उत्तराखण्ड ऊर्जा सुरक्षा को अक्षुण्ण बनाए रखने और राज्य की बढ़ती बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से शिष्टाचार भेंट की। इस द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य एजेंडा राज्य में वर्तमान में चल रही चारधाम यात्रा, आगामी कांवड़ यात्रा और मानसून सीजन के दौरान बढ़ने वाली अतिरिक्त बिजली की मांग को बिना किसी बाधा के पूरा करना था। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने राज्य के दीर्घकालिक ऊर्जा परिदृश्य को बदलने के लिए केंद्र सरकार से एक बड़े नीतिगत और वित्तीय सहयोग की पुरजोर वकालत की।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अत्यंत पेशेवर तरीके से राज्य की भौगोलिक चुनौतियों और रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देवभूमि उत्तराखंड न केवल अपने नागरिकों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है, बल्कि देश के कोने-कोने से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी निर्बाध बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए तात्कालिक रूप से केंद्रीय पूल से अतिरिक्त बिजली का आवंटन अत्यंत आवश्यक हो गया है।
चारधाम और कांवड़ यात्रा के लिए अतिरिक्त बिजली की तात्कालिक मांग
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष आंकड़ों के साथ राज्य का पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या ने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिसके कारण वाणिज्यिक और घरेलू दोनों क्षेत्रों में बिजली की खपत में अप्रत्याशित उछाल आया है। इसके साथ ही, आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान भी राज्य के सीमावर्ती और मेला क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है।
इन तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए, मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि केंद्रीय पूल से उत्तराखंड को जुलाई के महीने के लिए 150 मेगावाट और अगस्त के महीने के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत तुरंत उपलब्ध कराई जाए। इस अतिरिक्त बिजली से राज्य के उद्योगों और आम जनता को बिना किसी कटौती के निरंतर बिजली मिल सकेगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्य की इस वास्तविक आवश्यकता को समझा और इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का पूर्ण आश्वासन दिया।
जलविद्युत और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए 7,800 करोड़ की मांग
बैठक का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तराखंड की दीर्घकालिक बिजली उत्पादन क्षमता को मजबूत करने से जुड़ा था। मुख्यमंत्री ने राज्य की निर्माणाधीन और भविष्य की जलविद्युत तथा पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को गति देने के लिए केंद्र सरकार के सामने एक व्यापक वित्तीय खाका रखा। उन्होंने अनुरोध किया कि आगामी पांच वर्षों की अवधि में राज्य को इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 7,800 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण प्रदान किया जाए।
पहाड़ी क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण में भारी लागत आती है और भू-वैज्ञानिक चुनौतियों के कारण काम की गति भी प्रभावित होती है। ऐसे में केंद्रीय वित्तीय सहायता और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण मिलने से इन परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता सुनिश्चित हो सकेगी। इससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और राज्य में स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन तेजी से बढ़ सकेगा, जिससे उत्तराखंड आने वाले समय में देश के अग्रणी ऊर्जा संपन्न राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा।
पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर पूंजीगत वित्तीय सहायता का आग्रह
एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत मांग रखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की सीमाएं अंतरराष्ट्रीय देशों से लगती हैं और यहां का अधिकांश हिस्सा दुर्गम पर्वतीय श्रेणियों से घिरा हुआ है। पहाड़ी राज्य होने के नाते यहां बुनियादी ढांचे के विकास पर होने वाला खर्च मैदानी राज्यों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। इसलिए, उत्तराखंड को भी पूर्वोत्तर राज्यों की भांति विशेष श्रेणी में रखते हुए पूंजीगत वित्तीय सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि यदि उत्तराखंड को यह विशेष वित्तीय सहायता प्राप्त होती है, तो राज्य सरकार बिजली उत्पादन और वितरण के बुनियादी ढांचे को अत्याधुनिक बना सकेगी। इससे दूर-दराज के गांवों तक बिजली की लाइनों को मजबूत किया जा सकेगा और सब-स्टेशनों की क्षमता का उन्नयन संभव होगा। यह कदम राज्य के आर्थिक विकास की गति को तेज करने और पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोकने में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली की क्षमता विस्तार पर जोर
भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए, बैठक में सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोतों के एकीकरण पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा तकनीकी प्रस्ताव रखा। उन्होंने पूर्व में स्वीकृत 500 मेगावाट ऑवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली परियोजना की क्षमता को बढ़ाकर 665 मेगावाट ऑवर किए जाने का आग्रह किया।
इस क्षमता विस्तार की आवश्यकता को समझाते हुए उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उत्पादन के साथ ग्रिड का संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। जब बिजली का उत्पादन अधिक और मांग कम होती है, तब इस अधिशेष बिजली को अत्याधुनिक बैटरी प्रणालियों में संग्रहीत किया जा सकता है, और मांग बढ़ने पर इसे ग्रिड में वापस छोड़ा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने इस संशोधित क्षमता के अनुरूप अतिरिक्त व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया, ताकि परियोजना बिना किसी वित्तीय बाधा के समय पर पूरी हो सके।
मुख्यमंत्री ने जताया केंद्रीय नेतृत्व का आभार
अत्यंत सौहार्दपूर्ण और पेशेवर माहौल में हुई इस बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय विद्युत एवं आवासन तथा शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने से जुड़े सभी विषयों पर केंद्रीय मंत्री का दृष्टिकोण अत्यंत सहयोगात्मक और सकारात्मक रहा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के इस सहयोग से न केवल राज्य के वर्तमान त्योहारों और यात्राओं का सफल संचालन होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के भीतर स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। केंद्र और राज्य सरकार का यह साझा प्रयास उत्तराखंड के समग्र विकास में एक नया अध्याय लिखेगा।


