राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने देहरादून के थानो क्षेत्र में आयोजित १५वें यंग थिंकिंग मीट के समापन अवसर पर देश के प्रतिभावान युवाओं और विचारकों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस बौद्धिक समागम के अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने “युद्ध और आख्यान” विषय पर अपने विचार साझा किए। अपने ओजस्वी और प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने इस बात पर गहराई से ध्यान केंद्रित किया कि आज के आधुनिक दौर में सूचनाएं और विचार किस तरह किसी भी देश की दिशा और उसकी वैश्विक साख को तय करते हैं। उन्होंने देश के युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि एक मजबूत और सशक्त भारत के निर्माण के लिए हमारी युवा पीढ़ी को सत्य, निष्पक्ष शोध और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर अपने विचार और आख्यान गढ़ने होंगे।
सूचना का दौर और वैचारिक सजगता की जरूरत
कार्यक्रम के दौरान अपने विचारों को विस्तार देते हुए राज्यपाल ने कहा कि हम एक ऐसे युग में जीवन जी रहे हैं जहाँ जानकारी का प्रसार बहुत तेजी से होता है। आज के समय में किसी घटना से जुड़ी जानकारी और उसके बारे में बनाई गई राय उतनी ही महत्वपूर्ण हो चुकी है जितनी कि वह घटना स्वयं होती है। सूचनाओं के इस दौर में कई बार भ्रामक जानकारियां और गलत तथ्य भी लोगों के सामने प्रस्तुत कर दिए जाते हैं, जो समाज में अनिश्चितता और भ्रम का माहौल पैदा कर सकते हैं।
ऐसी स्थितियों का मुकाबला करने के लिए देश के शिक्षित और समझदार युवाओं को आगे आना होगा। जब युवा किसी भी विषय पर अपनी बात रखते हैं, तो उनके विचारों का आधार केवल सुनी-सुनामी बातें नहीं होनी चाहिए। उनके पास ठोस प्रमाण, निष्पक्ष अध्ययन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव होना चाहिए। यदि हमारे विचार सत्य और शोध पर आधारित होंगे, तो दुनिया की कोई भी ताकत भारत के प्रति कोई गलत धारणा निर्मित नहीं कर सकेगी।
युवा शक्ति ही भारत का सबसे बड़ा सामर्थ्य
भारत की जनसांख्यिकी और उसकी आंतरिक क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी सबसे बड़ी शक्ति देश की युवा आबादी है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा ऊर्जा हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। युवाओं के पास नए विचार सोचने की क्षमता, चुनौतियों से लड़ने का साहस और बदलाव लाने की असीम ऊर्जा होती है।
उन्होंने कहा कि जब हम वर्ष २०४७ तक भारत को एक पूरी तरह से विकसित राष्ट्र बनाने के बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, तब इस यात्रा में सबसे बड़ी जिम्मेदारी हमारे युवाओं के कंधों पर ही आती है। यदि देश का युवा सही दिशा में प्रयास करे, तो भारत न केवल हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी राह दिखाने का काम करेगा। युवाओं का यह कर्तव्य है कि वे अपनी क्षमता को पहचानें और राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराएं।
हमारी सभ्यतागत बुद्धिमत्ता हमारी सबसे बड़ी धरोहर
अपने संबोधन में उन्होंने भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक चेतना पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास विचारों, दर्शन और ज्ञान का एक ऐसा अनमोल खजाना है जो दुनिया के किसी अन्य देश के पास नहीं है। हमारे पूर्वजों ने हमें जो सभ्यतागत ज्ञान और जीवन जीने का दृष्टिकोण दिया है, वह आज के दौर की कई समस्याओं का समाधान करने में सक्षम है।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपनी इस समृद्ध ज्ञान परंपरा पर गर्व होना चाहिए। जब युवा अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। अपनी संस्कृति, इतिहास और जीवन मूल्यों को समझकर जब युवा आगे बढ़ते हैं, तो वे सही और गलत के बीच का अंतर आसानी से समझ पाते हैं। यही सांस्कृतिक बुद्धिमत्ता हमारे युवाओं को दुनिया के अन्य युवाओं से अलग और विशेष बनाती है।
आधुनिक तकनीक और नई सोच का समावेश
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि केवल पुरानी उपलब्धियों को याद करना ही काफी नहीं है। यदि हमें आज के दौर में दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है, तो अपनी प्राचीन बुद्धिमत्ता के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान और उन्नत तकनीकों को भी अपनाना होगा। आज का युग तकनीक का युग है और जो देश तकनीक के क्षेत्र में आगे रहेगा, वही दुनिया का नेतृत्व करेगा।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं का ध्यान कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों की ओर आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को निम्नलिखित क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता और ज्ञान को बढ़ाना चाहिए:
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
क्वांटम संगणना और आधुनिक गणित
साइबर सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा
सूचना और संचार प्रौद्योगिकी
उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान
इन सभी आधुनिक तकनीकों में महारत हासिल करके ही हमारे युवा देश को तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बना सकते हैं। जब हमारी सभ्यतागत बुद्धिमत्ता और ये आधुनिक तकनीकें आपस में मिलेंगी, तो भारत के विकास की गति कई गुना बढ़ जाएगी।
वैश्विक नेतृत्व और आत्मनिर्भर भारत का मार्ग
समापन सत्र के दौरान इस बात पर भी विस्तार से चर्चा हुई कि किस तरह भारत वैश्विक मंचों पर अपनी एक नई और मजबूत पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक हर मोर्चे पर भारत की साख बढ़ी है।
इस साख को और अधिक मजबूत करने के लिए युवाओं को आत्मनिर्भरता का रास्ता चुनना होगा। जब देश का युवा नए नवाचार करेगा, नए उद्योग और स्टार्टअप शुरू करेगा और नई खोजें करेगा, तब देश अपने आप हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता चला जाएगा। युवाओं को केवल नौकरी पाने की सोच से बाहर निकलकर नई नौकरियां और नए अवसर पैदा करने की दिशा में सोचना होगा।
सत्य और तथ्य पर आधारित संचार का महत्व
“युद्ध और आख्यान” विषय पर अपने विचारों को और स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर हथियारों से नहीं लड़े जाते, बल्कि वे लोगों के विचारों और दिमाग में भी लड़े जाते हैं। इसे वैचारिक युद्ध कहा जाता है। इस तरह के वैचारिक युद्धों में जीत हासिल करने का सबसे बड़ा हथियार सत्य और तथ्य ही होते हैं।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया और अन्य सूचना माध्यमों का उपयोग बहुत जिम्मेदारी के साथ करें। बिना जांचे-परखे किसी भी जानकारी को आगे न बढ़ाएं। हमेशा सही और प्रामाणिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें और जब भी समाज या देश के सामने अपनी बात रखें, तो पूरी जिम्मेदारी और सत्यनिष्ठा के साथ रखें। एक जिम्मेदार नागरिक और विचारक की यही सबसे बड़ी पहचान होती है।
युवा विचारकों के लिए मार्गदर्शक संदेश
कार्यक्रम के अंतिम चरण में उन्होंने वहाँ उपस्थित सभी युवा विचारकों, शोधकर्ताओं और छात्र-छात्राओं को अपना आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच और कार्यक्रम युवाओं को एक-दूसरे से जुड़ने, नए विचार सीखने और अपनी सोच को विस्तार देने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे यहाँ से सीखे गए विचारों और सिद्धांतों को केवल इस कार्यक्रम तक ही सीमित न रखें, बल्कि अपने दैनिक जीवन और अपने कार्यक्षेत्र में भी इन्हें लागू करें। जब युवा छोटे-छोटे स्तर पर बदलाव लाने का प्रयास करेंगे, तो यही प्रयास मिलकर एक बड़े राष्ट्रीय बदलाव का रूप ले लेंगे।
इस पूरे सत्र का मुख्य संदेश यही था कि भारत का भविष्य उसके युवाओं के हाथों में है। यदि युवा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से प्रेरणा लेकर, आधुनिक तकनीकों को अपनाकर और सत्य पर आधारित विचारों के साथ आगे बढ़ेंगे, तो भारत को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनने से कोई नहीं रोक सकता।
देहरादून के थानो में आयोजित इस समागम ने देश के युवा विचारकों के मन में राष्ट्रसेवा, शोध और सत्य के प्रति एक नई अलख जगाने का काम किया है। यह संवाद युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में अधिक सजग, जिम्मेदार और प्रतिबद्ध बनाने में अत्यंत मददगार साबित होगा।


