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छात्रों की गूंज कार्यक्रम में गरजे राहुल गांधी, पेपर लीक को बताया साढ़े सात करोड़ युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ – छात्रों की गूंज कार्यक्रम में रो पड़े लोग, जब पेपर लीक की शिकार दिवंगत रिया थापा के पिता ने सुनाई संघर्ष की कहानी

छात्रों की गूंज कार्यक्रम के मंच से आज देश की शिक्षा व्यवस्था, रोजगार नीति और भर्ती परीक्षाओं की शुचिता को लेकर एक बड़ा राजनैतिक और सामाजिक विमर्श शुरू हो गया है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मूसलाधार बारिश के बीच आयोजित इस भव्य युवा संवाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शिरकत की। उन्होंने देश में लगातार हो रही पेपर लीक की घटनाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रशासनिक अपारदर्शिता के मुद्दे को लेकर वर्तमान व्यवस्था पर तीखे प्रहार किए। कांग्रेस नेता ने अपने संबोधन में एक अत्यंत चिंताजनक आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि पिछले एक दशक के भीतर देश में हुई विभिन्न प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के कारण लगभग साढ़े सात करोड़ युवाओं का भविष्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित हुआ है। यह आयोजन केवल एक राजनीतिक रैली मात्र नहीं रहा, बल्कि इसने उन लाखों परिवारों की पीड़ा को आवाज दी है जो अपने बच्चों को एक अदद सरकारी नौकरी दिलाने के लिए जीवनभर की पूंजी दांव पर लगा देते हैं।

देहरादून के ऐतिहासिक बन्नू कॉलेज मैदान में आयोजित इस महासभा में भाग लेने के लिए राहुल गांधी जैसे ही जौलीग्रांट हवाई अड्डे पर पहुंचे, वहां पहले से मौजूद भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इस कार्यक्रम की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए पूरे राज्य से युवा और छात्र सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर जुटना शुरू हो गए थे। हालांकि, आयोजन से ठीक पहले एक अत्यंत दुखद दुर्घटना भी सामने आई, जिसमें कांग्रेस के समर्पित स्थानीय नेता अमर मेहता का आकस्मिक निधन हो गया। कार्यक्रम स्थल पर जाने से पूर्व राहुल गांधी ने सीधे स्वर्गीय अमर मेहता के आवास का रुख किया। वहां उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की, उन्हें ढांढस बंधाया और अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं। कांग्रेस नेता ने इस क्षति पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अमर मेहता का असमय जाना पूरी पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति है और दुख की इस घड़ी में समूचा संगठन पीड़ित परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़ा है।

मूसलाधार बारिश में भी कम नहीं हुआ देश के नौनिहालों का हौसला
देहरादून का मौसम सुबह से ही खराब था और लगातार तेज बारिश हो रही थी, परंतु व्यवस्था जनित विसंगतियों से जूझ रहे युवाओं का हौसला मौसम की मार पर भारी पड़ा। बन्नू कॉलेज मैदान में पैर रखने की जगह नहीं थी और हजारों की संख्या में पंजीकृत छात्र छाते लेकर या बारिश में भीगते हुए भी अपने अधिकारों की बात सुनने और अपनी समस्याओं को उठाने के लिए डटे रहे। कांग्रेस के संगठनात्मक तंत्र के अनुसार, इस विशेष संवाद सत्र के लिए डिजिटल माध्यमों से रिकॉर्ड संख्या में छात्रों ने अपना अग्रिम पंजीकरण कराया था। कार्यक्रम के मुख्य मंच से जब युवाओं ने पेपर लीक, बेरोजगारी की मार, और चयन बोर्डों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी को लेकर सीधे तीखे सवाल पूछना शुरू किया, तो पूरा मैदान युवाओं के नारों से गूंज उठा।

इस विमर्श को अकादमिक और व्यावहारिक धरातल पर प्रखरता देने के लिए प्रसिद्ध शिक्षक अभिनय सर ने भी मंच से अपनी बात रखी। उन्होंने पेपर लीक की इस क्रोनिक बीमारी का बहुत ही तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक होना कोई तात्कालिक या केवल वर्तमान पीढ़ी की समस्या नहीं है। यदि इस प्रशासनिक सड़न को यहीं नहीं रोका गया, तो इसका एक बेहद घातक प्रभाव देश की आने वाली पीढ़ियों की बौद्धिक क्षमता और राष्ट्रीय उत्पादकता पर पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय केवल राजनीतिक बयानबाजी या खोखले आश्वासनों का नहीं है, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया और प्रशासनिक ढांचे में आमूलचूल और कठोर कानूनी सुधार करने की नितांत आवश्यकता है।

रिया थापा की स्मृतियों से भावुक हुआ समूचा पंडाल
इस पूरे आयोजन का सबसे संवेदनशील और भावुक कर देने वाला क्षण वह था, जब मंच पर लगी विशाल डिजिटल स्क्रीन पर देहरादून की दिवंगत छात्रा रिया थापा की तस्वीर प्रदर्शित की गई। रिया थापा ने उत्तराखंड के बहुचर्चित पेपर लीक कांड से आहत होकर और परीक्षा रद्द होने के मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। जैसे ही रिया की मुस्कुराती हुई तस्वीर स्क्रीन पर आई, पूरे परिसर में सन्नाटा पसर गया और वहां उपस्थित हजारों आंखें नम हो गईं। यह इस बात का सीधा प्रमाण था कि प्रशासनिक विफलताएं किस प्रकार देश की होनहार प्रतिभाओं की जान ले रही हैं।

राहुल गांधी ने इस घटना को व्यवस्था के माथे पर एक गहरा कलंक बताते हुए रिया के पिता राजेश थापा को अत्यंत सम्मानपूर्वक मंच पर आमंत्रित किया। भरे गले से राजेश थापा ने अपनी बेटी के संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि रिया एक असाधारण रूप से कठिन परिश्रम करने वाली छात्रा थी, जो अपने सुनहरे भविष्य के लिए रात के तीन-तीन बजे तक जागकर पढ़ाई करती थी। उन्होंने अत्यंत मार्मिक ढंग से बयां किया कि जब रिया को परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के कारण पूरी प्रक्रिया के दूषित होने की पुख्ता जानकारी मिली, तो वह गहरे अवसाद में चली गई थी और अंततः उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। यह आप बीती सुनकर मंच पर मौजूद नेताओं सहित आम जनमानस के रोंगटे खड़े हो गए।

एक अभ्यर्थी की असफलता से टूटती है पूरे परिवार की रीढ़
इस मार्मिक दास्तां को सुनने के बाद राहुल गांधी ने देश के मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के आर्थिक और सामाजिक ढांचे पर अपनी बात रखी। उन्होंने बहुत ही व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि जब कोई युवा किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है, तो वह कमरा बंद करके अकेला संघर्ष नहीं कर रहा होता। उसके उस कठिन संघर्ष में उसका पूरा परिवार, माता-पिता की गाढ़ी कमाई और भाई-बहनों की आकांक्षाएं भी शामिल होती हैं। देश का एक बहुत बड़ा युवा वर्ग अपनी सामाजिक जिंदगी, त्योहार, खुशियां और आराम के वर्ष केवल इसलिए त्याग देता है ताकि वह एक सुरक्षित भविष्य पा सके।

उन्होंने आगे कहा कि भारत के ग्रामीण और शहरी मध्यम वर्ग के पास आज भी सामाजिक सुरक्षा और प्रतिष्ठा का एकमात्र साधन सरकारी नौकरी ही है। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए माता-पिता अपनी पुश्तैनी जमीनें गिरवी रख देते हैं, बैंकों या साहूकारों से भारी ब्याज पर कर्ज लेते हैं और अपनी बुनियादी जरूरतों में कटौती करते हैं। ऐसे में जब किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र चंद रुपयों के लालच में लीक कर दिया जाता है या पूरी भर्ती प्रक्रिया को किसी घोटाले की भेंट चढ़ा दिया जाता है, तो वह केवल एक परीक्षा का रद्द होना नहीं होता, बल्कि वह उस गरीब परिवार की रीढ़ की हड्डी तोड़ने जैसा होता है। इससे युवाओं का पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्षता के सिद्धांत से भरोसा उठ जाता है।

विनिर्माण क्षेत्र की कमजोरी और रोजगार के सिकुड़ते अवसर
अपने विस्तृत नीतिगत संबोधन में राहुल गांधी ने देश की आर्थिक नीतियों पर भी खुलकर बात की और बेरोजगारी के मूल कारणों को छुआ। उन्होंने तर्क दिया कि देश में औद्योगिक विकास और विशेषकर विनिर्माण क्षेत्र लगातार कमजोर हो रहा है। बड़ी उत्पादन इकाइयों और उद्योगों के अभाव में निजी क्षेत्र में सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार के अवसर बेहद सीमित हो गए हैं। जब निजी क्षेत्र युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रहता है, तो सरकारी नौकरियों पर निर्भरता और प्रतिस्पर्धा दोनों कई गुना बढ़ जाती हैं।

ऐसी अभूतपूर्व और कठिन परिस्थितियों में यह अनिवार्य हो जाता है कि जो भी सरकारी भर्तियां निकाली जाएं, उनमें शुचिता और पूर्ण पारदर्शिता का स्तर शत-प्रतिशत हो। देश के युवाओं को किसी भी सरकार या तंत्र से केवल एक ही प्राथमिक भरोसा चाहिए कि यदि वे दिन-रात एक करके मेहनत कर रहे हैं, तो उनकी उस योग्यता और लगन का सही और निष्पक्ष मूल्यांकन होगा। यदि चयन प्रक्रियाओं में भाई-भतीजावाद या भ्रष्टाचार की थोड़ी सी भी गुंजाइश बचती है, तो यह देश की युवा शक्ति की ऊर्जा को कुंठा में बदलने का काम करती है।

मानवीय संवेदनाओं और भविष्य की राजनैतिक रणनीति का ताना-बाना
इस सघन राजनैतिक और सामाजिक कार्यक्रम के बीच राहुल गांधी का एक बेहद मानवीय और आत्मीय चेहरा भी देखने को मिला। जब वह दिवंगत अमर मेहता के परिजनों से मिलकर वापस लौट रहे थे, तो रास्ते में उनकी नजर हुमेरा नाम की एक छोटी बच्ची पर पड़ी। उन्होंने अपने काफिले को रोककर उस बच्ची से बहुत ही आत्मीयता से मुलाकात की। हुमेरा ने बाद में मीडिया को अत्यंत उत्साहित होकर बताया कि राहुल गांधी ने उनसे उनकी स्कूली शिक्षा, पसंदीदा विषयों और भविष्य के सपनों को लेकर बहुत ही आत्मीय चर्चा की। इस संक्षिप्त मुलाकात ने स्थानीय लोगों के दिलों पर एक गहरी छाप छोड़ी।

इससे पहले, जब सुबह राहुल गांधी का विमान हवाई अड्डे पर उतरा था, तो उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य सहित कई विधायकों और पूर्व मंत्रियों ने उनकी अगवानी की थी। प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल ने उत्तराखंड की प्राचीन परंपरा और संस्कृति के प्रतीक स्वरूप बदरीनाथ धाम की पवित्र और पारंपरिक भोजपत्र से निर्मित माला भेंट कर उनका अभिनंदन किया था।

पार्टी के रणनीतिकारों के अनुसार, यह कार्यक्रम दरअसल अखिल भारतीय स्तर पर युवाओं और छात्रों के अधिकारों के लिए चलाए जा रहे एक राष्ट्रव्यापी जन-संवाद अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस सफल युवा संवाद की समाप्ति के तुरंत बाद, राहुल गांधी ने देहरादून में ही आयोजित कांग्रेस पार्लियामेंट्री बोर्ड की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च-स्तरीय बैठक में भी भाग लिया। इस बंद कमरे की बैठक में आगामी सांगठनिक फेरबदल, जमीनी स्तर पर जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने की रूपरेखा और आने वाले चुनावों के लिए एक अचूक और आक्रामक रणनीति तैयार करने पर गहन मंथन किया गया।

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