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देहरादून महायोजना-2041 को व्यावहारिक बनाने की कवायद, उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी बोले- जनभागीदारी ही सबसे बड़ी ताकत

देहरादून महायोजना-2041 को उत्तराखंड की राजधानी के भविष्य की आवश्यकताओं और जनआकांक्षाओं के अनुरूप एक आदर्श और व्यावहारिक स्वरूप देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद तेज हो गई है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित किए जा रहे व्यापक जनसंवाद और लोकतांत्रिक विचार-विमर्श अभियान के तहत शनिवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस महाअभियान के दसवें दिन उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण के राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स, तहसील चौक स्थित कार्यालय में जनसुनवाई शिविर लगाया गया। यहाँ वरिष्ठ प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों की उपस्थिति में नगर के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों और भूमि स्वामियों ने भविष्य के शहरी नियोजन से संबंधित अपनी चिंताओं, आपत्तियों और बहुमूल्य सुझावों को साझा किया। यह जनसुनवाई राजधानी के सतत और सुव्यवस्थित विकास की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

राजधानी के विभिन्न वार्डों और क्षेत्रों से आए लोगों की भारी उपस्थिति यह स्पष्ट करती है कि दून घाटी के निवासी अपने शहर की भौगोलिक और ढांचागत संरचना को लेकर बेहद गंभीर हैं। इस विशेष शिविर में सुबह से ही आम जनता, विभिन्न व्यापारिक महासंघों के प्रतिनिधियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं का आना शुरू हो गया था। अधिकारियों की तकनीकी टीम ने पूरी मुस्तैदी के साथ प्रत्येक नागरिक की बात को सुना और उनके द्वारा प्रस्तुत लिखित आपत्तियों तथा सुझावों को आधिकारिक पंजिका में दर्ज किया। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी बीस वर्षों के लिए तैयार किया जा रहा यह नीतिगत दस्तावेज किसी बंद कमरे में बैठकर नहीं, बल्कि धरातल पर रहने वाली जनता की वास्तविक आवश्यकताओं के आधार पर तैयार किया जाए।

बढ़ते शहरीकरण के बीच यातायात और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर बल
जनसुनवाई के दौरान जो सबसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दा उभरकर सामने आया, वह शहर का वर्तमान यातायात ढांचा और पार्किंग की विकराल होती समस्या रही। प्रबुद्ध नागरिकों और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि देहरादून में हाल के वर्षों में वाहनों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जबकि उस अनुपात में सड़कों का विस्तार और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों का विकास नहीं हो सका है। प्रतिभागियों ने पुरजोर तरीके से यह सुझाव दिया कि इस नई योजना के भीतर आगामी दो दशकों की जरूरतों का अग्रिम आकलन करते हुए बहुस्तरीय पार्किंग परिसरों का निर्माण अनिवार्य किया जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, शहर के मुख्य चौराहों पर लगने वाले जाम से मुक्ति पाने के लिए वैकल्पिक संपर्क मार्गों के विकास, आंतरिक सड़कों के चौड़ीकरण और सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को अत्याधुनिक बनाने पर विशेष बल दिया गया। नागरिकों का स्पष्ट मत था कि यदि अभी से एक सुदृढ़ और दूरदर्शी परिवहन नेटवर्क की रूपरेखा तैयार नहीं की गई, तो भविष्य में शहरी आबादी का दबाव संभालना प्रशासनिक तंत्र के लिए अत्यंत दुष्कर हो जाएगा। इसके साथ ही पेयजल आपूर्ति लाइनों के आधुनिकीकरण, सीवरेज नेटवर्क के विस्तार और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए भी आधुनिक तकनीकी मॉडल अपनाने की मांग उठाई गई।

प्रकृति और प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करने की पुरजोर वकालत
देहरादून की मूल पहचान उसकी नैसर्गिक सुंदरता, ठंडी आबोहवा और समृद्ध पर्यावरण से रही है। इस जनसंवाद कार्यक्रम में शामिल हुए पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के कारण दून घाटी का पारंपरिक स्वरूप संकट में है। नागरिकों ने मांग की कि विकास के नए नियमों को अंतिम रूप देते समय हरित क्षेत्रों, संरक्षित वनों, नदी घाटियों और खुले सार्वजनिक पार्कों के क्षेत्रफल से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और उनके संरक्षण के लिए नीति में कठोर दंडात्मक और सुरक्षात्मक प्रावधान शामिल किए जाने चाहिए।

सत्र के दौरान वर्षा जल निकासी की लचर व्यवस्था के कारण मानसून के दिनों में होने वाले जलभराव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कई प्रबुद्ध नागरिकों ने भूजल स्तर में आ रही लगातार गिरावट को रोकने के लिए प्रत्येक नए आवासीय और व्यावसायिक भवन में अनिवार्य रूप से वर्षा जल संचयन प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया। जनभावना यह थी कि हमें ऐसा विकास चाहिए जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु और पर्याप्त जल दे सके, न कि केवल बहुमंजिला इमारतों का अंबार खड़ा करे।

स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि उपयोग और विनियमों में लचीलापन
शिविर में उपस्थित भूमि स्वामियों और संस्थागत विकासकर्ताओं ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित भूमि उपयोग और विकास नियंत्रण नियमों पर अपनी व्यावहारिक आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका तर्क था कि कई स्थानों पर धरातलीय स्थिति और सरकारी नक्शों में विसंगतियां हैं, जिन्हें दूर किया जाना अत्यंत आवश्यक है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण की तकनीकी और कानूनी विंग ने इन सभी तकनीकी बिंदुओं को बहुत बारीकी से नोट किया। अधिकारियों ने जनता को आश्वस्त किया कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और प्रत्येक वैध दावे तथा सुझाव का विशेषज्ञ स्तर पर सूक्ष्मता से परीक्षण किया जाएगा।

प्राधिकरण ने आगामी कार्यक्रमों की श्रृंखला साझा करते हुए बताया कि देहरादून महायोजना-2041 के अंतर्गत आने वाले सेक्टर-11 के लिए विशेष जनसुनवाई आगामी बीस जुलाई दो हजार छब्बीस को आयोजित की जाएगी। इस सुनवाई के लिए सुद्धोवाला स्थित राजकीय बालिका पॉलिटेक्निक कॉलेज के परिसर को नियत किया गया है। विकास प्राधिकरण ने इस नियत सेक्टर के सभी निवासियों, भू-स्वामियों, सामाजिक संस्थाओं और व्यापारिक संगठनों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि और समय पर बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस योजना को बेहतर बनाने में अपना सक्रिय योगदान दें।

प्रशासनिक प्रतिबद्धता: व्यावहारिक और जनहितकारी दस्तावेज बनाने का संकल्प
जनसुनवाई की सफलता और बढ़ते नागरिक रुझान पर बात करते हुए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि यह योजना केवल एक वैधानिक या प्रशासनिक दस्तावेज मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी राजधानी के स्वर्णिम भविष्य की एक व्यापक और दीर्घकालिक विकास दृष्टि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों द्वारा दिए जा रहे सुझाव इस योजना को अधिक व्यावहारिक, दोषमुक्त और जनहितकारी बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि किसी भी प्रगतिशील शहर के सुनियोजित विकास की सबसे बड़ी शक्ति वहां की जनता की सक्रिय भागीदारी ही होती है।

इसी क्रम में प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने प्रशासनिक पारदर्शिता का भरोसा देते हुए कहा कि जनसुनवाई के माध्यम से प्राप्त होने वाले हर एक सुझाव और आपत्ति का बहुत ही व्यवस्थित तरीके से अभिलेखीकरण किया जा रहा है। इन सभी प्रस्तावों को नगर नियोजन विशेषज्ञों, पर्यावरणविदों और कानूनी जानकारों के समक्ष रखा जाएगा, ताकि उनका गहन तकनीकी और विधिक परीक्षण किया जा सके। सरकार का अंतिम लक्ष्य एक ऐसी संतुलित महायोजना को धरातल पर उतारना है जो आधुनिक विकास, प्रकृति के संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच एक आदर्श सामंजस्य स्थापित करते हुए भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए राजधानी को पूरी तरह तैयार कर सके।

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