद पुलिस ने आरोपी केयरटेकर को गिरफ्तार किया जो वर्तमान में जेल में सजा काट रहा है।
अभिभावकों में गहरा आक्रोश और बाल सुरक्षा कानूनों के कड़े पालन की मांग
इस ताज़ा घटना के सामने आने के बाद से ही शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों और अन्य छात्रों के अभिभावकों में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। पीड़ित छात्र के परिजनों का कहना है कि जिस व्यक्ति पर बच्चों के चरित्र निर्माण, उनकी देखरेख और बेहतर भविष्य की पूरी जिम्मेदारी थी, जब वही इतना घिनौना रूप अख्तियार कर ले तो माता-पिता अपने बच्चों को किसके भरोसे छोड़ें। अभिभावक संघों ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि ऐसे आरोपी के खिलाफ त्वरित अदालत में मुकदमा चलाकर उसे कठोरतम दंड दिया जाए।
इसके साथ ही जन सामान्य की ओर से यह मांग भी उठ रही है कि प्रदेश भर के सभी आवासीय और गैर-आवासीय स्कूलों के प्रबंधकों, शिक्षकों, हॉस्टल वार्डन और निचले स्तर के कर्मचारियों का अनिवार्य रूप से पुलिस चरित्र सत्यापन कराया जाए। स्कूलों के भीतर सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी, बच्चों की काउंसलिंग के लिए स्वतंत्र बाल मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति और एक गोपनीय शिकायत तंत्र की स्थापना की जानी चाहिए ताकि कोई भी बच्चा बिना किसी भय के अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचा सके।
देहरादून के निजी बोर्डिंग स्कूल में घटी यह घटना समाज और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है। शिक्षा के मंदिरों में इस प्रकार की घिनौनी मानसिकता वाले लोगों की मौजूदगी बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है। यद्यपि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रबंधक को सलाखों के पीछे भेज दिया है, लेकिन ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शिक्षा विभाग को बोर्डिंग स्कूलों के संचालन और उनकी निगरानी के लिए नए और कड़े दिशानिर्देश लागू करने होंगे। जब तक दोषियों को त्वरित न्याय प्रणाली के तहत कठोर सजा नहीं मिलेगी, तब तक ऐसे आपराधिक तत्वों के मन में कानून का खौफ पैदा नहीं किया जा सकता।


