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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा निर्णय: सेना से लौटने वाले अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में मिलेगी प्राथमिकता, युवाओं के सुरक्षित भविष्य का बना मजबूत रोडमैप

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के ऐतिहासिक परिसर में आयोजित भव्य ‘युवा अग्निवीर संवाद’ कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के कोने-कोने से आए ऊर्जावान युवाओं और भावी राष्ट्र रक्षकों के साथ सीधा और जीवंत संपर्क स्थापित किया। इस अत्यंत महत्वपूर्ण वैचारिक समागम के दौरान उन्होंने राज्य सरकार की उन तमाम ऐतिहासिक, युवा-केंद्रित और सैनिक-हितैषी नीतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला, जो उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने के लिए तैयार की गई हैं। उन्होंने अत्यंत भावुक और ओजस्वी शब्दों में उपस्थित जनसमूह से कहा कि युवाओं के चेहरों पर दिखने वाला यह अद्वितीय उत्साह, आत्मविश्वास और राष्ट्र सेवा का जज्बा उन्हें देवभूमि की सेवा करने के लिए हर पल एक नई ऊर्जा और असीमित प्रेरणा प्रदान करता है।

एक वरिष्ठ और निष्पक्ष राजनीतिक विश्लेषक के नजरिए से देखने पर स्पष्ट होता है कि यह कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक संवाद मात्र नहीं था, बल्कि यह देश की सीमाओं की रक्षा करने का सपना देखने वाले युवाओं और राज्य के शीर्ष नेतृत्व के बीच भरोसे का एक नया सेतु था।

देवभूमि के गौरवशाली सैन्य इतिहास और अटूट पारिवारिक संबंधों का स्मरण
उत्तराखंड को भारतवर्ष में आदरपूर्वक ‘सैन्य धाम’ के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यहाँ का लगभग हर दूसरा परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से देश की सशस्त्र सेनाओं से जुड़ा हुआ है। इस गौरवशाली परंपरा को याद करते हुए सूबे के मुखिया ने अत्यंत गर्व के साथ अपनी स्वयं की पारिवारिक पृष्ठभूमि को साझा किया। उन्होंने बताया कि एक सैनिक पुत्र होने के नाते वे भली-भांति समझते हैं कि सीमा पर तैनात एक जवान को किन कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि देश की रक्षा के लिए तत्पर सैनिकों के परिवारों की क्या आवश्यकताएं होती हैं और उनके मन में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर किस प्रकार की चिंताएं होती हैं।

उन्होंने युवाओं को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और विशेष रूप से अग्निवीर योजना के तहत देश सेवा का संकल्प लेने वाले जांबाजों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सरकार की नीतियां केवल कागजी दावों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने के लिए ठोस कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि सेना से लौटने के बाद भी हमारे वीर युवाओं का भविष्य पूरी तरह से सुरक्षित और सम्मानजनक बना रहे।

अग्निवीरों के पुनर्वास और सरकारी नौकरियों में समायोजन की ऐतिहासिक नीति
इस संवाद कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और व्यावहारिक पहलू अग्निवीरों के भविष्य को लेकर की गई बड़ी घोषणाएं थीं। उन्होंने देश की रक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के राष्ट्रीय संकल्प का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि अग्निवीर योजना के अंतर्गत चार वर्ष की उत्कृष्ट सेवा पूरी करने के बाद जब हमारे अनुशासित और प्रशिक्षित युवा नागरिक जीवन में लौटेंगे, तो वे राज्य की प्रगति के लिए सबसे बड़ी संपत्ति साबित होंगे।

इसी दूरगामी सोच के तहत, राज्य सरकार ने पहले ही यह नीतिगत और प्रशासनिक निर्णय ले लिया है कि सेना से लौटने वाले इन कुशल युवाओं को उत्तराखंड सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। गृह विभाग, पुलिस बल, आपदा प्रबंधन बल, वन विभाग और नागरिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में इन प्रशिक्षित युवाओं के शारीरिक कौशल और अनुशासन का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। इसके लिए नियमों में आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं ताकि उन्हें सीधे तौर पर सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता मिल सके। सरकार का मानना है कि सेना के कड़े अनुशासन में तपकर निकले ये युवा राज्य के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक पारदर्शी, अनुशासित और गतिशील बनाने में महती भूमिका निभाएंगे।

रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में पांच वर्षों की ऐतिहासिक उपलब्धियां
युवाओं के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती रोजगार की होती है, और इस विषय पर मुख्यमंत्री ने बेहद मजबूती से अपनी सरकार के आंकड़ों को जनता के सामने रखा। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य सरकार ने निष्पक्षता और पूर्ण पारदर्शिता के साथ चौंतीस हजार से अधिक स्थानीय युवाओं को विभिन्न सरकारी सेवाओं में गौरवशाली नियुक्तियां प्रदान की हैं। यह राज्य के इतिहास में एक कीर्तिमान है, जहां बिना किसी पक्षपात के केवल योग्यता के बल पर युवाओं को उनके सपनों की नौकरी मिली है।

सरकारी सेवाओं के अतिरिक्त, राज्य सरकार उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में कौशल विकास, नवाचार, खेल और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए बहुआयामी प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना जैसी महत्वाकांक्षी पहलों के माध्यम से हजारों ग्रामीण युवाओं को स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने के लिए आर्थिक अनुदान और ऋण की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सरकार का स्पष्ट मानना है कि उत्तराखंड का उज्ज्वल भविष्य पूरी तरह से इसके युवाओं की कार्यकुशलता पर निर्भर करता है, और जब तक युवा आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं होंगे, तब तक राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है।

राजनीतिक स्थिरता, सुशासन और राष्ट्रीय विकास का सह-संबंध
उत्तराखंड के विकास में राजनीतिक स्थिरता की भूमिका पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल और सशक्त नेतृत्व में वर्ष २०१४ के बाद से संपूर्ण भारतवर्ष में विकास और सुरक्षा का एक नया युग प्रारंभ हुआ है। उत्तराखंड को भी उसी प्रगतिशील सोच के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला है। पूर्ववर्ती सरकारों के समय जहां उत्तराखंड में राजनीतिक अस्थिरता के कारण नीतियां और विकास कार्य बाधित होते थे, वहीं वर्तमान में जनता ने सुशासन और स्थिरता को चुनकर एक नई स्वस्थ राजनीतिक परंपरा को जन्म दिया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब किसी राज्य में एक स्थिर और मजबूत सरकार कार्य करती है, तो वह बिना किसी दबाव के जनहित में कड़े और दूरगामी फैसले लेने में सक्षम होती है। इसी सुशासन का परिणाम है कि आज उत्तराखंड देश के सबसे सुरक्षित और तेजी से बढ़ते पर्वतीय राज्यों में अग्रणी बनकर उभरा है। बुनियादी ढांचे का विकास, चारधाम सड़क परियोजना का विस्तार और सीमांत क्षेत्रों के गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य इसी मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण संभव हो पाया है।

युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए खेल और नवाचार को प्रोत्साहन
अपनी बात को समाप्त करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की खेल प्रतिभाओं और तकनीकी नवाचार में रुचि रखने वाले युवाओं के लिए सरकार की नई खेल नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने के लिए सरकार हर जिले में खेल के आधुनिक मैदान और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर रही है। खिलाड़ियों को नौकरियों में खेल कोटे का लाभ देने के साथ-साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सीधी वित्तीय सहायता भी दी जा रही है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी पाने वाले न बनें, बल्कि अपनी रचनात्मकता और उद्यमशीलता के बल पर नौकरी देने वाले बनें। सरकार स्टार्टअप योजनाओं के माध्यम से युवा उद्यमियों को हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहायता देने के लिए तत्पर है। अंततः, यह पूरा संवाद कार्यक्रम इस बात का साक्षी बना कि उत्तराखंड सरकार न केवल युवाओं की वर्तमान चिंताओं के प्रति संवेदनशील है, बल्कि वह उनके सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए एक अत्यंत मजबूत और आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रही है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेगा।

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