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कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत का बड़ा प्रशासनिक एक्शन: नैनीताल में मतदाता सूची सुधार अभियान और 20 करोड़ की पार्किंग परियोजना का लिया जमीनी जायजा

कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने शुक्रवार को नैनीताल जिला मुख्यालय पहुंचकर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत संचालित विभिन्न केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का प्राथमिक उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना, मतदाता सूचियों में मौजूद कमियों को समय रहते ठीक करना तथा आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं को अधिक सुगम बनाना था। प्रशासनिक अमले के साथ पहुंचे आयुक्त ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट शब्द में हिदायत दी कि जनहित से जुड़े किसी भी कार्य में किसी तरह की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अपने इस विस्तृत दौरे के दौरान उन्होंने सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय निकायों में बने पुनरीक्षण केंद्रों की प्रगति रिपोर्ट देखी। उन्होंने मौके पर मौजूद पंजियों, दस्तावेजों और प्राप्त आवेदनों का बारीकी से अध्ययन किया और कर्मचारियों को जनता से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को निपटाने की सलाह दी।

तीन प्रमुख केंद्रों की कार्यप्रणाली का सूक्ष्मता से निरीक्षण

शहर की चुनावी तैयारियों और प्रशासनिक सक्रियता को परखने के उद्देश्य से आयुक्त ने तीन प्रमुख स्थलों का दौरा किया:
लोक निर्माण विभाग कार्यालय परिसर
सीआरएसटी इंटर कॉलेज, मल्लीताल
के.एल. साह ट्रस्ट नगर पालिका परिषद बालिका इंटर कॉलेज
इन तीनों केंद्रों पर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत चल रही प्रक्रियाओं का एक-एक कर अवलोकन किया गया। कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने वहां तैनात कर्मचारियों से अब तक प्राप्त हुए आवेदनों, निरस्त किए गए नोटिसों और लोगों को भेजी गई सूचनाओं का ब्यौरा मांगा। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि जिन नागरिकों को पूर्व में नोटिस जारी किए जा चुके हैं, उनके पास उसकी रिसीविंग और सुनवाई की तिथि की स्पष्ट जानकारी पहुंची है या नहीं। यदि इसमें कोई अंतर पाया जाता है तो उसे तुरंत प्रभाव से दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए।

स्कैनर से मतदाता सूची की खुद की जांच, मिलीं कई कमियां

निरीक्षण की सबसे खास बात यह रही कि कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने केवल मौखिक रिपोर्ट पर भरोसा न करते हुए खुद डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया। उन्होंने बूथ पर लगे स्कैनर और बारकोड तकनीक के जरिए मतदाता सूची के आंकड़ों की गहनता से पड़ताल की।
जांच के दौरान मतदाता सूची में कई प्रकार की लिपिकीय और तकनीकी गलतियां पाई गईं:
वर्तनी की गलतियां: अधिकांश मामलों में मतदाताओं के नाम, पिता के नाम या सरनेम की स्पेलिंग में अंतर पाया गया।
पते में विसंगतियां: कुछ स्थानों पर मकान नंबर और वार्ड के विवरण में त्रुटियां देखने को मिलीं।
तारीख और नोटिस का मिलान: जिन लोगों को आपत्तियों के निस्तारण के लिए बुलाया गया था, उनकी तिथियों का मिलान किया गया।
आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन कमियों को सुधारने के लिए जिस भी नागरिक को बुलाया जा रहा है, उसे पूरी प्रक्रिया की पहले से जानकारी होनी चाहिए ताकि उसे बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

नाम सुधारने के लिए कौन से दस्तावेज हैं अनिवार्य
निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि सही जानकारी के अभाव में कई लोग बिना आवश्यक कागजात के केंद्रों पर पहुंच जाते हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे केंद्रों के बाहर और सार्वजनिक स्थानों पर आवश्यक दस्तावेजों की सूची चस्पा करें।
यदि किसी नागरिक को अपने नाम, उम्र या पते में संशोधन कराना है, तो उसे निम्नलिखित प्रमाण पत्रों में से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे:
हाईस्कूल (दसवीं श्रेणी) का शैक्षणिक प्रमाण पत्र
सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र
सत्यापित जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू होता हो)
पहचान स्थापित करने वाला कोई अन्य वैधानिक दस्तावेज
उन्होंने स्पष्ट किया कि तय तारीख पर मतदाता इन कागजात को लेकर संबंधित केंद्र पर आएं और अपने विवरण में सुधार कराएं।

वर्ष 2003 के रिकॉर्ड के आधार पर नाम दर्ज कराने का आसान तरीका

ऐसे नागरिक जो लंबे समय से क्षेत्र में रह रहे हैं लेकिन उनका नाम किसी कारणवश मौजूदा मतदाता सूची में नहीं है, या जिनकी मैपिंग वर्ष 2003 के ऐतिहासिक डेटा के आधार पर की जा रही है, उनके लिए प्रक्रिया को बेहद सरल और सुगम बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने बताया कि वर्ष 2003 के रिकॉर्ड को आधार बनाकर किए जा रहे मिलान कार्य के तहत कोई भी वंचित व्यक्ति आवश्यक साक्ष्यों के साथ उपस्थित हो सकता है। संबंधित बीएलओ और पर्यवेक्षक ऐसे मामलों को प्राथमिकता पर लेते हुए आवेदन फॉर्म भरवाएंगे और जांच के बाद नाम जोड़ने की कार्यवाही पूरी करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी योग्य व्यक्ति अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित न रहे।

अफवाहों और भ्रांतियों से दूर रहने की अपील
निरीक्षण के उपरांत जनसाधारण को संबोधित करते हुए आयुक्त ने एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मतदाता सूची से नाम काटे जाने को लेकर फैलाई जा रही किसी भी तरह की अफवाहों, मनगढ़ंत बातों या भ्रामक खबरों पर बिल्कुल भी भरोसा न करें।
“जो भी व्यक्ति नियमानुसार भारत का नागरिक है और इस क्षेत्र का वास्तविक एवं पात्र मतदाता है, उसका नाम मतदाता सूची से किसी भी दशा में नहीं हटाया जाएगा। लोकतंत्र में मताधिकार सबसे बड़ा अधिकार है और हर पात्र नागरिक का नाम सूची में बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस देने का मकसद नाम काटना नहीं, बल्कि डेटा को पूरी तरह शुद्ध और सटीक बनाना है ताकि फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश न रहे।

सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों का नया रोस्टर जारी
काम में तेजी लाने और पारदर्शी व्यवस्था कायम करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के बैठने का समय और दिन निर्धारित कर दिया गया है।
दैनिक शेड्यूल: सभी एईआरओ अपने-अपने आवंटित मतदान केंद्रों पर तय समय सारणी के अनुसार अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे।
मौके पर निस्तारण: केंद्रों पर आने वाले आम नागरिकों की शिकायतों और दावों का तुरंत परीक्षण कर उसी दिन निस्तारण किया जाएगा।
निगरानी प्रणाली: आयुक्त स्वयं और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रोजाना इन केंद्रों की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे।

20 करोड़ रुपये की केएमवीएन पार्किंग परियोजना का अचानक निरीक्षण

मतदाता पुनरीक्षण कार्यों का जायजा लेने के बाद कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत का काफिला कुमाऊं मंडल विकास निगम के वाहन पार्किंग स्थल पहुंचा। नैनीताल शहर में लगातार बढ़ती गाड़ियों की संख्या और ट्रैफिक जाम की समस्या को देखते हुए इस पार्किंग परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्किंग निर्माण कार्य की वर्तमान प्रगति स्थिति:
स्वीकृत एवं प्रयुक्त बजट: इस वृहद परियोजना में अब तक लगभग 20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जा चुकी है।
सुरक्षा उपाय: सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए पार्किंग स्थल के चारों ओर रेलिंग लगाने का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।
व्यावसायिक परिसर: पार्किंग से सटे इलाके में 9 अत्याधुनिक दुकानों का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है, जिससे स्थानीय व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने कहा कि नैनीताल जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल में पार्किंग का शीघ्र शुरू होना बेहद आवश्यक है। 20 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी यदि जनता को इसका लाभ न मिले, तो यह चिंताजनक है। उन्होंने निर्माणदायी संस्था और अधिकारियों को कड़े शब्दों में निर्देश दिए कि बचे हुए फिनिशिंग कार्यों को रिकॉर्ड समय में पूरा कर इसे आम जनता और पर्यटकों के वाहनों के लिए तुरंत खोल दिया जाए।

निरीक्षण के दौरान उपस्थित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
इस पूरे औचक निरीक्षण और मैदानी दौरे के दौरान जिला प्रशासन के कई आला अधिकारी और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुख्य रूप से उपस्थित अधिकारियों में शामिल थे:
विवेक राय (अपर जिलाधिकारी)
नवाजिश खालिक (उप जिलाधिकारी / एसडीएम, नैनीताल)
एच. डी. पांडे (सहायक निर्वाचन अधिकारी)
विभिन्न वार्डों और क्षेत्रों के वरिष्ठ पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर)
संबंधित बूथों के बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ)

प्रशासनिक सुधार और भावी रणनीतियाँ

नैनीताल में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत द्वारा किए गए इस बहुआयामी निरीक्षण से एक बात स्पष्ट है कि जिला प्रशासन चुनाव संबंधी तैयारियों और बुनियादी ढांचे के विकास दोनों ही मोर्चों पर पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है। मतदाता सूची में शुद्धता लाने से जहां आगामी चुनावों में निष्पक्षता बढ़ेगी, वहीं 20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पार्किंग के शुरू होने से सरोवर नगरी नैनीताल को ट्रैफिक जाम के झाम से बड़ी राहत मिलेगी। प्रशासन का यह कदम शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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