देहरादून में राहुल गांधी के कार्यक्रम की व्यापक तैयारियों के बीच बन्नू स्कूल मैदान से एक अत्यंत दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। राष्ट्रीय स्तर के इस बड़े राजनीतिक आयोजन के लिए बनाए जा रहे विशाल पंडाल के निर्माण कार्य के दौरान अचानक एक भारी एल्यूमिनियम का खंभा गिर गया। इस अप्रत्याशित हादसे की चपेट में आने से पैंसठ वर्षीय वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमर मेहता गंभीर रूप से चोटिल हो गए। घटना के तुरंत बाद वहां उपस्थित कार्यकर्ताओं और सहयोगियों द्वारा उन्हें अत्यंत गंभीर अवस्था में नजदीकी चिकित्सालय ले जाया गया, जहां गहन चिकित्सा कक्ष में विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार प्रारंभ किया गया। हालांकि, सिर में अत्यधिक गहरी चोट लगने के कारण चिकित्सक उनके जीवन की रक्षा नहीं कर सके और उपचार के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली। इस दुखद समाचार के सामने आने के बाद पूरे प्रदेश के राजनीतिक हलकों, विशेषकर कांग्रेस संगठन में गहरी शोक की लहर दौड़ गई है।
यह पूरी घटना गुरुवार की शाम को उस समय घटित हुई जब आयोजन स्थल पर जर्मन तकनीक वाले हैंगर टेंट का अंतिम निर्माण कार्य चल रहा था। एक जिम्मेदार और पेशेवर पत्रकारिता के दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस घटना ने सार्वजनिक आयोजनों में पंडाल निर्माण के दौरान बरती जाने वाली तकनीकी सावधानियों और सुरक्षा मानकों को लेकर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटनाक्रम की विस्तृत पृष्ठभूमि और आयोजन स्थल की स्थिति
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आगामी राजनीतिक रैली और जनसभा की रूपरेखा तय की जा रही थी। इस कार्यक्रम को विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को केंद्रित करते हुए एक बड़े मंच के रूप में तैयार किया जा रहा था। गुरुवार की शाम करीब छह बजे जब कार्य अंतिम चरण में था, तब वरिष्ठ नेता अमर मेहता अन्य स्थानीय पदाधिकारियों और सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ व्यवस्थाओं का जायजा लेने और तैयारियों का निरीक्षण करने आयोजन स्थल पर पहुंचे थे।
वहां उपस्थित तकनीकी टीम विशालकाय पंडाल की अंतिम फिटिंग और ढांचागत मजबूती को जांचने में व्यस्त थी। इसी दौरान, अचानक असंतुलन या तकनीकी चूक के कारण ऊपरी हिस्से में लगा एल्यूमिनियम का एक अत्यंत भारी खंभा सीधे नीचे की ओर आ गिरा। दुर्भाग्यवश, अमर मेहता ठीक उसी स्थान के समीप खड़े थे और वह भारी खंभा सीधे उनके सिर पर लगा। चोट इतनी भीषण थी कि वे वहीं पर अचेत होकर गिर पड़े, जिससे मैदान पर मौजूद कार्यकर्ताओं में अफरा-तफरी मच गई।
चिकित्सालय में आपातकालीन उपचार और डॉक्टरों के प्रयास
हादसे के तत्काल बाद बिना एक पल गंवाए आयोजन स्थल पर मौजूद पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने घायल नेता को संभाला और अपनी गाड़ियों से तुरंत नजदीकी निजी चिकित्सालय पहुंचाया। चिकित्सालय के वरिष्ठ सर्जन डॉक्टर महेश कुडियाल के नेतृत्व में आपातकालीन चिकित्सा दल ने तुरंत स्थिति को अपने हाथ में लिया।
वरिष्ठ सर्जन के अनुसार, जब मरीज को चिकित्सालय लाया गया था, तब उनके सिर से अत्यधिक रक्तस्राव हो चुका था और आंतरिक चोटें बेहद गंभीर थीं। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्हें तुरंत गहन चिकित्सा कक्ष में स्थानांतरित किया गया और जीवन रक्षक प्रणालियों पर रखकर वेंटिलेटर की सहायता से सांसों को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया।
न्यूरोसर्जरी और क्रिटिकल केयर के विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम ने उन्हें बचाने के लिए हर संभव चिकित्सकीय प्रयास किए, परंतु मस्तिष्क में लगी गहरी चोट के कारण उनके शरीर ने दवाओं पर प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया और आखिरकार चिकित्सालय में उन्होंने दम तोड़ दिया।
कांग्रेस संगठन में शोक की लहर और नेताओं की प्रतिक्रिया
इस अप्रत्याशित और दुखद घटना की सूचना मिलते ही देहरादून के राजनीतिक गलियारों में सन्नाटा पसर गया। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने कहा कि अमर मेहता संगठन के एक समर्पित और निष्ठावान सिपाही थे, जो हमेशा जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करते थे।
दिवंगत नेता अमर मेहता के पुत्र आलोक मेहता भी कांग्रेस संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और वर्तमान में महानगर कांग्रेस कमेटी में महासचिव के पद पर कार्यरत हैं। पिता के निधन की खबर सुनते ही आलोक मेहता और उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता, पूर्व विधायक, महानगर इकाई के पदाधिकारी और सैकड़ों की संख्या में आम कार्यकर्ता चिकित्सालय परिसर और उनके निवास स्थान पर एकत्रित होने लगे।
प्रशासनिक जांच, पोस्टमार्टम प्रक्रिया और सुरक्षा पर उठते सवाल
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें भी तुरंत सक्रिय हो गईं। पुलिस उपाधीक्षक और संबंधित क्षेत्र के थाना प्रभारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया और वहां मौजूद टेंट लगाने वाले कर्मियों तथा चश्मदीदों के बयान दर्ज किए। प्रशासन ने प्रारंभिक जांच के आधार पर इसे एक दुर्घटना माना है, जो टेंट की फिटिंग के दौरान हुई तकनीकी विफलता के कारण घटित हुई।
मृतक नेता के पार्थिव शरीर को पंचनामे के बाद पोस्टमार्टम के लिए कोरोनेशन राजकीय चिकित्सालय भेजा गया, जहां चिकित्सकों के एक पैनल द्वारा शव का परीक्षण किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मृत्यु के सटीक कारणों की वैज्ञानिक पुष्टि हो सकेगी। इस बीच, इस हादसे ने वीवीआईपी कार्यक्रमों में टेंट और भारी ढांचों के निर्माण के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही को उजागर किया है। जानकारों का कहना है कि इतने बड़े आयोजनों में जहां हजारों की भीड़ जुटने वाली हो, वहां निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा हेलमेट, बेल्ट और उचित तकनीकी पर्यवेक्षण का होना अनिवार्य होना चाहिए।
एक समर्पित राजनीतिक जीवन का दुखद अंत
अमर मेहता का जाना देहरादून की स्थानीय राजनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। वे पिछले कई दशकों से सामाजिक कार्यों और पार्टी की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे थे। उनकी पहचान एक ऐसे मिलनसार नेता के रूप में थी, जो सत्ता में न होने पर भी आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। उनके जाने से न केवल उनके परिवार ने अपना मार्गदर्शक खोया है, बल्कि युवाओं ने भी एक प्रेरणास्रोत खो दिया है।
प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि आयोजन स्थल पर निर्माण कार्य कर रही एजेंसी के पास उचित तकनीकी प्रमाणपत्र और सुरक्षा उपकरण थे या नहीं। इस दुखद हादसे के बाद अब आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा और आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से कड़ा करने की मांग उठने लगी है ताकि भविष्य में किसी भी सार्वजनिक या राजनीतिक कार्यक्रम की तैयारियों के दौरान ऐसे बहुमूल्य जीवन को असमय खोने से बचाया जा सके।


