आईआईटी रुड़की दीक्षांत समारोह 2026 में उच्च शिक्षा, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत हुई। देश के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक तकनीकी संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने अपने वार्षिक दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल स्तर की शिक्षा पूरी करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखी। दो दिनों तक चला यह भव्य आयोजन केवल छात्र-छात्राओं को डिग्रियां और पदक बांटने का औपचारिक मंच भर नहीं था, बल्कि यह भारत के शोध तंत्र को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान देने और देश की भविष्य की तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए युवाओं की प्रतिभा को सही दिशा देने का एक बेहद ऐतिहासिक और गौरवशाली अवसर साबित हुआ।
पीएचडी डिग्रियों का ऐतिहासिक कीर्तिमान और शोध परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव
आईआईटी रुड़की के 175 से भी अधिक वर्षों के गौरवशाली इतिहास में इस वर्ष का दीक्षांत समारोह एक बेहद खास वजह से हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। समारोह के समापन सत्र के दौरान कुल 518 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। यह आंकड़ा इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि यह आईआईटी रुड़की द्वारा किसी भी एक शैक्षणिक सत्र में प्रदान की गई डॉक्टोरल डिग्रियों की अब तक की सबसे बड़ी और रिकॉर्ड संख्या है। संस्थान द्वारा इतनी बड़ी संख्या में शोधार्थियों को उपाधि देना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आईआईटी रुड़की का प्राथमिक ध्यान अब केवल स्नातक स्तर की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह संस्थान अब उन्नत शोध, गहन वैज्ञानिक अध्ययन और मौलिक ज्ञान के सृजन का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।
इस दीक्षांत समारोह का एक और सबसे प्रभावशाली पहलू उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की बढ़ती भागीदारी रही। कुल 518 डॉक्टोरल उपाधियों में से 172 डिग्रियां महिला शोधार्थियों को प्रदान की गईं। यह आंकड़ा यह साबित करता है कि अब विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे जटिल विषयों में देश की बेटियां भी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर शोध के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। केवल पीएचडी ही नहीं, बल्कि स्नातकोत्तर स्तर पर भी छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। स्नातकोत्तर की कुल 903 डिग्रियों में से 201 डिग्रियां महिला छात्राओं के नाम रहीं। यह बदलाव भारतीय शोध परिदृश्य के लिए एक बेहद सुखद और दूरगामी संकेत है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का सफल कार्यान्वयन और नए अकादमिक आयाम
शैक्षणिक ढाँचे को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालने और छात्रों के करियर को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से आईआईटी रुड़की ने इस वर्ष कई दूरदर्शी कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को धरातल पर उतारते हुए संस्थान ने इस वर्ष पहली बार ‘एमएस बाय रिसर्च’ (MS by Research) की उपाधि प्रदान की। यह विशेष डिग्री उन छात्रों को प्रदान की गई जो किसी कारणवश अपने डॉक्टोरल (Ph.D.) कार्यक्रम को पूरा किए बिना उससे बाहर हो गए थे। इस नीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र द्वारा शोध में बिताया गया बहुमूल्य समय और उसकी मेहनत व्यर्थ न जाए, बल्कि उसे एक प्रामाणिक डिग्री के रूप में मान्यता मिले। इस नई व्यवस्था के तहत इस वर्ष 3 शोधार्थियों को एमएस बाय रिसर्च की उपाधि से सम्मानित किया गया।
यदि स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के आंकड़ों का विस्तार से विश्लेषण करें, तो संस्थान ने विभिन्न विषयों की विशेषज्ञता वाले कुल 903 छात्रों को मास्टर उपाधियां वितरित कीं। इन डिग्रियों का विवरण संस्थान के बहुआयामी शैक्षणिक दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है:
मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी (M.Tech.): 579 छात्र
मास्टर ऑफ साइंस (M.Sc.): 174 छात्र
मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA): 77 छात्र
एग्जीक्यूटिव एमबीए (Executive MBA): 29 छात्र
मास्टर ऑफ डिजाइन (M.Des.): 19 छात्र
मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर (M.Arch.): 12 छात्र
मास्टर ऑफ अर्बन एंड रूरल प्लानिंग (M.U.R.P.): 11 छात्र
पीजी डिप्लोमा: 2 छात्र
ये आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि संस्थान केवल पारंपरिक इंजीनियरिंग विषयों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह प्रबंधन, औद्योगिक डिजाइनिंग, शहरी व ग्रामीण नियोजन तथा बुनियादी विज्ञान जैसे विविध क्षेत्रों में भी देश के लिए शीर्ष स्तर की प्रतिभाएं तैयार कर रहा है।
कॉरपोरेट और उद्योग जगत के दिग्गजों की प्रेरणादायक उपस्थिति
दीक्षांत समारोह के इस विशेष सत्र को और भी गरिमामयी बनाने के लिए उद्योग जगत के कई दिग्गज और संस्थान के पूर्व छात्र विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हीरो मोटोकॉर्प के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) श्री हर्षवर्धन छिताले ने शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने तेजी से बदल रही डिजिटल दुनिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के दौर में उद्योग की नई जरूरतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में केवल डिग्री हासिल कर लेना ही काफी नहीं है, बल्कि लगातार नया सीखने की जिज्ञासा और ज्ञान को वास्तविक जीवन की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान में बदलने की क्षमता ही एक सफल पेशेवर की असली पहचान होती है। उन्होंने युवा स्नातकों का आह्वान किया कि वे तकनीकी ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए करें।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए ऑयलमैक्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक तथा एशियन एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. कपिल गर्ग ने भी छात्रों के साथ अपने जीवन के अनुभव साझा किए। आईआईटी रुड़की के ही पूर्व छात्र रहे डॉ. गर्ग ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शोध की यात्रा कभी खत्म नहीं होती। इसमें सफलता पाने के लिए निरंतर जिज्ञासा, असफलता से न घबराने का धैर्य और लीक से हटकर नए विचारों पर काम करने का साहस बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि संस्थान से मिली यह सीख आने वाले वर्षों में उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में एक मजबूत ढाल का काम करेगी।
संस्थान के दूरदर्शी नेतृत्व के विचार और भविष्य की रूपरेखा
समारोह के दौरान संस्थान के प्रशासनिक बोर्ड और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी देश-विदेश से आए अभिभावकों और मेधावी छात्रों को संबोधित किया। आईआईटी रुड़की के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन एडवोकेट हरीश साल्वे ने अपने संदेश में कहा कि आज जिन शोधार्थियों और स्नातकों की सफलता का जश्न मनाया जा रहा है, वे केवल संस्थान का नाम रोशन नहीं कर रहे, बल्कि वे भारत के उस उज्ज्वल भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं जो नवाचार और ज्ञान पर आधारित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डिग्री मिलना अध्ययन का अंत नहीं, बल्कि समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारियों को उठाने की एक नई शुरुआत है।
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर के.के. पंत ने संस्थान की इस बड़ी उपलब्धि पर अपार खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एक ही वर्ष में 518 पीएचडी डिग्रियां प्रदान करना यह साबित करता है कि आईआईटी रुड़की का रिसर्च इकोसिस्टम कितना मजबूत और विस्तृत हो चुका है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत नई उपाधियां शुरू करना छात्रों के हित में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम है। इसके अलावा, संस्थान के उप निदेशक प्रोफेसर प्रवीण कुमार और डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर एन.के. नवानी ने भी सभी उपाधि प्राप्त करने वाले छात्रों, उनके माता-पिता और मार्गदर्शन करने वाले शिक्षकों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया और स्नातकों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
मेधावी शोधकर्ताओं और स्नातकों का भव्य सम्मान
शैक्षणिक यात्रा के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले, शोध पत्र प्रकाशित करने वाले और तकनीकी नवाचार में असाधारण योगदान देने वाले छात्र-छात्राओं को समारोह के दौरान विभिन्न पदकों और नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इस वर्ष कुल 71 पुरस्कार एवं 33 मेडल प्रदान किए गए, जिनमें से कई संस्थान स्तर पर स्थापित थे तो कई पुरस्कार विभिन्न दानदाताओं और प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों द्वारा प्रायोजित किए गए थे।
पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रमुख शोधार्थियों और छात्रों का विवरण:
डॉ. सुशील शर्मा एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल रिसर्च अवॉर्ड: शिवानी चौधरी (पीएचडी, भौतिकी विभाग)
एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल रिसर्च अवॉर्ड: गिएथ अल वराह (पीएचडी, वास्तुकला और नियोजन विभाग)
एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल रिसर्च अवॉर्ड: अद्रिजा घोष (पीएचडी, रसायन शास्त्र विभाग)
एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल रिसर्च अवॉर्ड: शैला मीर (पीएचडी, धातुकर्म एवं सामग्री इंजीनियरिंग)
एक्सीलेंस इन डॉक्टोरल रिसर्च अवॉर्ड: सौम्यदीप बसाक (पीएचडी, जैव प्रौद्योगिकी विभाग)
ए.के. गोयल ग्रीन एनर्जी प्राइज एवं गोल्ड मेडल: विद्यसागर तुम्माकुरी (पीएचडी, जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन)
श्री बृजेंद्र एवं श्रीमती सरोज सिंह कैश प्राइज: लालावमपुइया (एम.टेक., स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग)
मनोरमा एवं शशि बुधिराजा फाउंडेशन अवॉर्ड: आर.पी. अभिनया (एम.आर्क.)
श्री रवि मोहन मंगल कैश प्राइज: साहिल गुप्ता (एम.टेक., ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम्स मैनेजमेंट)
फार्माफिलिएट्स एक्सीलेंस अवॉर्ड: श्रेष्ठा दत्ता चौधरी (एम.एससी., केमिस्ट्री)
दो दिवसीय दीक्षांत समारोह का कुल ब्योरा और ऐतिहासिक उपलब्धि
दो दिनों तक चले इस भव्य दीक्षांत समारोह के विधिवत समापन के साथ ही आईआईटी रुड़की ने इस वर्ष कुल 2,701 डिग्रियां प्रदान करने का एक नया ऑल-टाइम रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। यह संख्या संस्थान के इतिहास में अब तक किसी भी एक वर्ष में दी गई कुल डिग्रियों की सबसे बड़ी संख्या है।
यदि दोनों दिनों में दी गई डिग्रियों का पूर्ण वर्गीकरण देखा जाए, तो स्थिति इस प्रकार रही:
स्नातक स्तर (Undergraduate Degree): 1,277 छात्र
स्नातकोत्तर स्तर (Postgraduate Degree): 903 छात्र
डॉक्टोरल स्तर (Ph.D. Degree): 518 शोधार्थी
एमएस बाय रिसर्च (MS by Research): 3 शोधार्थी
कुल योग: 2,701 डिग्रियाँ
दीक्षांत समारोह 2026 का यह आयोजन इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि आईआईटी रुड़की केवल अतीत की महान विरासतों को सहेजने वाला संस्थान नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत की वैश्विक आकांक्षाओं, वैज्ञानिक खोजों, तकनीकी नवाचारों और विश्वस्तरीय अनुसंधान को आकार देने वाला एक बेहद शक्तिशाली शैक्षणिक स्तंभ बन चुका है। यहाँ से निकल रहे युवा शोधार्थी और स्नातक आने वाले समय में न केवल भारत की अर्थव्यवस्था और उद्योग जगत को गति देंगे, बल्कि दुनिया के सामने मौजूद तमाम जटिल पर्यावरणीय, तकनीकी और सामाजिक समस्याओं का स्थायी समाधान खोजने में भी अपनी अग्रणी भूमिका निभाएंगे।


