महिला सशक्तिकरण केवल एक विचार या नारा नहीं है, बल्कि यह हमारे ग्रामीण समाज की पूरी व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का सबसे बड़ा साधन बन चुका है। आज जब देश और प्रदेश की महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं, तो उससे न केवल उनका परिवार समृद्ध हो रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र का विकास तेजी से हो रहा है। इसी सोच को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के एकेश्वर (पणखेत) विकासखंड मुख्यालय में एक भव्य और गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित इस ‘लखपति दीदी सम्मेलन और सम्मान समारोह’ में क्षेत्र की आत्मनिर्भर महिलाओं के जज्बे को खुलकर सराहा गया।
इस विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं चौबट्टाखाल के विधायक सतपाल महाराज ने दीप प्रज्वलित कर समारोह की शुरुआत की। उन्होंने मंच से अपने संबोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को केवल वित्तीय रूप से मजबूत करना नहीं है, बल्कि उनके अंदर आत्मविश्वास जगाना है ताकि वे समाज के हर क्षेत्र में आगे आकर नेतृत्व कर सकें।
48 लखपति दीदियों और वरिष्ठ महिलाओं को मिला सम्मान
इस भव्य आयोजन के दौरान चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग विकासखंडों से आई 48 ऐसी महिलाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपनी लगन और मेहनत से खुद को ‘लखपति दीदी’ के रूप में स्थापित किया है। ये वे महिलाएं हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी आय में बढ़ोतरी की और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनीं।
इसके साथ ही, समाज सेवा और लोक कल्याण के कार्यों में वर्षों से लगी 48 वरिष्ठ महिलाओं को भी मंच पर सम्मानित किया गया। राज्य स्तर पर प्रतिष्ठित ‘तीलू रौतेली पुरस्कार’ से सम्मानित नूतन तनू पंत को भी इस अवसर पर उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए विशेष रूप से याद किया गया और सम्मानित किया गया।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने सम्मानित होने वाली सभी महिलाओं को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन बहनों की सफलता यह साबित करती है कि यदि हमारी मातृशक्ति को सही अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो वे किसी भी मुकाम को हासिल कर सकती हैं।
पहाड़ की महिलाओं का संघर्ष और आधुनिक तकनीक से जुड़ाव
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां हमेशा से कठिन रही हैं। ऐसे में राज्य के विकास में यहां की महिलाओं की भूमिका बेहद खास रही है। कैबिनेट मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पहाड़ की महिलाएं हमेशा से ही मेहनती, जुझारू और हिम्मत वाली रही हैं। वे न केवल अपने घर-परिवार की जिम्मेदारी बखूबी संभालती हैं, बल्कि खेती-बाड़ी, पशुपालन और स्थानीय कुटीर उद्योगों का काम भी बहुत लगन से करती हैं।
सतपाल महाराज का वक्तव्य: “हमारी सरकार का यह निरंतर प्रयास है कि पहाड़ की इस मेहनत कश मातृशक्ति को अब पारंपरिक तौर-तरीकों से आगे बढ़ाकर आधुनिक दौर से जोड़ा जाए। इसके लिए महिलाओं को आधुनिक तकनीक, नए हुनर का प्रशिक्षण, आसान वित्तीय सहायता और उत्पादों को बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि जब हमारे गांवों की बहनें आधुनिक साधनों का उपयोग करेंगी, तो उनके काम में समय की बचत होगी और उनकी आय में भी कई गुना बढ़ोतरी होगी।
सरकारी योजनाएं और महिलाओं का बदलता जीवन
समारोह में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी विस्तार से जिक्र किया गया। सतपाल महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश में महिलाओं के जीवन को सुगम बनाने के लिए कई अभूतपूर्व कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कई प्रमुख योजनाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे ये नीतियां धरातल पर असर दिखा रही हैं:
उज्ज्वला योजना: इस योजना ने धुएं से होने वाली बीमारियों से महिलाओं को मुक्ति दिलाई है और उनके स्वास्थ्य की रक्षा की है।
जन-धन योजना: इसके जरिए हर महिला का अपना बैंक खाता खुला, जिससे वे अपनी बचत को सुरक्षित रख पा रही हैं और सीधे सरकारी योजनाओं का लाभ ले रही हैं।
मुद्रा योजना: छोटे व्यवसाय शुरू करने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को बिना किसी झंझट के आसान ऋण मिल रहा है।
स्वयं सहायता समूह प्रोत्साहन: गांवों में काम कर रहे स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी और वित्तीय मदद देकर उन्हें बड़े कारोबार से जोड़ा जा रहा है।
नमो ड्रोन दीदी योजना: इस अनूठी योजना के माध्यम से महिलाओं को खेती के कामों में ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इन सभी अभियानों के कारण आज देश और प्रदेश की लाखों-करोड़ों महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान और स्वदेशी का संकल्प
सतपाल महाराज ने अपने भाषण में स्थानीय उत्पादों और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की बात को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के गांवों में बनने वाले उत्पाद बेहद शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण होते हैं। जरूरत इस बात की है कि इन उत्पादों को सही ब्रांडिंग और बाजार मिले।
उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ का मंत्र आज के समय में बहुत प्रासंगिक है। सरकार का संकल्प है कि राज्य की अधिक से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ें और अपने स्थानीय उत्पादों जैसे हस्तशिल्प, जैविक कृषि उत्पाद और हस्तनिर्मित सामानों को तैयार करें। सरकार इन उत्पादों को न केवल राष्ट्रीय बाजारों तक, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहुंचाने के लिए रास्ते बना रही है।
सरकार का संकल्प: सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान
कैबिनेट मंत्री ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकार प्रदेश की हर महिला को सुरक्षा, सम्मान, बेहतर शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और स्वरोजगार के भरपूर अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि जब एक महिला शिक्षित और आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो पूरा परिवार शिक्षित और समृद्ध बनता है। यही कारण है कि महिला विकास ही किसी भी राज्य या देश की वास्तविक प्रगति का आधार होता है। जब तक हमारी मातृशक्ति मजबूत नहीं होगी, तब तक एक सशक्त उत्तराखंड और समृद्ध भारत की कल्पना पूरी नहीं हो सकती।
कार्यक्रम में गणमान्य लोगों की उपस्थिति
इस भव्य सम्मेलन को सफल बनाने में भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की पूरी टीम और स्थानीय प्रतिनिधियों का बड़ा योगदान रहा। सतपाल महाराज ने इस शानदार आयोजन के लिए महिला मोर्चा की सराहना की।
समारोह के दौरान कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और संगठन से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें:
सीमा सजवाण (मंडल अध्यक्ष, महिला मोर्चा एकेश्वर)
मोहिना रावत
प्रमिला भंडारी (जिला अध्यक्ष, पौड़ी)
रेखा डंगवाल (गढ़वाल संयोजक प्रभारी, महिला मोर्चा)
सुनीता कोटनाला (जिला सह प्रभारी)
रचना बुटोला (जिला पंचायत अध्यक्ष, पौड़ी)
महिपाल सिंह नेगी (महामंत्री)
रेनू घिल्डियाल (सम्मेलन संयोजक)
पुष्पा असवाल (सतपुली मंडल अध्यक्ष)
नीलम रावत (पोखड़ा मंडल अध्यक्ष)
मीना गुसाईं (बीरोंखाल मंडल अध्यक्ष)
राकेश नैथानी (भाजपा मंडल अध्यक्ष)
कार्यक्रम का कुशल संचालन मधुबाला (जिला महामंत्री) और रजनी मौर्य द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों और स्थानीय महिलाओं में काफी उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली।
एकेश्वर में आयोजित यह लखपति दीदी सम्मेलन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह ग्रामीण भारत में आ रहे एक बड़े बदलाव की तस्वीर पेश करता है। महिला सशक्तिकरण के माध्यम से उत्तराखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जिस तरह से महिलाएं अपने कौशल के बल पर आत्मनिर्भर बन रही हैं, वह वास्तव में काबिले तारीफ है। सरकार की योजनाओं और स्थानीय प्रयासों के सही संगम से आज पहाड़ की मातृशक्ति विकास की नई इबारत लिख रही है।


