देहरादून मसूरी मार्ग पर हाल ही में हुई भारी बारिश और भूस्खलन के कारण प्रभावित हुए यातायात को पुनः सामान्य बनाने के लिए उत्तराखंड शासन पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने शुक्रवार को बिना किसी पूर्व सूचना के मौके पर पहुंचकर जमीनी स्थितियों का जायजा लिया। इस औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने मसूरी, कोल्हूखेत और पानी वाले बैंड के पास जारी मरम्मत कार्यों और नए बन रहे डबल लेन सेतु का बारीकी से परीक्षण किया। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आम जनता और पर्यटकों की सुरक्षा सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है, इसलिए सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर हर हाल में पूरे किए जाएं।
पानी वाले बैंड पर भूस्खलन से बिगड़ी स्थिति और तात्कालिक कदम
देहरादून मसूरी मार्ग के किलोमीटर 20 के पास स्थित पानी वाले मोड पर 20 जुलाई 2026 की देर रात एक बड़ा हादसा हुआ था। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते सड़क का लगभग 20 मीटर लंबा हिस्सा ढह गया था, जिससे नीचे बना पुश्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना के कारण मार्ग की चौड़ाई घटकर महज ढाई मीटर रह गई थी, जिससे इस व्यस्त पहाड़ी रास्ते पर वाहनों की आवाजाही बेहद खतरनाक हो गई थी।
घटना की सूचना मिलते ही लोक निर्माण विभाग ने तुरंत संज्ञान लिया और बिना किसी देरी के राहत कार्य शुरू कर दिए। मौके पर भारी जेसीबी मशीनें लगाकर मलबे को हटाने और रास्ते को चौड़ा करने का काम प्राथमिकता पर शुरू किया गया। वर्तमान में विभाग द्वारा अतिरिक्त पहाड़ी कटान के लिए आसपास के क्षेत्रों में सहमति और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि गाड़ियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पर्याप्त स्थान तैयार किया जा सके। मंत्री सतपाल महाराज ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक स्थायी निर्माण पूरा नहीं होता, तब तक अस्थायी व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
भूस्खलन की रोकथाम के लिए विशेषज्ञ संस्था का सहारा
पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों का बार-बार दरकना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है। इस समस्या का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान निकालने के लिए उत्तराखंड की विशेषज्ञ संस्था ‘यूएलएलएमसी’ की मदद ली जा रही है। यह संस्था ढलान उपचार यानी स्लोप ट्रीटमेंट में महारत रखती है।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने बताया कि विशेषज्ञ दल ने देहरादून मसूरी मार्ग के किलोमीटर 20 और किलोमीटर 25 वाले बेहद संवेदनशील हिस्सों का गहन वैज्ञानिक अध्ययन किया है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य उन कमजोर स्थानों की पहचान करना है जहां भविष्य में भूस्खलन का खतरा सबसे ज्यादा हो सकता है। संस्था की रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही सुरक्षात्मक इंजीनियरिंग कार्य शुरू किए जाएंगे, जिससे पहाड़ी के दरकने की आशंका को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके और यात्रा को सुरक्षित बनाया जा सके।
12 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है आधुनिक डबल लेन पुल
देहरादून मसूरी मार्ग पर स्थित किलोमीटर 18 का हिस्सा वर्षों से एक संकरे और क्षतिग्रस्त सिंगल लेन पुल के कारण यातायात के लिए बाधा बना हुआ था। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने यहाँ 12 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत से 60 मीटर लंबे डबल लेन स्टील बॉक्स सेतु के निर्माण को हरी झंडी दी थी। यह नया पुल ‘क्लास ए/70आर’ लोडिंग मानकों के अनुसार तैयार किया जा रहा है, जो भारी से भारी वाहनों का वजन आसानी से उठाने में सक्षम होगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए मंत्री सतपाल महाराज ने संतोष व्यक्त किया कि पुल का ढांचागत निर्माण यानी फैब्रिकेशन का काम शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में जमीनी स्तर पर ढांचे को स्थापित करने का काम तेजी से चल रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि 30 जुलाई 2026 तक इस पूरे ढांचे की स्थापना का काम अंतिम रूप से संपन्न कर लिया जाए।
पाइलिंग कार्य और तकनीकी प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट
निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने मंत्री को निर्माण की बारीकियों और अब तक हुई प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। पुल के मजबूत आधार के लिए दोनों ओर पाइलिंग (खंभों की नींव) का काम बेहद सतर्कता से किया जा रहा है:
देहरादून की ओर का काम: देहरादून वाले छोर पर तय की गई 7 पाइलों की खुदाई और कंक्रीटिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त शेष 2 पाइलों पर काम अंतिम चरण में है, जिसे 30 जुलाई 2026 तक हर हाल में खत्म कर लिया जाएगा। काम को रफ्तार देने के लिए यहाँ विशेष रिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मसूरी की ओर का काम: मसूरी वाले छोर पर कुल 9 पाइलें बनाई जानी हैं। इनमें से 3 पाइलों की खुदाई और कंक्रीटिंग पूरी हो चुकी है, जबकि 2 अन्य पाइलों पर खुदाई का काम प्रगति पर है। शेष हिस्से को तय समय के भीतर पूरा करने के लिए मजदूरों और मशीनों की संख्या बढ़ा दी गई है।
उच्च अधिकारियों की मौजूदगी और कड़े निर्देश
इस उच्चस्तरीय निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता राजेश शर्मा, अधीक्षण अभियंता ओ.पी. सिंह और अधिशासी अभियंता राजेश कुमार भी मौके पर उपस्थित रहे। मंत्री सतपाल महाराज ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसून के दौरान पर्वतीय मार्गों पर भूस्खलन और सड़कों का टूटना आम बात है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की तत्परता और पूर्व तैयारी से आपदा के असर को कम किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि काम में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता का लगातार परीक्षण किया जाए और काम की गति ऐसी रखी जाए जिससे आम जनता को कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े।
पर्यटन और स्थानीय आजीविका के लिए इस मार्ग का महत्व
देहरादून मसूरी मार्ग न केवल देहरादून और मसूरी के बीच संपर्क का मुख्य जरिया है, बल्कि यह उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग की रीढ़ भी माना जाता है। रोजाना हजारों पर्यटक, स्थानीय निवासी, स्कूली बच्चे और व्यावसायिक वाहन इसी रास्ते से होकर गुजरते हैं। ऐसे में सड़क का थोड़ा सा हिस्सा भी खराब होना पूरे क्षेत्र की व्यवस्था को प्रभावित कर देता है।
नए डबल लेन पुल का निर्माण पूरा होने और संवेदनशील पहाड़ियों का सुरक्षात्मक उपचार होने के बाद, इस मार्ग पर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से स्थायी राहत मिलेगी। साथ ही, बारिश के मौसम में होने वाले हादसों का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे न केवल पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी निर्बाध रूप से हो सकेगी।
समयबद्धता और सुरक्षा पर सरकार का जोर
लोक निर्माण मंत्री के इस औचक निरीक्षण से यह साफ हो गया है कि राज्य सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को तय सीमा में पूरा करने के लिए पूरी तरह गंभीर है। 30 जुलाई 2026 तक का लक्ष्य यह सुनिश्चित करेगा कि मानसून के बाकी दिनों में मसूरी आने-जाने वाले लोगों को किसी बड़ी परेशानी से न गुजरना पड़े। सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करते हुए यदि यह निर्माण कार्य समय पर पूरा होता है, तो यह पहाड़ी क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास का एक बेहतरीन उदाहरण बनेगा।


