उत्तराखंड पुलिस आधुनिकीकरण और कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से लोक भवन में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने शिष्टाचार भेंट की। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान राज्य की समग्र आंतरिक सुरक्षा, मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों, लगातार बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने की रणनीतियों, पुलिस कर्मियों के कल्याणकारी कदमों और आगामी महाकुंभ मेले की अग्रिम तैयारियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। राज्यपाल ने प्रदेश में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में पुलिस महानिदेशक को आवश्यक दिशानिर्देश दिए।
नशा मुक्त देवभूमि अभियान को जन-आंदोलन बनाने पर जोर
राज्य को मादक पदार्थों के दुष्प्रभाव से पूरी तरह मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान को और अधिक गति देने का निर्णय लिया गया है। इस सिलसिले में यह बात रेखांकित की गई कि केवल पुलिसिया कार्रवाई से नशे की समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट होना होगा। अभियान की सफलता के लिए एक बहुआयामी और परिणाम देने वाली योजना तैयार करने पर सहमति व्यक्त की गई।
इस अभियान के तहत निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए हैं:
सामाजिक भागीदारी: अभिभावकों, शिक्षकों, चिकित्सकों, शिक्षण संस्थानों, सामाजिक एवं युवा संगठनों और स्थानीय नागरिकों को इस मुहीम से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ा जाएगा।
सख्त कानूनी कार्रवाई: मादक पदार्थों के अवैध व्यापार, तस्करी और बिक्री में लिप्त अपराधियों तथा गिरोहों के विरुद्ध शून्य सहनशीलता की नीति अपनाते हुए कठोर कदम उठाए जाएंगे।
जागरूकता एवं पुनर्वास: नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को सही दिशा में वापस लाने के लिए उपचार और पुनर्वास केंद्रों की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही, समाज में इसके दुष्प्रभावों के प्रति लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
शिक्षण संस्थानों और हॉस्टलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा प्राथमिकता
राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं। खासकर ऐसे विद्यार्थी जो कैंपस से बाहर निजी हॉस्टलों, किराए के मकानों या पीजी सुविधाओं में रह रहे हैं, उनकी सुरक्षा प्रणाली को अधिक पुख्ता बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तय की गई कार्ययोजना:
नियमित गश्त: छात्र-छात्राओं के निवास स्थलों के आसपास और शैक्षणिक परिसरों के निकटवर्ती क्षेत्रों में पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी।
अवैध गतिविधियों पर अंकुश: संदिग्ध गतिविधियों और असामाजिक तत्वों पर कड़ी निगरानी रखते हुए उन पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
संस्थानों से समन्वय: शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन, हॉस्टल संचालकों और स्थानीय पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर संवाद और तालमेल स्थापित किया जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
साइबर सुरक्षा के बढ़ते आयाम और जन-जागरूकता मुहीम
तकनीक के बढ़ते प्रसार के साथ-साथ साइबर अपराधों की चुनौतियों में भी वृद्धि हुई है। बैठक के दौरान पुलिस तंत्र द्वारा साइबर अपराधों पर रोक लगाने और डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए हालिया प्रयासों और हासिल की गई उपलब्धियों की समीक्षा की गई। पुलिस बल की ओर से की गई तकनीकी प्रगति की सराहना करते हुए इसे और अधिक व्यापक बनाने की बात कही गई।
साइबर अपराधों से आमजन को सुरक्षित रखने के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा:
वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा: साइबर ठग प्रायः बुजुर्गों को अपना निशाना बनाते हैं, इसलिए उनके लिए विशेष सुरक्षा और सहायता तंत्र विकसित किया जाएगा।
युवाओं और विद्यार्थियों को जागरूक करना: इंटरनेट और सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग कैसे किया जाए, इस विषय में स्कूलों और कॉलेजों में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
व्यापक प्रचार-प्रसार: आम नागरिकों को डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी के विभिन्न तरीकों के प्रति सतर्क करने के लिए राज्यव्यापी जागरूकता अभियान संचालित किए जाएंगे।
आगामी कुंभ मेले के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा और यातायात प्रबंधन
आगामी विशाल धार्मिक आयोजन कुंभ मेले को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना प्रशासन के सामने एक मुख्य चुनौती है। इसके लिए समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक प्रबंध पूरे करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। कुंभ के दौरान देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा।
कुंभ मेले की व्यवस्थाओं के मुख्य स्तंभ:
भीड़ नियंत्रण और यातायात संचालन: मेले के दौरान ट्रैफिक जाम की समस्या न हो और जनसैलाब को नियंत्रित रखा जा सके, इसके लिए वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक नियंत्रण कक्षों की मदद ली जाएगी।
अंतर-विभागीय समन्वय: पुलिस, अर्धसैनिक बलों, गुप्तचर इकाइयों और नागरिक प्रशासन के बीच आपसी सामंजस्य को और मजबूत किया जाएगा ताकि सूचनाओं का आदान-प्रदान निर्बाध रूप से हो सके।
आधुनिक तकनीक का प्रयोग: सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए सर्विलांस कैमरे, ड्रोन तकनीक और आधुनिक संचार उपकरणों का समुचित उपयोग किया जाएगा।
पुलिस बल का आधुनिकीकरण और जनकल्याण योजनाएं
एक सशक्त और कुशल पुलिस बल ही राज्य में कानून का शासन बनाए रख सकता है। इसके लिए पुलिसकर्मियों की कार्यदक्षता बढ़ाने के साथ-साथ उनके और उनके परिवारों के कल्याण पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई। जवानों का मनोबल ऊंचा रखने के लिए उनकी मूलभूत सुविधाओं में सुधार करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
पुलिस कल्याण और आधुनिकीकरण के प्रमुख क्षेत्र:
स्वास्थ्य और आवासीय सुविधाएं: पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों को बेहतर चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराने तथा उनके लिए आधुनिक एवं स्वच्छ आवासीय परिसरों का निर्माण करने पर जोर दिया गया।
शैक्षणिक और सामाजिक सुरक्षा: पुलिस मॉडर्न स्कूलों के स्तर को सुधारने और ड्यूटी के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं से सुरक्षा के लिए दुर्घटना बीमा योजनाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने पर विचार किया गया।
तकनीकी क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण: बदलते अपराध पैटर्न से निपटने के लिए पुलिस बल को आधुनिक हथियारों, सूचना प्रौद्योगिकी उपकरणों और उन्नत वैज्ञानिक जांच पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि उनकी दक्षता में निरंतर वृद्धि हो सके।


