प्रभारी प्रधानाचार्य की सुरक्षा और शिक्षा के मंदिर की गरिमा को तार-तार करने वाली एक बेहद सनसनीखेज और हृदयविदारक घटना उत्तराखंड के शांत पर्वतीय जनपद बागेश्वर से सामने आई है। यहाँ के राजकीय इंटर कॉलेज भटखोला में कार्यरत प्रभारी प्रधानाचार्य दयानंद टम्टा की शनिवार सुबह विद्यालय पहुंचने से ठीक पहले घात लगाकर बैठे एक हमलावर ने चाकू मारकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस जघन्य हत्याकांड का सीधा आरोप इसी विद्यालय में प्रशासनिक कार्य देखने वाले वरिष्ठ सहायक यानी मुख्य लिपिक नवल किशोर सोराड़ी पर लगा है। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद आरोपी कर्मचारी मौके से फरार हो गया, जिसकी सरगर्मी से तलाश करने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक जाल बिछा दिया है। इस वीभत्स घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में भारी जनाक्रोश व्याप्त है और शिक्षा जगत गहरे सदमे में है।
बागेश्वर जनपद के अंतर्गत आने वाले सैंज क्षेत्र के निवासी दयानंद टम्टा शनिवार सुबह अपनी नियमित दिनचर्या के अनुसार कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए घर से निकले थे। उन्होंने रोज की तरह मुख्य मार्ग पर अपनी गाड़ी खड़ी की और पैदल ही विद्यालय परिसर की ओर कदम बढ़ाए। वह मुख्य सड़क से स्कूल को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर अभी पहुंचे ही थे कि विद्यालय से मात्र एक सौ पचास मीटर की दूरी पर पहले से ही छिपकर बैठे आरोपी लिपिक नवल किशोर सोराड़ी ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। हमलावर ने अत्यंत आक्रामक ढंग से प्रभारी प्रधानाचार्य के पेट में चाकू घोंप दिया, जिससे उनके आंतरिक अंगों में गंभीर चोटें आईं और वह लहुलूहान होकर वहीं सड़क पर गिर पड़े। जब तक आस-पास के लोग कुछ समझ पाते या सहायता के लिए आगे बढ़ते, आरोपी मौका देखकर पहाड़ी रास्तों से रफूचक्कर हो चुका था।
विभागीय खींचतान और वेतन रोकने का विवाद बना हत्या की वजह
इस सनसनीखेज हत्याकांड के पीछे के कारणों को टटोलने में जुटी पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक गंभीर प्रशासनिक और विभागीय विवाद सामने आया है। जांच अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी वरिष्ठ सहायक नवल किशोर सोराड़ी का पिछले लगभग चार महीनों से मासिक वेतन रोका गया था। विभागीय कार्यों में लगातार घोर लापरवाही बरतने, अनुशासनहीनता दिखाने और उच्चाधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने की शिकायतों के बाद उनके खिलाफ यह प्रशासनिक अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी। वेतन रुकने की वजह से आरोपी कर्मचारी भीतर ही भीतर अत्यंत क्षुब्ध चल रहा था और वह इसके लिए सीधे तौर पर प्रभारी प्रधानाचार्य को जिम्मेदार मान रहा था। पुलिस प्रशासन वर्तमान में इसी रंजिश को मर्डर का मुख्य आधार मानकर तफ्तीश को आगे बढ़ा रहा है, हालांकि अन्य तमाम पहलुओं की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है।
इस मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब प्रशासनिक अधिकारियों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी का गुस्सा केवल प्रधानाचार्य तक सीमित नहीं था। क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी आशाराम ने पुलिस को दी गई अपनी लिखित और मौखिक जानकारी में बताया कि घटना से ठीक एक दिन पहले यानी शुक्रवार को आरोपी लिपिक ने उन्हें भी फोन पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। उसने फोन पर बेहद आक्रामक लहजे में कहा था कि उसका रुका हुआ वेतन तत्काल जारी किया जाए, अन्यथा वह कार्यालय आकर मारपीट करेगा। इस इनपुट के सामने आने के बाद जिला पुलिस की विशेष शाखा अब आरोपी के फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और पिछले कुछ महीनों के विभागीय पत्राचारों को खंगालने में जुट गई है, ताकि इस सोची-समझी साजिश की कड़ियों को पूरी तरह से जोड़ा जा सके।
आरोपी को दबोचने के लिए पुलिस ने बिछाया नाकाबंदी का जाल
वारदात को अंजाम देकर फरार हुए आरोपी नवल किशोर सोराड़ी को पकड़ना पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। आरोपी मूल रूप से सीमावर्ती चंपावत जिले के पाटी क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है, जिसके कारण पुलिस को अंदेशा है कि वह जिले की सीमा पार कर अपने गृह क्षेत्र या किसी अन्य राज्य में शरण लेने का प्रयास कर सकता है। बागेश्वर के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस की कई खोजी टीमों का गठन किया गया है, जो संभावित ठिकानों, रिश्तेदारों के घरों और जंगलों में लगातार दबिश दे रही हैं। इसके साथ ही पूरे जिले की सीमाओं को पूरी तरह से सील कर दिया गया है और हर आने-जाने वाले वाहन की सघन चेकिंग की जा रही है।
दूसरी तरफ, जैसे ही प्रभारी प्रधानाचार्य दयानंद टम्टा को लहूलुहान अवस्था में जिला अस्पताल लाया गया, वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर जंगल की आग की तरह फैलते ही जिला अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील हो गया। प्रांतीय शिक्षक संघ के तमाम बड़े पदाधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक, स्थानीय ग्रामीण और मृतक के परिजन भारी संख्या में चिकित्सालय में एकत्रित हो गए। आक्रोशित शिक्षकों और परिजनों ने रोष जताते हुए स्पष्ट कह दिया कि जब तक हत्यारे लिपिक की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक वे शव का विच्छेदन यानी पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे। अस्पताल परिसर में बढ़ते तनाव और कानून व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ते देख जिला प्रशासन ने एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी की टुकड़ियों को तैनात कर दिया है।
दो दशकों की बेदाग सेवा और परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दिवंगत प्रभारी प्रधानाचार्य दयानंद टम्टा शिक्षा विभाग में एक अत्यंत सम्मानित और कर्मठ अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। वह वर्ष दो हजार पांच से लगातार राजकीय इंटर कॉलेज भटखोला में अपनी सेवाएं दे रहे थे और पिछले तीन वर्षों से वह पूर्ण निष्ठा के साथ प्रभारी प्रधानाचार्य के पद का दायित्व संभाल रहे थे। उनकी पहचान एक बेहद शांत, अनुशासित और छात्रों के प्रति समर्पित शिक्षक की थी। इस असमय और क्रूर हत्याकांड के कारण उनके हंसते-खेलते परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पीछे परिवार में उनकी धर्मपत्नी, एक चौबीस वर्षीय बेटा और एक बीस वर्ष की बेटी है, जो वर्तमान में अपनी उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बच्चों के सिर से पिता का साया इस तरह उठ जाने से पूरे गाँव में मातम पसरा हुआ है।
पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक टीम ने घटना स्थल से खून के नमूने और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र कर लिए हैं। आस-पास के दुकानदारों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं ताकि अदालत में आरोपी के खिलाफ एक मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी शिक्षकों और परिजनों को आश्वासन दिया है कि कानून अपना काम बहुत मुस्तैदी से कर रहा है और आरोपी किसी भी कीमत पर बच नहीं पाएगा। पुलिस का मानना है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही इस बात का पूरी तरह से पर्दाफाश हो सकेगा कि क्या इस जघन्य कृत्य में विभागीय खुन्नस के अलावा कोई अन्य बाहरी तत्व या मानसिक विकार भी शामिल था। इस दर्दनाक घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों के सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है।


